ऑनलाइन जमाबंदी का दावा अधूरा, फारबिसगंज में जमीन का रिकॉर्ड खोजने को भटक रहे रैयत

Author Bipul bishwash|Edited by Shruti Kumari
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फारबिसगंज: अधूरे डिजिटलीकरण से परेशान रैयत, जमाबंदी रजिस्टर-2 ऑनलाइन नहीं

फारबिसगंज में जमाबंदी रजिस्टर-2 ऑनलाइन न होने से रैयत परेशान हैं। जमीन का ब्योरा पोर्टल पर नहीं मिलने से लोगों को अंचल कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।

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फारबिसगंज. सरकार की ऑनलाइन जमाबंदी व्यवस्था का लाभ फारबिसगंज के रैयतों को अब तक पूरी तरह नहीं मिल सका है. प्रखंड की अधिकांश पंचायतों के मौजा में ऑनलाइन जमाबंदी रजिस्टर-2 का डिजिटलीकरण अधूरा है. इसके कारण बड़ी संख्या में लोगों की जमीन का रिकॉर्ड पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है और उन्हें अपनी जमीन की जानकारी के लिए अंचल कार्यालय तथा राजस्व कर्मियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

पोर्टल पर नहीं मिल रहा जमीन का रिकॉर्ड

सरकार का दावा था कि ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद लोग घर बैठे अपनी जमीन का पूरा ब्योरा देख सकेंगे. लेकिन वास्तविक स्थिति इससे अलग है. कई रैयतों का कहना है कि पोर्टल पर रिकॉर्ड खोजने पर उनकी जमाबंदी दिखाई ही नहीं देती. इस कारण लोगों को बार-बार कार्यालय जाना पड़ रहा है.

परिमार्जन के सैकड़ों आवेदन लंबित

फारबिसगंज अंचल में ऑनलाइन रिकॉर्ड सुधार (परिमार्जन) के सैकड़ों आवेदन अब भी लंबित हैं. राजस्व महाअभियान के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट कराने के लिए आवेदन दिए, लेकिन अब तक अधिकांश मामलों का समाधान नहीं हो सका है.

दलाल उठा रहे स्थिति का फायदा

स्थानीय लोगों का आरोप है कि रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध नहीं होने से कथित दलाल सक्रिय हो गए हैं. कई लोग जरूरी कागजात और रिकॉर्ड निकलवाने के नाम पर रैयतों से पैसे वसूल रहे हैं. शिकायत करने पर अधिकारियों की ओर से केवल "कुछ दिनों में रिकॉर्ड दिखने लगेगा" कहकर आश्वासन दिया जा रहा है.

पुश्तैनी जमीन का रिकॉर्ड ढूंढना सबसे बड़ी चुनौती

सबसे अधिक परेशानी पुराने जमीन मालिकों के वंशजों और बाहर रहने वाले लोगों को हो रही है. पुश्तैनी जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन नहीं मिलने से उन्हें आवश्यक दस्तावेज जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

विभाग ने फिर शुरू की कवायद

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने पहले भी विशेष अभियान चलाकर सभी मौजा की जमाबंदी को ऑनलाइन दुरुस्त करने की समय-सीमा तय की थी. हल्का कर्मचारियों को जिम्मेदारी भी सौंपी गई, लेकिन कई जगह अभिलेखों की त्रुटियां अब भी बरकरार हैं. अब विभाग घर-घर जाकर मृत व्यक्तियों के नाम दर्ज जमाबंदी को उनके उत्तराधिकारियों के नाम दर्ज करने की तैयारी कर रहा है. हालांकि, इससे रैयतों को कितनी राहत मिलेगी, यह आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा.


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विपुल विश्वास

लेखक के बारे में

By विपुल विश्वास

विपुल विश्वास प्रिंट माध्यम में 20 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सिकटी (अररिया) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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