गंगा के कटाव से जवइनिया गांव तबाह, सरकार की उदासीनता साबित : पप्पू यादव

Published by : DEVENDRA DUBEY Updated At : 25 Jul 2025 6:54 PM

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सांसद पप्पू यादव ने कहा, जवइनिया के प्रभावित लोगों को सरकार जल्द दे समुचित मुआवजा

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शाहपुर

. पूर्णिया के सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने शुक्रवार को जिले के शाहपुर थाना अंतर्गत जवइनिया गांव का दौरा किया. जहां तेजी से हो रहे गंगा नदी के कटाव ने आधे गांव को निगल लिया है. उन्होंने मौके पर स्थिति का जायजा लिया और इसे बेहद भयावह और प्रशासनिक उदासीनता का प्रतीक बताया. सांसद पप्पू यादव ने कहा कि जब सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बने हैं, तब पीड़ितों को तात्कालिक राहत पहुंचाना सामाजिक जिम्मेदारी है.

उन्होंने कटाव प्रभावित दो दर्जन से अधिक परिवारों को 20-20 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी. साथ ही पन्नी, खाद्यान्न सामग्री और जरूरी घरेलू सहायता भी उपलब्ध करायी. पप्पू यादव ने इस आपदा के लिए क्षेत्र में सक्रिय बालू माफियाओं को जिम्मेदार ठहराया और आरोप लगाया कि ये माफिया नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत से वर्षों से अवैध खनन करते रहे हैं, जिससे नदी की धारा गांव की ओर मुड़ गयी और यह आपदा उत्पन्न हुई. उन्होंने इन सभी पर आपराधिक जांच और कड़ी सजा की मांग की. सांसद ने मांग की कि जिनके घर कटे हैं उन्हें कम से कम पांच लाख का मुआवजा दिया जाये. साथ ही तीन महीने का राशन प्रति परिवार पांच क्विंटल चावल, एक क्विंटल आटा और जलावन सामग्री भी सरकार सुनिश्चित करे. उन्होंने कहा कि इस आपदा में 400 से 500 एकड़ फसल और कई पंचायतों की कृषि अर्थव्यवस्था तबाह हो गयी है. उन्होंने सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों को कठघरे में खड़ा किया और कहा कि अगर दोनों यहां आते और पीड़ितों की हालत देखते, तो शायद संवेदनाएं जागती. उन्होंने कहा कि सिर्फ चिट्ठी लिखने से कुछ नहीं होगा. सरकार और नेताओं को जमीनी सच्चाई से रूबरू होना होगा. पप्पू यादव ने स्पष्ट किया कि यह आपदा किसी जाति विशेष की नहीं बल्कि माफिया गठजोड़ और प्रशासनिक भ्रष्टाचार का नतीजा है. उन्होंने कहा कि बालू और शराब माफिया सभी जातियों से आते हैं और इनके खिलाफ समान रूप से कार्रवाई होनी चाहिए. सांसद ने कहा कि वे खुद तीन महीने तक राहत कैंप चलाने को तैयार हैं और सभी प्रभावित परिवारों को जहां तक संभव हो सकेगा, मदद देंगे. उन्होंने आह्वान किया कि विपक्ष इस इलाके को बचाने के लिए धरना दे और यदि सरकार चुप रही तो वे खुद आंदोलन का नेतृत्व करेंगे. सरकार के पास संवेदनशीलता नहीं है, हमारे पास साधन नहीं फिर भी जनता के साथ हैं. ये लड़ाई मानवता की है, राजनीति की नहीं.

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