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Bihar: ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में हुलास पांडेय को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने खारिज की CBI की चार्जशीट

Updated at : 24 Apr 2024 1:28 PM (IST)
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Bihar: ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में हुलास पांडेय को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने खारिज की CBI की चार्जशीट

Bihar: बिहार के बहुचर्चित ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में कोर्ट ने सीबीआई को बड़ा झटका दिया है. इस मामले में पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय को बड़ी राहत मिली है. अदालत ने इस मामले में CBI की चार्जशीट को खारिज कर दिया है.

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Bihar: आरा. बिहार के बहुचर्चित ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में पूर्व विधान पार्षद हुलास पांडेय को बड़ी राहत मिली है. विशेष अदालत ने CBI की चार्जशीट को खारिज कर दिया है. इस हत्याकांड में 10 साल बाद 16 दिसंबर 2023 को सीबीआई ने आरा सिविल कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी. सीबीआई ने इस हत्याकांड हुलास पांडेय सहित 8 लोगों को आरोपी बनाया है. हुलास पांडेय को नामजद अभियुक्त बनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई थी लेकिन अब इस मामले में आरा की एमपी एमएलए विशेष अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट को खारिज कर दिया है.

हुलास पांडेय को राहत

बिहार के चर्चित ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड में पूर्व एमएलसी हुलास पांडेय सहित अन्य आरोपितों को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. आरा की एमपी एमएलए की विशेष अदालत ने इस मामले में सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट खारिज कर दी है. हत्याकांड के आरोपित रितेश सिंह उर्फ मोनू सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सीबीआई की चार्जशीट खारिज कर दी है.

सीबीआई को लगा बड़ा झटका

जानकारी के अनुसार कोर्ट ने केस में ट्रायल शुरू होने के बाद बिना अदालत के आदेश के सीबीआई की ओर से अनुसंधान करने को गलत माना है. कोर्ट के इस फैसले से जहां पूर्व एमएलसी हुलास पांडेय सहित अन्य आरोपितों को राहत मिली है, वहीं सीबीआई को बड़ा झटका लगा है. अब इस मामले में पूर्व से चल रहे ट्रायल के आधार पर 30 अप्रैल को सुनवाई होगी. इस बात की जानकारी एपीपी सियाराम सिंह की ओर से यह जानकारी दी गई.

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मारी गयी थी गोली

मालूम हो कि 1 जून, 2012 को आरा के नवादा थाना क्षेत्र के कतीरा मोहल्ला स्थित ब्रह्मेश्वर मुखिया के आवास से कुछ ही दूरी पर उनकी 6 गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस हत्याकांड के बाद मुखिया समर्थकों में काफी आक्रोश भी भड़का था और आरा से लेकर पटना तक उनके शवयात्रा में शामिल समर्थकों ने प्रतिशोध की भावना से जगह-जगह हिंसा और आगजनी भी की थी. तत्कालीन सरकार ने इस बहुचर्चित हत्याकांड के एक साल यानी 2013 में निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई को यह केस सौंपा था.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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