1 किलो चावल के लिए चाहिए 3000 लीटर पानी, भरगामा में सुस्त मानसून से सूखने लगी धान की फसल

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1 किलो चावल के लिए चाहिए 3000 लीटर पानी, भरगामा में सुस्त मानसून से सूखने लगी धान की फसल

धन के सूखे खेत

Monsoon Deficit: अररिया के भरगामा प्रखंड में मानसून की दगाबाजी और भीषण उमस ने अन्नदाताओं के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. बारिश न होने से खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं, जिससे फसल को बचाने के लिए किसान महंगे पंपसेटों के सहारे सिंचाई करने को मजबूर हैं.

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भरगामा (अररिया) से राष्ट्र भूषण पिंटू की रिपोर्ट

Monsoon Deficit: भरगामा प्रखंड क्षेत्र में मानसून की सुस्त रफ्तार और लगातार पड़ रही चिलचिलाती धूप ने इलाके के हजारों किसानों की चिंता बढ़ा दी है. आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण खेतों में लगी धान की बिचड़ा और फसल पानी के अभाव में सूखने लगी है. कई मैदानी इलाकों में खेतों में दरारें साफ देखी जा सकती हैं. किसानों का मानना है कि यदि अगले एक-दो सप्ताह के भीतर जोरदार बारिश नहीं हुई, तो इस सीजन में धान उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे खरीफ सीजन की पूरी लागत डूबने का खतरा मंडराने लगा है.

11,900 हेक्टेयर का है लक्ष्य, 80% रोपनी के बाद थमे पैर

  • रोपनी का टार्गेट: प्रखंड कृषि पदाधिकारी आलोक प्रकाश ने बताया कि इस वर्ष भरगामा प्रखंड में कुल 11,900 हेक्टेयर क्षेत्र में धान रोपनी का सरकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
  • 80 फीसदी काम पूरा: जिले में अब तक लगभग 80 प्रतिशत खेतों में धान की रोपनी पूरी हो चुकी है. हालांकि, कुछ ऊंचे भूभागों में अभी रोपनी का कार्य शेष है, जो पटुआ (पाट) की फसल कटने के बाद किया जाना तय है.
  • पानी की भारी खपत: कृषि पदाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी साझा करते हुए बताया कि धान की फसल को अन्य फसलों की तुलना में अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है. वैज्ञानिक मानकों के अनुसार, 1 किलोग्राम धान उत्पादन के लिए लगभग 3,000 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है. औसत से कम वर्षा के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है, जिसका सीधा प्रतिकूल असर पौधों के विकास पर पड़ेगा.

पंपसेट के भरोसे टिकी खेती; बढ़ गया लागत का बोझ

बारिश के अभाव में किसानों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनका बजटीय संतुलन बिगड़ गया है.

महथावा गांव के प्रगतिशील किसान युगानंद दास ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि पिछले वर्ष उन्होंने 10 एकड़ भूमि में धान की सफल खेती की थी, लेकिन इस बार पानी के संकट को देखते हुए वे केवल 6 एकड़ में ही धान लगा पाए हैं. फसल को जिंदा रखने के लिए दिन-रात पंपसेट से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे डीजल और बिजली का खर्च कई गुना बढ़ गया है.

Monsoon Deficit: तेज धूप से शाम तक सूख रहे हैं खेत; इंद्रदेव से गुहार

  • मजदूरों की किल्लत और मौसम का टॉर्चर: भरगामा पंचायत के किसान प्रभात सिंह, वरुण झा, बब्बन सिंह, बबलू रजक, संजय मिश्र व हरिनंदन मंडल ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक खेती कर रहे हैं, लेकिन इस बार जैसी विकट स्थिति पहले कभी नहीं देखी. एक ओर जहां रोपनी के लिए मजदूरों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर सुबह खेतों में पानी भरने के बाद दोपहर की चिलचिलाती धूप और उमस के कारण शाम तक खेत फिर से पूरी तरह सूख जा रहे हैं.
  • मुरझाने लगी फसल: शेखपुरा गांव के किसान गुड्डू यादव, रविंद्र यादव, शेखर यादव व मानुलहपट्टी के बंटी सिंह ने कहा कि बारिश नहीं होने से धान के पौधे पीले और मुरझाने लगे हैं.

वर्तमान में भरगामा के ग्रामीण इलाकों के हजारों किसानों की निगाहें हर रोज सुबह से शाम तक सिर्फ आसमान पर टिकी रहती हैं. क्षेत्र के किसान अब सामूहिक रूप से इंद्रदेव की कृपा का इंतजार कर रहे हैं ताकि मानसून की वापसी हो और उनकी महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद होने से बच सके.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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