कीचड़ भरे रास्ते पर चलने को मजबूर छात्र-शिक्षक

Published by : DEVENDRA DUBEY Updated At : 28 Jul 2025 6:37 PM

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स्कूल जानेवाले पथ का नहीं किया गया पक्कीकरण, लोग परेशान

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चरपोखरी.

चरपोखरी प्रखंड स्थित मझिआंव गांव स्थित राम प्रसाद रौशन उच्च विद्यालय तक जाने वाला रास्ता, विकास के दावों की पोल खोल रहा है. यहां स्कूली छात्र-छात्राएं और शिक्षक नारकीय परिस्थितियों में घुटनों तक कीचड़ से सने रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचने को मजबूर हैं. यह केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता और खोखले विकास के दावों की जीता-जागता उदाहरण है. यहां नौनिहाल और उनके शिक्षक हाथ में चप्पल लेकर कीचड़ भरे रास्ते से डर-डर कर आना-जाना करते हैं.

कई बार तो स्कूली बच्चे संतुलन खोकर गिर जाते हैं और कीचड़ से पूरी तरह सन जाते हैं, जिसके बाद उनका विद्यालय जाना व्यर्थ हो जाता है. यह स्थिति बरसात के दिनों में और भी विकट हो जाती है, जब यह कच्ची सड़क एक दलदल में तब्दील हो जाती है. बता दें कि राम प्रसाद रौशन उच्च विद्यालय मझिआंव के कुरमुरी रजवाहा नहर पथ से जुड़ा हुआ है. यह पथ मझिआंव से दयाल छपरा होते हुए गढ़हनी-बागर पथ को जोड़ता है. विडंबना यह है कि इस मार्ग के अधिकांश हिस्से का पक्कीकरण हो चुका है, लेकिन ठीक विद्यालय तक जाने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर का रास्ता आज भी कच्चा और उपेक्षित पड़ा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी उपेक्षा के कारण बरसात के मौसम में विद्यालय आने-जाने में शिक्षकों और छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

बरसात में स्कूली बच्चों की पढ़ाई होती है प्रभावितबरसात के मौसम में कई बच्चे विद्यालय नहीं जा पाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है. विद्यालय की छात्रा रिधि कुमारी, अंजली, पूजा सहित दर्जनों छात्रों का कहना है कि एक ओर सरकार शिक्षा का अधिकार और ””सब पढ़े, सब बढ़े”” जैसे नारों से देश का भविष्य संवारने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर इन दावों की सच्चाई हमारे विद्यालय के रास्ते में देखने को मिलती है. जब हम लोगों के विद्यालय तक पहुंचने का रास्ता ही इतना दुर्गम हो, तो कैसे कोई पढ़ाई कर पायेंगे? शिक्षकों ने सुनाई अपनी व्यथाविद्यालय के प्रधानाचार्य शशिशेखर शर्मा और शिक्षक मंजर अली का कहना है कि बरसात के दिनों में तीन माह तक इस रास्ते की स्थिति यही रहती है. इसको लेकर अधिकारी, जनप्रतिनिधियों से इस समस्या के समाधान की मांग की गई, लेकिन आज तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया. अब देखना होगा कि विद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों की यह दर्द भरी दास्तान कब सुनी जायेगी.

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