लिपिक संघ ने नियत वेतन देने पर व्यक्त की नाराजगी

सांविधिक नियमावली के उल्लंघन का लगाया आरोप
अररिया. समाहरणालय परिसर स्थित डीईओ कार्यालय के समीप अनुकंपा के आधार पर विद्यालय लिपिक (मूल कोटि) के पद पर कार्यरत लिपिकों ने विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के विरुद्ध नाराजगी जाहिर करते हुए सभी ने संयुक्त रूप डीईओ को आवेदन दिया है. बताया कि उच्च माध्यमिक विद्यालय लिपिक का वेतन 16 हजार 500 प्रतिमाह फिक्स कर दिया गया है. सांविधिक नियमावली का उल्लंघन किया गया. जबकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत गठित “बिहार राज्य विद्यालय लिपिक संवर्ग नियमावली, 202 के नियम 3 (i) में स्पष्ट रूप से एक त्रि-स्तरीय पदोन्नति संरचना (विद्यालय लिपिक वरीय विद्यालय लिपिक प्रधान विद्यालय लिपिक) का प्रावधान है. प्रशासनिक न्यायशास्त्र के अनुसार, एक औपचारिक संवर्ग व कोटि का अर्थ ही नियमित वेतनमान व भत्ता होता है, न कि एक नियत मानदेय. उन्होंने बताया कि जारी अधिसूचना संख्या- 178 में विद्यालय लिपिकों को पूर्व के विद्यालय सहायक के समरूप माना गया है. जबकि 2025 की नियमावली के नियम 16 (iii) के अनुसार, पूर्व के विद्यालय सहायक अब इस नयी नियमावली के तहत विद्यालय लिपिक के पद पर नियुक्त समझे जायेंगे. अतः संवर्ग के गठन के बाद हमें राज्य सरकार के नियमित कर्मियों की भांति वेतनमान मिलना चाहिए. आगे बताया कि हम सभी का नियुक्ति पत्र की शर्त संख्या-5 के अनुसार, मृत सरकारी सेवक के आश्रितों के भरण-पोषण का पूर्ण दायित्व हम लोगों पर है. वर्तमान में बढ़ती महंगाई व बिना महंगाई भत्ते के 16,500 रुपये का नियत वेतन इस वैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करने में अपर्याप्त है. जबकि बिहार राज्य विद्यालय लिपिक संवर्ग नियमावली, 2025 के तहत नियुक्त कर्मी एक नियमित राजकीय संवर्ग का हिस्सा हैं. बिहार राज्य विद्यालय लिपिक संवर्ग नियमावली, 2025 के नियम 15 व 18 के तहत नियमित वेतनमान लागू करने के लिए अपील किया गया. मौके पर जय कुमार, प्रिंस कुमार, विकास कुमार, तकी अहमद, समा सिमी, कोमल कुमारी, नितू सिंह, निशा कुमारी, नूतन कुमारी, अपुर्वा कृष्णा, विक्की, राहुल, मनिष,सोनम सहित अन्य लिपिक मौजूद थे.
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