नाला से नरक बना शहर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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परेशानी . एनएचआइ के अर्द्धनिर्मित नाला में हो रहा जलजमाव, फैल रही दुर्गंध वैसे तो सड़क व नाला का निर्माण आम लोगों की सुविधा के लिए किया जाता है, लेिकन अररिया नप क्षेत्र के एनएचआइ 327 के निर्माण व इसके बाद हुए नाला निर्माण ने शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी है. अररिया : सड़क चौड़ीकरण […]
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परेशानी . एनएचआइ के अर्द्धनिर्मित नाला में हो रहा जलजमाव, फैल रही दुर्गंध
वैसे तो सड़क व नाला का निर्माण आम लोगों की सुविधा के लिए किया जाता है, लेिकन अररिया नप क्षेत्र के एनएचआइ 327 के निर्माण व इसके बाद हुए नाला निर्माण ने शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी है.
अररिया : सड़क चौड़ीकरण हो अथवा नाला का निर्माण किया जाये यह सभी कार्य आम अवाम को सुविधा देने के लिए किये जाते हैं. लेकिन ताजातरीन मामले में अररिया नगर परिषद क्षेत्र से गुजरने वाले एनएचआइ 327 ई के निर्माण व इसके बाद हुए नाला के निर्माण ने शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. हालात तो यह है कि आधा अधूरा नाला के निर्माण व जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने के कारण हो रहे जल जमाव व कचरों के सड़ांध के कारण लोगों को तीव्र दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है.
नतीजा यह है कि आम अवाम को फायदा पहुंचाने के लिए एनएचआइ के द्वारा बनाया गया फुटपाथ सह नाला लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. अगर जल्द ही इस समस्या का कोई ठोस निदान नहीं निकाला गया तो नाला के किनारे रहने वाले लोगों व अपने आवश्यक सामग्रियों की खरीद के लिए निकलने वाले लोगों के लिए शहर में घूमना मुश्किल हो जायेगा. एनएच 327 ई के शहर के बीचों बीच जब सड़क का निर्माण हो रहा तो एक बार लोगों के लिए ऐसा लग रहा था कि अब शहरवासियों को कम से कम जाम की समस्या से तो मुक्ति मिल जायेगी.
इसके बाद फुटपाथ सह नाला का निर्माण व उसके बगल होकर सर्विस रोड के निर्माण के बाद लोगों को परेशानियां तो हुई लेकिन यह संतोषजनक था कि फुटपाथ पर दूकान लगाने वाले लोगों के रोजगार में व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा. लोगों के इन सब आकलन पर विराम तब लग गया जब फुटपाथ सह नाला के निर्माण प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे विभिन्न स्थानों पर एक दूसरे से जोड़ने का प्रयास तक नहीं किया गया. अगर नाला एक दूसरे से जोड़ दिया जाता और नाला के पानी को शहर से बाहर निकास करनी की व्यवस्था की जाती तो आज जल जमाव की समस्या व कचरों के सड़ांध से होने वाली दुर्गंध से लोगों को परेशानी नहीं झेलनी पड़ती.
शहरवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष आलोक भगत ने बताया कि अगर समय रहते इस समस्या का हल नहीं निकाला गया तो बारिश के मौसम में स्थिति और भी ज्यादा भयावह हो जायेगी. जल जमाव व सड़ांध के कारण लोग संक्रामक बिमारियों के शिकार हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि डीएम को चाहिए कि संबंधित एजेंसी के विरुद्ध शीघ्र ही अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए समस्या का हल निकाला जाये. अगर इस समस्या का हल नहीं निकाला गया तो भाजपा शहरवासियों के हित में आंदोलन चलाने को बाध्य होंगे. इस परेशानी को दूर करने की मांग सचिन दुग्गड़, नीतेश बेगवानी, राजेश बेगवानी, अमीत जैन आदि ने भी डीएम से की है.
डीपीआर में जब विखंडित करने की बात नहीं तो फिर तोड़-तोड़ कर क्यों बनाया गया नाला
जीरो माइल से लेकर चांदनी चौक, एडीबी चौक से लेकर नहर तक, उसके बाद नहर से लेकर एसएसबी कैंप तक एनएच 327 ई पर कुल 4400 मीटर नाला का निर्माण कराया जा रहा है. जिसका अनुमानित प्राक्कलन एनएच के सहायक अभियंता द्वारा 42 करोड़ रुपये बताया गया है. नाला के निर्माण का औचित्य सड़के के पानी के बहाव के लिए है. लेकिन शहर किनारे स्थित मीट, मुर्गा, सब्जी, होटल आदि दूकानदारों द्वारा नाला में कचरा व पानी का बहाव किया जा रहा है. हालांकि नाला का निर्माण शहर के रिहायशी इलाकों में बने अधिकांश मकानों से भी ऊंचा रखा गया है. कहीं कहीं पर नाला की चौड़ाई में अंतर भी देखने को मिल रहा है. मजे की बात तो यह कि योजना की डीपीआर में तय दूरी के अनुसार नाला को कहीं भी विखंडित नहीं करने की बात कही जा रही है.
लेकिन एडीबी चौक से डीएम व एसडीओ के आवास परिसर होते हुए चांदनी चौक तक कही भी नाला का निर्माण नहीं कराया गया है. जबकि चांदनी चौक से आगे जाकर जीरो माइल तक फिर नाला का निर्माण कराया गया है. जाहिर सी बात है कि अगर नाला का जुड़ाव ही एक दूसरे से नहीं होगा तो नाला में जमे पानी या कचरा का जमाव होता चला जायेगा.
जिला प्रशासन द्वारा नाला में जमा कचरों के सड़ांध व जल जमाव की समस्या पर अगर ससमय रोक नहीं लगायी गयी तो मलेरिया व डैंगू जैसे बीमारियों के संक्रामक मच्छर शहरवासियों को बीमार कर सकते हैं. जबकि यह नगर परिषद कार्यालय के लिए भी मुसीबत का सबब बन सकता है.
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