इंद्रधनुष साहित्य परिषद ने गुलेरी और आचार्य शर्मा की मनी जयंती

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इंद्रधनुष साहित्य परिषद ने गुलेरी और आचार्य शर्मा की मनी जयंती

फोटो कैप्शन -:--- हिंदी साहित्य के दो महान विभूति पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी और आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा की जयंती समारोह में मौजूद लोग | Prabhat Khabar Network

फारबिसगंज में इंद्रधनुष साहित्य परिषद द्वारा पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी और आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा की जयंती पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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फारबिसगंज (अररिया): स्थानीय साहित्यिक संस्था इंद्रधनुष साहित्य परिषद के तत्वावधान में शहर के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित पीडब्ल्यूडी प्रांगण में हिंदी साहित्य के दो महान विभूतियों पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी और आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा की जयंती समारोहपूर्वक मनायी गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता बाल साहित्यकार हेमंत यादव ने की, जबकि संचालन परिषद के संस्थापक सचिव विनोद कुमार तिवारी ने किया. कार्यक्रम की शुरुआत दोनों महान साहित्यकारों की तस्वीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर की गई. इसके बाद वक्ताओं ने उनके जीवन और साहित्य पर विस्तार से चर्चा की. हिंदी, संस्कृत, पाली और प्राकृत के प्रकांड विद्वान थे गुलेरी परिषद के उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार झा, पूर्व प्राचार्य हरिशंकर झा, प्रधानाध्यापक दिवाकर कुमार और हिंदी सेवी अरविंद ठाकुर ने चंद्रधर शर्मा गुलेरी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. वक्ताओं ने बताया कि गुलेरी जी का जन्म जुलाई 1883 में जयपुर में और निधन 12 सितंबर 1922 को वाराणसी में हुआ था. वे हिंदी, संस्कृत, पाली और प्राकृत के प्रकांड विद्वान थे. केवल तीन कहानियां लिखकर अमर होने वाले गुलेरी जी ने सैकड़ों निबंध भी लिखे. उनकी प्रसिद्ध कहानी "उसने कहा था " 1915 में सरस्वती पत्रिका में प्रकाशित हुई थी, जिस पर 1960 में फिल्म भी बनी. आज भी यह कहानी हिंदी साहित्य में प्रासंगिक है. इसके बाद शायर हसमत सिद्दीकी, पूर्व प्रधानाध्यापक हर्ष नारायण दास और सभाध्यक्ष हेमंत यादव ने आचार्य देवेंद्र नाथ शर्मा के जीवन पर चर्चा की. बताया गया कि आचार्य शर्मा का जन्म जुलाई 1918 में छपरा में और निधन 1991 में पटना में हुआ. वे हिंदी-संस्कृत के विद्वान, लेखक और महान नाटककार थे. उन्होंने पटना, भागलपुर और दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के उपकुलपति के साथ संस्कृत अकादमी और भोजपुरी अकादमी के अध्यक्ष पद को भी सुशोभित किया. अवसर पर शिक्षक नागेंद्र शुक्ला और सुनील दास ने स्वरचित कविताएं सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. कार्यक्रम में शिवनारायण चौधरी, नंदकुमार पंडित, दिनेश ठाकुर, पलकधारी मंडल, मनीष राज सहित कई साहित्य प्रेमी उपस्थित थे.

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कलीमउद्दीन

लेखक के बारे में

By कलीमउद्दीन

कलीमउद्दीन प्रिंट माध्यम में 24 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, अपराध, शिक्षा, राजनीतिक खबरों में रुचि रखते हैं.

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