एक किसानों ने खरीदे तीन यंत्र

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तीन पंचायतों में एक ही किसान के नाम से तीन बड़े यंत्रों की खरीदारी की गयी. अररिया : कृषि यंत्रों की खरीदारी पर अनुदान वितरण में करोड़ों का घोटाला उजागर होने के बाद अब इसकी पोल परत दर परत खुलने लगी है. यंत्र सप्लायर व किसान के साथ-साथ घोटाले को अंजाम देने में विभागीय अधिकारियों […]

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तीन पंचायतों में एक ही किसान के नाम से तीन बड़े यंत्रों की खरीदारी की गयी.
अररिया : कृषि यंत्रों की खरीदारी पर अनुदान वितरण में करोड़ों का घोटाला उजागर होने के बाद अब इसकी पोल परत दर परत खुलने लगी है. यंत्र सप्लायर व किसान के साथ-साथ घोटाले को अंजाम देने में विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर जारी संदेह भी अब यकीन में तब बदलने लगा है. जब एक ही किसान द्वारा एक ही वित्तीय वर्ष में कई बड़े और महंगे कृषि यंत्रों की खरीदारी कर विभाग में अनुदान का दावा पेश किया गया. एक ही पंचायत में औसत से अधिक यंत्रों का उठाव हुआ. उसे देखते हुए इसे सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि बिना विभागीय अधिकारी की मिलीभगत से इतने बड़े पैमाने पर सरकारी राशि के गबन को अंजाम नहीं दिया जा सकता है.
खास तौर पर अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्रों के वितरण की जटिल प्रक्रिया को देखते हुए करोड़ों की राशि घोटाले के इस मामले में विभागीय अधिकारी की संलिप्तता तय मानी जा रही है.
अनुदानित मूल्य पर कृषि यंत्रों के वितरण की जटिल है प्रक्रिया : यंत्र खरीदारी के लिए विभागीय वेब साइट पर आवेदन के साथ किसान को व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित कागजात अपलोड करना होता है. अपलोड आवेदन पंचायत के कृषि समन्वयक के विभागीय कोड पर भेजी जाती है. समन्वयक कागजात के सत्यापन के बाद इसे प्रखंड कृषि पदाधिकारी के विभागीय कोड पर भेजते हैं. टारगेट के मुताबिक बीएओ दस हजार तक के यंत्र की स्वीकृति दे सकते हैं.
इससे अधिक मूल्य के कृषि यंत्रों की स्वीकृति के लिए डीएओ को भेजी जाती है, जहां से यंत्र खरीदारी के लिए परमिट जेनेरेट होता है, जो पुन: समन्वयक के माध्यम से संबंधित किसान के पास पहुंचता है. परमिट के आधार पर किसान विभाग से संबंद्ध यंत्र विक्रेता से यंत्र खरीदते हैं. यंत्र विक्रेता खरीदे गये यंत्र से संबंधित जानकारी कृषि विभाग के साइट पर अपलोड करते हैं, जो समन्वयक के मोबाइल पर मैसेज किया जाता है. कृषि समन्वयक खरीदे गये यंत्र के साथ किसान की तसवीर विभाग के साइट पर अपलोड करते हैं. इसके बाद सब्सिडी क्लेम जेनेरेट होता है. इस आधार पर ट्रेजरी से निकासी की जाती है और किसानों के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से अनुदान की राशि भेज दी जाती है.
अररिया प्रखंड में अनुदान राशि का सबसे अधिक भुगतान : कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक बीते वर्ष अररिया प्रखंड को सबसे अधिक अनुदान राशि का भुगतान किया गया.
अररिया प्रखंड को कुल 27 लाख 27 हजार 450 रुपये का भुगतान किया गया. इसके अलावा फारबिसगंज प्रखंड को 21 लाख 78 हजार 500 रुपये, रानीगंज प्रखंड को 17 लाख 30 हजार 800 रुपये, पलासी प्रखंड को 8 लाख 96 हजार 750 रुपये, जोकीहाट प्रखंड को 8 लाख 49 हजार 500 रुपये, भरगामा को 13 लाख 14 हजार 500 रुपये, कुर्साकांटा को 3 लाख 58 हजार रुपये, सिकटी को तीन लाख 61 हजार 250 रुपये अनुदान राशि का भुगतान घोटाला के उजागर होने से पहले किया जा चुका था.
अररिया नगर परिषद के अलावा प्रखंड के चातर व गैड़ा पंचायत में बीते वर्ष सबसे ज्यादा यंत्रों का उठाव हुआ. अकेले चातर पंचायत में सभी तरह के कुल 106 यंत्र खरीदे गये.
इसके अलावा विभिन्न तरह के 72 यंत्र गैड़ा पंचायत में और नप क्षेत्र में कुल 71 यंत्रों की खरीदारी की गयी. चंद्रदेई और शरणपुर पंचायत में सबसे कम यंत्र की खरीदारी हुई. चंद्रदेई में एक और शरणपुर में महज तीन यंत्र खरीदे गये. गौरतलब है कि इन तीनों ही जगहों पर एक ही किसान के नाम पर तीन से अधिक बड़े और महंगे यंत्र की खरीदारी की गयी.
एक ही पंचायत से ज्यादा डिमांड और एक ही किसान के नाम पर कई यंत्रों की खरीदारी पर संदेह होने पर जबकि विभागीय स्तर पर इसकी स्थलीय जांच की गयी, तो उक्त किसान के पास से यंत्र गायब मिले. साथ ही यंत्र मुहैया कराने वाले डीलर द्वारा भी इन यंत्रों की खरीदारी से संबंधित जरूरी कागजात जांच के क्रम में विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया. इससे घोटाले की संभावना को मजबूती मिली.
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