कुर्साकांटा में नल-जल योजना फ्लॉप: टंकी से आ रहा बदबूदार गंदा पानी

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कुर्साकांटा में नल-जल योजना फ्लॉप: टंकी से आ रहा बदबूदार गंदा पानी

Nal Jal Yojana: अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड में करोड़ों रुपये की लागत से बनी मुख्यमंत्री ग्रामीण नल-जल योजना विभागीय उदासीनता के कारण दम तोड़ रही है. नियमित सफाई न होने से घरों में बदबूदार पानी की सप्लाई हो रही है, जिससे नाराज होकर शंकरपुर के ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

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अररिया के कुर्साकांटा से दिलीप सिंह की रिपोर्ट

Nal Jal Yojana: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड में पूरी तरह कागजों तक ही सीमित होकर रह गई है. प्रखंड क्षेत्र की अधिकांश पंचायतों में लाखों-करोड़ों की लागत से पानी की विशाल टंकियां और पाइपलाइन तो बिछा दी गईं, लेकिन लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) और संवेदक (ठेकेदार) की घोर उदासीनता के कारण आम जनता को शुद्ध पेयजल नसीब नहीं हो पा रहा है. स्थिति यह है कि सरकारी राशि के भारी-भरकम निवेश के बावजूद यह पूरी योजना धरातल पर “ढाक के तीन पात” साबित हो रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के फैलने का खतरा मंडराने लगा है.

पंप संचालकों की तानाशाही; सफाई के अभाव में आ रहा कीचड़युक्त पानी

नल-जल योजना के संचालन में व्याप्त मुख्य प्रशासनिक और जमीनी खामियां निम्नलिखित हैं:

  • ऑपरेटरों की मनमानी: प्रखंड के विभिन्न वार्डों में प्रतिनियुक्त पंप संचालकों की मनमानी चरम पर है. वे सरकारी रोस्टर के अनुसार पानी की सप्लाई करने के बजाय अपनी मर्जी से कुछ मिनटों के लिए पंप चलाते हैं, जिससे कई घरों तक पानी पहुंच ही नहीं पाता.
  • वर्षों से नहीं हुई सफाई: सरकारी नियमावली के अनुसार जलापूर्ति टंकियों की ब्लीचिंग पाउडर डालकर नियमित सफाई होनी चाहिए. परंतु, ग्रामीणों का आरोप है कि यहां वर्षों से टंकियों के भीतर जमी गाद और कीचड़ की सफाई नहीं की गई है, जिसके चलते पाइपों से बदबूदार और दूषित पानी आ रहा है.

शंकरपुर में वर्षों से बंद पड़ी है पानी टंकी; कपड़फोड़ा चौक पर फूटा आक्रोश

क्षेत्र में बंद पड़ी योजनाओं और उसके खिलाफ जनता के विरोध का पूरा विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

प्रभावित पंचायत व स्थलयोजना की वर्तमान भौतिक स्थितिग्रामीणों द्वारा उठाया गया कदम
प्रखंड मुख्यालय टंकीसुचारू है, परंतु नियमित ब्लीचिंग और सफाई न होने से पानी अत्यधिक दूषित है.उपभोक्ताओं ने प्रखंड प्रशासन से लिखित शिकायत कर शुद्धीकरण की मांग की.
शंकरपुर पंचायत (कपड़फोड़ा स्थित PHED टंकी)वर्षों से पूरी तरह बंद और कबाड़ में तब्दील हो चुकी है, सप्लाई पूरी तरह ठप है.आक्रोशित ग्रामीणों ने कपड़फोड़ा चौक पर टायर जलाकर उग्र प्रदर्शन किया और नारेबाजी की.

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ग्रामीणों के लगातार बढ़ते आक्रोश और कपड़फोड़ा चौक पर हुए प्रदर्शन के बाद पीएचईडी विभाग बैकफुट पर नजर आ रहा है.

कुर्साकांटा के पीएचईडी कनीय अभियंता (JE) आदित्य कुमार ने मामले पर सफाई देते हुए कहा कि प्रखंड के विभिन्न वार्डों में स्थापित नल-जल योजनाओं और बंद पड़ी टंकियों की सूची तैयार की जा रही है. वे स्वयं कई वार्डों का भौतिक निरीक्षण कर रहे हैं. जहां भी संवेदक या पंप ऑपरेटर की लापरवाही, वित्तीय अनियमितता या सफाई का अभाव पाया जाएगा, वहां संबंधित एजेंसी का भुगतान रोकते हुए टंकी की मुकम्मल सफाई कराई जाएगी और बंद पड़े प्लांटों को जल्द से जल्द री-स्टार्ट कराकर सुचारू पेयजल आपूर्ति बहाल की जाएगी.

स्थानीय बुद्धिजीवियों और वार्ड सदस्यों का कहना है कि महज आश्वासन से जनता की प्यास नहीं बुझने वाली. जब तक लापरवाह पंप संचालकों पर विभागीय स्तर से वेतन कटौती या सेवामुक्ति जैसी सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी और टंकियों की सफाई की लाइव मॉनिटरिंग नहीं की जाएगी, तब तक सरकार की इस महात्वाकांक्षी योजना का वास्तविक लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मिलना असंभव है.

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Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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