भोजपुर में अंचलाधिकारी-राजस्व कर्मचारियों की मनमानी जारी, समीक्षा के बावजूद दाखिल खारिज-परिमार्जन के 8000 केस पेंडिंग

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प्रखंड-सह अंचल कार्यालय,आरा सदर, भोजपुर

Arrah News : भोजपुर जिले में दाखिल खारिज एवं परिमार्जन के मामले में अंचलाधिकारियों एवं राजस्व कर्मचारियों की मनमानी चरम पर है,जिससे लोगों को काफी परेशानी हो रही है.

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Arrah News : (नरेन्द्र प्रसाद सिंह की रिपोर्ट) बिहार सरकार का राजस्व महकम व्याप्त गड़बड़ी को ठीक करने के लिए प्रयासरत है. इसके तहत भोजपुर जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया लगातार प्रयास कर रहे हैं. लगभग 15 दिनों पर समीक्षा कर रहे हैं. पर इसका असर ना तो अंचलाधिकारियों और ना ही राजस्व कर्मचारियों पर पड़ रहा है. जानकारी के अनुसार जिले में दाखिल खारिज व परिमार्जन के 8000 के करीब मामले पेंडिंग हैं. लेकिन लोगों का आरोप है कि परिमार्जन व दाखिल खारिज आदि के मामले में बिना चढ़ावे के काम नहीं किया जा रहा है. लोग कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं. पर उनके काम नहीं हो पा रहे हैं. इससे एक तरफ सरकार की बदनामी हो रही है तो दूसरी तरफ लोगों में सरकार के विरुद्ध आक्रोश पैदा हो रहा है.

35 दिन एवं 75 दिन का है मामला

सरकार ने निर्देश दिया है कि दाखिल खारिज एवं परिमार्जन से संबंधित मामले को 35 दिनों के अंदर या फिर अंतिम रूप से 75 दिनों के अंदर निष्पादन करना है. ताकि लोगों को सुविधा हो सके. पर ऐसा नहीं किया जा रहा है.

क्या गलत आंकड़े प्रस्तुत कर रहे अंचलाधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी?

जिलाधिकारी की लगातार समीक्षा के बावजूद लोगों की परेशानी दूर होने की जगह बढ़ते ही जा रही है. 75 दिनों के बाद भी अंचलाधिकारियों एवं राजस्व कर्मचारियों द्वारा दाखिल खारिज एवं परिमार्जन के मामले पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्हें ठंढ़े बस्ती में रखा गया है एवं इसकी जानकारी जिलाधिकारी को भी नहीं दी जाती है. ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि जिलाधिकारी द्वारा समीक्षा का कौन सा तरीका अपनाया जाता है कि अंचल अधिकारी एवं राजस्व कर्मचारियों द्वारा की जा रही गड़बड़ी पकड़ में नहीं आ रही है?

राजस्व वसूली पर पड़ रहा है बड़ा असर

इतने सारे मामलों के पेंडिंग रहने से राजस्व वसूली पर भी बुरा असर पड़ रहा है. जिले में हजारों आवेदन दाखिल खारिज एवं परिमार्जन को लेकर ठंढ़े बस्ते में डाल दिए गए हैं. उन्हें लटका कर रखा गया है. इस कारण लोग राजस्व रसीद नहीं कटा पा रहे हैं. ऐसे में लाखों रुपए प्रतिमाह, जो सरकार को मिल सकते थे, वह नहीं मिल पा रहे हैं. इससे सरकार को काफी क्षति उठानी पड़ रही है. पर सरकार के कर्मचारी ही सरकार को अपनी मनमानी से राजस्व की क्षति करा रहे हैं.

आवेदन किया जा रहा है वापस

सरकार की कड़ाई एवं निर्देश के बाद दाखिल खारिज एवं परिमार्जन प्लस के मामलों को निर्धारित सीमा अवधि के बाद आवेदक के मेल पर वापस कर गलत टिप्पणी भी की जा रही है. आवेदन में सभी जरूरी कागजात ऑनलाइन करने के बाद भी वही कागजात जमा करने को कहा जा रहा है.

क्या कहते हैं अधिकारी

वहीं इस संबंध में सवाल किए जाने पर जिले के अपर समाहर्ता शशि शेखर ने कहा कि लगातार समीक्षा की जा रही है. लापरवाही जिस स्तर पर होगी, उन पर कार्रवाई की जायेगी.

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निखिल अनुराग

लेखक के बारे में

By निखिल अनुराग

मूलतः निखिल अनुराग. पेशे से पत्रकार. बुद्ध की धरती पर जन्म. बिहार का सबसे नवीनतम जिला (अरवल) से ताल्लुक. पढ़ाई की शुरूआत गांव से ही. फिर गंगा के तट पटना पहुंचा. ज्ञान की धरती से कुछ तालीम हासिल कर राष्ट्रीय राजधानी की ओर कूच. पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट ( माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय). नोएडा की धरती पर विद्वतजन से कुछ न कुछ सीखा. करंट अफ़ेयर्स, राजनीति, खेल, अंतरराष्ट्रीय संबंध, गाँव, खेत-किसान पसंदीदा टॉपिक. स्कूल, कॉलेज युनिवर्सिटी में यूथ से गपशप करना एनर्जी का अतिरिक्त स्रोत. साल 2020 में नोएडा से शुरू हुई इस लेखन यात्रा कलम, डेस्कटॉप, लैपटॉप के की-बोर्ड से होते हुए स्मार्ट फोन तक पहुंच गयी. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ रही है, सीखने, पढ़ने, लिखने की भूख भी बढ़ रही है. नोएडा में टीवी न्यूज में काम करने के बाद हिंदुस्तान ग्रूप होते हुए बिहार, झारखंड की सबसे पसंदीदा अखबार प्रभात खबर में कार्यरत. हां एक बात और... पढ़ने-लिखने की जिज्ञासा कभी खत्म नहीं होगी. साहित्य में बेहद दिलचस्पी.

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