आरा में एसडीओ के आदेश की अनदेखी, नोटरी शपथ पत्र अब भी स्वीकार नहीं कर रहे प्रखंड अधिकारी, लोगों की बढ़ी परेशानी

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अनुमंडलाधिकारी के निर्देश को नहीं मान रहे हैं प्रखंड के अधिकारी

आरा में सदर अनुमंडलाधिकारी के निर्देश की प्रखंड स्तर के अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं. नोटरी शपथ पत्र स्वीकार न करने से लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उनकी परेशानी बढ़ गई है.

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Arrah SDO Order : आरा सदर अनुमंडलाधिकारी के स्पष्ट निर्देश के बावजूद प्रखंड स्तर के कई अधिकारी और कर्मचारी उसका पालन नहीं कर रहे हैं. मामला नोटरी अधिवक्ता द्वारा दिए गए शपथ पत्र और घोषणा पत्र को स्वीकार करने से जुड़ा है. एसडीओ सदर आरा की ओर से 10 जुलाई को जारी आदेश में सभी कार्यालयों में नोटरी एवं अधिवक्ता से सत्यापित शपथ पत्र को मान्य करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी कई जगहों पर पुरानी व्यवस्था के तहत ही कार्य किया जा रहा है.

इस कारण आम लोगों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं और उन्हें अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों का आरोप है कि प्रखंड स्तर के अधिकारी और कर्मचारी अनुमंडलाधिकारी के आदेश को नजरअंदाज कर अपनी मनमानी कर रहे हैं.

Arrah News : एसडीओ ने क्यों जारी किया था आदेश

अनुमंडलाधिकारी सदर आरा शिप्रा विजय कुमार चौधरी ने 10 जुलाई को जारी आदेश में कहा था कि प्रशासनिक कार्यों में उपयोग होने वाले शपथ पत्र और घोषणा पत्र के सत्यापन के लिए आवेदकों को बार-बार कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष जाने की जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा था कि विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता इस कार्य के लिए सक्षम प्राधिकारी हैं. बावजूद इसके कई कार्यालयों में अब भी लोगों से कार्यपालक दंडाधिकारी या राजपत्रित पदाधिकारी से ही शपथ पत्र सत्यापित कराने की मांग की जा रही है.

नोटरी अधिवक्ता को प्राप्त है कानूनी अधिकार

एसडीओ ने अपने आदेश में विभिन्न कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए बताया है कि नोटरी अधिनियम 1952 की धारा 8 के तहत विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता को शपथ पत्र दिलाने, उसका सत्यापन करने और दस्तावेजों का प्रमाणीकरण करने का अधिकार प्राप्त है.

इसके अलावा शपथ अधिनियम 1969 की धारा 3 के अनुसार, कानून द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष ली गई शपथ पूरी तरह वैध मानी जाती है. इसमें विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता भी शामिल हैं.

वहीं, दीवानी प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 139 के अनुसार भी सक्षम प्राधिकारी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र मान्य होता है. हर स्थिति में कार्यपालक दंडाधिकारी या राजपत्रित पदाधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं, जब तक किसी विशेष कानून, नियम या सरकारी आदेश में इसकी बाध्यता न हो.

कार्यालयों को दिया गया था अनुपालन का निर्देश

एसडीओ ने आदेश में स्पष्ट किया था कि सरकार द्वारा नियुक्त और अधिसूचित नोटरी अधिवक्ता से सत्यापित, प्रमाणित और नोटरीकृत शपथ पत्र, घोषणा पत्र एवं अन्य दस्तावेज उन सभी प्रशासनिक कार्यों में स्वीकार किए जाएंगे, जहां किसी विशेष नियम या आदेश के तहत कार्यपालक दंडाधिकारी के हस्ताक्षर जरूरी नहीं हैं.

उन्होंने यह भी निर्देश दिया था कि केवल इस आधार पर कि किसी दस्तावेज पर कार्यपालक दंडाधिकारी या राजपत्रित पदाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं हैं, उसे अस्वीकार नहीं किया जाए.

लोगों को हो रही परेशानी

आदेश जारी होने के बाद भी कई कार्यालयों में इसका पालन नहीं होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. प्रमाण पत्र, आवेदन और अन्य सरकारी कार्यों के लिए लोगों को बार-बार कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है.


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