कुआड़ी में पेट्रोल पंप से बरामद 18 बोरा सरकारी खाद्यान्न मामले में 48 घंटे बाद भी FIR दर्ज नहीं, मुख्य आरोपी को छोड़ने पर पुलिस-एमओ पर सवाल

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कुआड़ी थाना में बरामद कर रखा गया खाद्यान्न | Prabhat Khabar Network

कुआड़ी थाना में बरामद कर रखा गया खाद्यान्न | Prabhat Khabar Network

अररिया जिले में 18 बोरी सरकारी राशन की कालाबाजारी का खुलासा हुआ है, लेकिन 48 घंटे बाद भी FIR दर्ज नहीं हो पाई है. मुख्य आरोपी को हिरासत में लेने के कुछ ही घंटों बाद छोड़ दिए जाने से प्रशासनिक मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं.

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अररिया जिले के कुर्साकांटा-कुआड़ी मार्ग स्थित 'मां तारा फ्यूल सेंटर' (पेट्रोल पंप) से शुक्रवार देर रात बरामद किए गए 18 बोरी सरकारी राशन (गेहूं-चावल) की कालाबाजारी के मामले में नया मोड़ आ गया है. छापेमारी के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की जा सकी है. वहीं, मुख्य आरोपी को पुलिस द्वारा हिरासत में लेने के महज 4 घंटे बाद छोड़े जाने से प्रशासनिक कार्यशैली और विभागीय मिलीभगत पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

गिरफ्तारी के 4 घंटे बाद ही छोड़ दिया गया मुख्य आरोपी

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बिहार राज्य खाद्य निगम (SFC) से भेजे गए राशन की कालाबाजारी कर खरीदारी करने वाले मुख्य आरोपी अरुण मिश्रा को कुआड़ी पुलिस ने 12 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया था.

  • आरोपी की रिहाई: गिरफ्तारी के महज चार घंटे बाद ही पुलिस ने आरोपी को छोड़ दिया.
  • पुलिस की सफाई: कुआड़ी पुलिस का कहना है कि प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MO) द्वारा समय पर लिखित आवेदन (आवेदन पत्र) नहीं दिए जाने के कारण एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी.

एसपी बोले- दोषी पुलिसकर्मियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

मामला तूल पकड़ते ही प्रशासनिक और पुलिस महकमे में खलबली मच गई है:

  • एसडीओ (अररिया) दिक्षित स्वेतम का बयान:
  • एसपी (अररिया) जितेंद्र कुमार का कड़ा रुख:

पेट्रोल पंप के दफ्तर व रसोई से मिला था सरकारी अनाज

उल्लेखनीय है कि कुआड़ी थानाध्यक्ष राजू कुमार के नेतृत्व में हुई छापेमारी के दौरान पेट्रोल पंप से 9 बोरा चावल और 3 बोरा गेहूं बरामद किया गया था. इसके अलावा ग्रामीणों द्वारा जब्त कराया गया 6 बोरा चावल भी पुलिस ने कब्जे में लिया था.

  • ऐसे होता था खेल: ग्रामीणों का आरोप है कि एसएफसी (SFC) का ठेकेदार अनाज माफियाओं से मिलकर पेट्रोल पंप पर ही राशन उतार देता था. गाड़ियाँ तेल भराने के बहाने पेट्रोल पंप पर रुकती थीं और सरकारी खाद्यान्न को पेट्रोल पंप के दफ्तर व रसोईघर में छिपाकर धीरे-धीरे बाजार में बेचा जाता था.
  • पेट्रोल पंप कंपनी से पत्राचार की तैयारी: पुलिस अब पेट्रोल पंप परिसर के दुरुपयोग को लेकर संबंधित तेल कंपनी (Petroleum Company) से भी पत्राचार करने की योजना बना रही है.

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

मुख्य आरोपी की संदिग्ध रिहाई के बाद ग्रामीणों में पुलिस, एमओ, एसएफसी ठेकेदार और पेट्रोल पंप संचालक की आपसी मिलीभगत को लेकर भारी आक्रोश है. ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों को जेल भेजा जाए ताकि सरकारी राशन की कालाबाजारी पर पूरी तरह से नकेल कसी जा सके.


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मृगेंद्रमणि सिंह

लेखक के बारे में

By मृगेंद्रमणि सिंह

मृगेंद्रमणि सिंह प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. प्रभात खबर के अररिया कार्यालय में कार्यरत हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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