ध्यान दिवस पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Updated at : 07 Sep 2024 7:15 PM (IST)
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ध्यान दिवस पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

ध्यान दिवस के रूप में मनाया सातवां दिन

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फोटो:43-कार्यक्रम में गीतिका प्रस्तुत करतीं महिलाएं. प्रतिनिधि, अररिया मुनि आनंद कुमार जी कालू के सानिध्य में तेरापंथ भवन में पर्यूषण महापर्व को लेकर ध्यान दिवस पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है. शहर के अररिया कोर्ट स्थित तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमण जी के विद्वान सुशिष्य मुनि आनंद कुमार जी कालूठाणा (2) के पावन सानिध्य में शनिवार को पर्यूषण महापर्व के सातवें दिन-ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया. पर्युषण महापर्व को लेकर बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी मौजूद रहें, कहते है कि यह लौकिक पर्व नहीं है, अपितु आध्यात्मिक पर्व है जिसे त्याग, तपस्या व संयम के साथ मनाया जाता है. पर्युषण पर्व हमें स्मृति दिलाता है कि केवल शरीर तक सीमित ना रहे हैं बल्कि आत्मा के बारे में भी आत्म चिंतन करें. जिसमें श्रावक समाज उपवास, बेला तेला, चोला, अठाई, चतुष्प्रहरी पौषध, छह प्रहरी पौषध, अष्टप्रहरी पौषध, संवत्सरी प्रतिक्रमण के साथ मनाया जायेगा, आज कार्यक्रम में अनीता बेगवानी को आठ की तपस्या का प्रत्याख्यान कराया. साधना पारख (मदनपुर)आठ की तपस्या, पंकज मालू, जयंत खटेड़ की सात की तपस्या गतिमान है. सोमवार को जैन धर्म का महान पर्व क्षमापना दिवस के रूप में मनाया जायेगा, कार्यक्रम में बड़ी संख्या में तेरापंथ सभा, महिला मंडल, तेयुप व अणुव्रत समिति के सदस्य उपस्थित थे. ——————- मन को ध्यान का अंकुश लगाकर काबू में किया जा सकता है: साध्वीश्री फोटो:44-कार्यक्रम में उपदेश देतीं साध्वी श्री. प्रतिनिधि, फारबिसगंज शहर के आरबी लेन में स्थित तेरापंथ भवन में आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री स्वर्ण रेखा जी ठाणा चार की सन्निधि में शनिवार को पर्युषण महापर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया. पर्युषण पर्व आत्म साधना व आत्मा आराधना का पर्व है. साध्वी श्री स्वर्ण रेखा जी ने श्रावक समाज को संबोधित करते हुए कहा कि पयुर्षण पर्व का सातवां दिन ध्यान दिवस निष्पत्ति व उपसंहार के रूप में है. साधु-साध्वी या कोई साधक भी ध्यान रूपी जड़ी-बूटी के बिना खड़ा नहीं रह सकता है. शरीर अलग है, आत्मा अलग है इस भिन्नता को समझ कर हीं अंतर्मन की यात्रा करना ध्यान है. मन को साधना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि यह मन ही मनुष्य के कर्मबंध का कारण व मोक्ष का भी कारण हो सकता है. मन वचन काया की प्रवृत्ति का निरोध करना व एक बिंदु पर एकाग्र होना ही ध्यान है. तत्पश्चात पर्यूषण पर्व के ध्यान दिवस पर एक गीतिका का संगान सेठिया परिवार द्वारा किया गया. साध्वी श्री स्वस्तिका श्री जी व साध्वी श्री सुधांशु प्रभा जी ने एक परिसंवाद के द्वारा ध्यान को साध कर किस तरह मन को जीता जा सकता है, इस विषय पर अपनी प्रस्तुति प्रस्तुति दी. मन चंचल होता है उसे पर अंकुश लगाना जरूरी होता है जिस प्रकार हाथी पर अंकुश लगाकर उसे काबू में किया जाता है, इस तरह मन को ध्यान का अंकुश लगाकर काबू में किया जा सकता है. पयुर्षण पर्व की आराधना में स्थानीय श्रावक श्राविकाओं के साथ अररिया से तपस्वी पंकज मालू का परिवार सम्मिलित हुए व स्थानीय सभा के द्वारा तपस्वी भाई पंकज मालू व अनीता बैगवानी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया. सभी श्रावक श्राविकाओं का तपस्या व संयम के प्रति उत्साह देखने लायक हीं बनता था.

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