सब्जी की खेती से आत्मनिर्भर बने किसान, दूसरों के लिए बने मिसाल

Author Rastr bhushan|Edited by Shruti Kumari
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में लहलहाता बैगन का फसल

भरगामा के किसान संजय मंडल ने सब्जी की खेती से सफलता की नई कहानी लिखी है। कम लागत में अधिक मुनाफा कमाकर वे अन्य किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।

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आर्थिक तंगी और बेरोजगारी के कारण जहां बड़ी संख्या में लोग रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं, वहीं अररिया जिले के भरगामा प्रखंड के पैकपार पंचायत वार्ड संख्या-4 निवासी संजय मंडल ने गांव में रहकर ही सफलता की नई मिसाल कायम की है. सब्जी की खेती को आजीविका का माध्यम बनाकर उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गए हैं.

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संजय मंडल ने बताया कि उन्होंने बटाई पर ली गई करीब आठ कट्ठा जमीन में बैगन की खेती शुरू की. शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत और आधुनिक खेती के तरीकों को अपनाया, जिसका सकारात्मक परिणाम आज देखने को मिल रहा है.

कम लागत में बेहतर मुनाफा

संजय मंडल के अनुसार एक कट्ठा बैगन की खेती में करीब एक हजार रुपये की लागत आती है. लगभग 90 दिनों में फसल तैयार हो जाती है. एक कट्ठा जमीन से औसतन 15 क्विंटल बैगन का उत्पादन होता है, जिसका बाजार मूल्य करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. यही वजह है कि कम लागत में सब्जी की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है.

अक्टूबर में होती है बेहतर खेती

संजय मंडल ने बताया कि बैगन की खेती के लिए अक्टूबर का महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है. यदि किसान समय पर पौधरोपण करें और वैज्ञानिक तरीके से फसल की देखभाल करें तो बेहतर उत्पादन के साथ अच्छी आमदनी भी हासिल की जा सकती है.

दूसरे किसानों के लिए बने मिसाल

संजय मंडल की सफलता से प्रेरित होकर आसपास के गांवों के कई किसान भी अब सब्जी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों और सब्जियों की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर विकल्प बन सकती है.

पलायन रोकने में मददगार बन सकती है सब्जी की खेती

संजय मंडल की सफलता इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर गांव में रहकर भी सम्मानजनक आय अर्जित की जा सकती है. उनका कहना है कि यदि किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक सलाह के साथ सब्जी की खेती करें तो यह रोजगार का बड़ा साधन बनने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

प्रमुख बातें

  1. संजय मंडल ने बटाई की आठ कट्ठा जमीन पर बैगन की खेती शुरू की.
  2. एक कट्ठा में करीब एक हजार रुपये की लागत आती है.
  3. 90 दिनों में फसल तैयार होकर लगभग 15 क्विंटल उत्पादन मिलता है.
  4. एक कट्ठा बैगन का बाजार मूल्य करीब 30 हजार रुपये तक पहुंचता है.
  5. संजय मंडल की सफलता से आसपास के किसान भी सब्जी की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं.


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