शाहपुर प्रमुख गीता देवी की कुर्सी बची, अविश्वास प्रस्ताव कोरम के अभाव में खारिज

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शाहपुर प्रमुख गीता देवी व उनके समर्थक

Arrah News: शाहपुर में प्रखंड प्रमुख गीता देवी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव कोरम के अभाव में खारिज हो गया, विपक्ष को बड़ा झटका लगा, जबकि समर्थकों ने इसे न्यायिक और राजनीतिक जीत बताया.

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Arrah News: (मिथिलेश्वर प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट) शाहपुर प्रखंड प्रमुख गीता देवी के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शनिवार को कोरम के अभाव में खारिज हो गया. निर्धारित समय तक आवश्यक संख्या में पंचायत समिति सदस्यों की उपस्थिति नहीं होने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी और यह स्वतः समाप्त हो गया. इसके साथ ही प्रमुख गीता देवी की कुर्सी सुरक्षित रह गई, जिससे उनके समर्थकों में खुशी का माहौल देखा गया.

जानकारी के अनुसार शाहपुर प्रखंड के 20 पंचायतों में पंचायत समिति सदस्यों के कुल 28 पद हैं. अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए कम से कम 19 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य थी, लेकिन तय समय डेढ़ बजे तक प्रमुख गीता देवी को छोड़कर कोई भी सदस्य सदन में उपस्थित नहीं हुआ. इस कारण कोरम पूरा नहीं हो सका और प्रस्ताव खारिज कर दिया गया.

अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी बैठक

इस बैठक के लिए जिला प्रशासन द्वारा उपसमाहर्ता हिना को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था. वहीं सुरक्षा व्यवस्था के लिए थानाध्यक्ष राजेश मालाकार के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी. गौरतलब है कि 17 अक्टूबर 2024 को विपक्ष द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाकर गीता देवी को पद से हटा दिया गया था. इसके खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. लगभग 18 माह बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दोबारा अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिए यह बैठक आयोजित की गई थी.

प्रखंड प्रमुख गीता देवी ने जताया आभार

अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद प्रखंड प्रमुख गीता देवी ने कहा कि उन्हें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और उसी भरोसे का परिणाम उन्हें मिला है. उन्होंने कहा कि सभी पंचायत समिति सदस्यों के साथ समन्वय बनाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा.

उन्होंने अपने समर्थकों और जनता का आभार व्यक्त किया. इस मौके पर विधायक राकेश रंजन ओझा, भाजपा नेता भुअर ओझा, पुतुल साह, रामाशंकर सिंह, सुनील साह, चंद्रशेखर ओझा, संतोष पासवान, भाजपा नेता अंकित पांडे सहित कई लोगों ने उन्हें बधाई दी.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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