आरोपित को उम्रकैद की सजा

Published at :25 May 2024 10:52 PM (IST)
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आरोपित को उम्रकैद की सजा

दुष्कर्म व हत्या का है अभियुक्त

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अररिया. व्यवहार न्यायालय अररिया के एडीजे-01 मनोज कुमार तिवारी ने स्पीडी ट्रायल के तहत 05 वर्ष पूर्व दुष्कर्म कर चाकू से गौद-गौद कर जख्मी कर देने के बाद इलाज के क्रम में मृत्यु हो जाने का मामला प्रमाणित होने पर एकमात्र आरोपित को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनायी है. वहीं आरोपित के पिता ग्यास उर्फ गयासुद्दीन को साक्ष्य के आभाव में रिहा किया गया है. सरकार की ओर से एपीपी राजा नंद पासवान ने बताया कि सज़ा पाने वाला 40 वर्षीय आरोपित फकरुद्दीन पिता ग्यास उर्फ गयासुद्दीन जिले के ताराबाड़ी थाना क्षेत्र के सोगना गांव का रहनेवाला है. जिसे एसटी 230/21 मे सज़ा सुनाई गई है. बताया गया कि 06 मई 2019 को आरोपित फकरुद्दीन ने 20 वर्षीय मृतिका रौशन खातून पति स्वर्गीय सलाउद्दीन को उसका पहचान पत्र व उसके स्वर्गीय पति सलाउद्दीन का मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर आने कहा था. जब मृतिका रौशन गोला चौक पहुंची तब आरोपी ने मृतिका रौशन को ऑटो मे बैठाकर अररिया जीरोमाइल लेकर चला आया. रास्ते में जब मृतिका रौशन ने पूछा की उसे लेकर कहा जा रहे हैं तो आरोपी ने उससे कहा कि उसे लेकर वह दिल्ली जा रहा है. मृतका द्वारा दिल्ली जाने की बात पर आपत्ति किया गया तो आरोपी ने रौशन के मुह पर कपड़ा बांध दिया व मटियारी चौक पर उसे ऑटो से उतार लिया. उसके बाद जबरदस्ती आरोपी ने मृतिका रौशन को पास के मक्का खेत मे ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया. दुष्कर्म के बाद आरोपी ने चाकू से कई वार किया व यह सोचकर कि वह मर गई है. उसके शरीर पर मक्का का डंठल, पत्ता वगैरह को डाल कर ढक कर भाग गया. इधर जख्मी रौशन खातून को लोगो की मदद से अस्पताल लाया गया व बेहतर इलाज के अभाव में पीड़िता रौशन खातून की मृत्यु हो गयी. मौत के पहले इलाज के क्रम में पीड़िता के बयान के आधार पर आरोपी फकरुद्दीन व उसके पिता ग्यास उर्फ गयासुद्दीन के विरुद्ध महिला थाना कांड संख्या 43/2019 दर्ज किया गया था. कोर्ट में सभी गवाहो ने घटना का पूर्ण समर्थन किया. गवाहो के बयान से संतुष्ट होकर न्यायालय के न्यायाधीश श्री तिवारी ने आरोपी को भादवि की धारा 302 व 376 (।।) में आरोपी को दोषी पाया. सज़ा की बिंदु पर एपीपी राजानंद पासवान ने ऐसा जघन्य अपराध करने पर आरोपी को सज़ा ए मौत (फांसी) देने की अपील की. जबकि बचाव पक्ष के वरीय अधिवक्ता मो मंजूर आलम व महिला अधिवक्ता मेनिका कुमारी ने कहा कि झूठे आरोप में फकरुद्दीन को फंसाया गया है व फकरुद्दीन निर्दोष होते हुए भी इस मामले में पिछले 04 वर्ष 10 महीना व 12 दिनों से जेल सुरक्षा में बंद है. चूंकि न्यायालय ने दोषी पाया है इसलिए फकरुद्दीन के लिए कम से कम सजा देने की गुहार लगायी गयी. इधर दोनों पक्षो की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने आरोपी को भादवि की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सज़ा सुनायी, वहीं भादवि की धारा 376 (।।) के तहत आजीवन कारावास की सज़ा तब तक जबतक आरोपी का जीवन है, जेल में ही रहेगा, यानी अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा. न्यायलय के न्यायाधीश मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

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