28 लाख की आबादी पर मात्र 50 डॉक्टर
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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स्वास्थ्य . आवश्यकता है 190 चिकित्सकों की अररिया : जिले के 28 लाख की आबादी को मुकम्मल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने को लेकर भले ही जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर मुहिम चलायी जाती रही है. लेकिन हालात बता रहे हैं कि नतीजा आज भी शून्य है. चिकित्सकों का अभाव झेल रहे इस जिले […]
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स्वास्थ्य . आवश्यकता है 190 चिकित्सकों की
अररिया : जिले के 28 लाख की आबादी को मुकम्मल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने को लेकर भले ही जिला मुख्यालय से लेकर प्रखंड स्तर पर मुहिम चलायी जाती रही है. लेकिन हालात बता रहे हैं कि नतीजा आज भी शून्य है. चिकित्सकों का अभाव झेल रहे इस जिले में पिछले कुछ वर्षों से इस बात को लेकर जरूर ही आवाज उठती रहती है प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो में आवश्यक चिकित्सक की नियुक्ति की जायेगी. लेकिन इसके विपरीत आज भी जिले की 28 लाख आबादी पर मात्र 56 चिकित्सक ही काम कर रहे हैं. रेफरल अस्पताल व पीएचसी में विशेषज्ञ चिकित्सक नगण्य हैं.
जिला स्वास्थ्य विभाग की माने तो सरकार को बार-बार पत्र भेजे जाने के बाद भी जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों की प्रतिनियक्ति नहीं की जा सकी है. हाल तो यह है कि विगत के वर्षों में पीएचसी व अन्य सरकारी अस्पतालों में भेजे गये आयुष चिकित्सकों से एलोपैथी मेडिसीन का इलाज कराया जा रहा है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य में गुणात्मक सुधार की बात कहना बेईमानी होगी. इस हालात में एक बात तो तय है कि ग्रामीण स्तर पर आखिर कर मरीजों का प्राथमिक उपचार कौन करेगा. आज की परिस्थिति में मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा दिये गये दवा के इस्तेमाल करने या सूई लेने के लिए किसी न किसी अनुभवी चिकित्सकों के पास जाना पड़ता है.
जिले में उपलब्ध चिकित्सकों का हाल : जिला सिविल सार्जन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में 190 चिकित्सकों की आवश्यकता है. वर्तमान में मात्र 56 चिकित्सक कार्यरत थे, जिसमें से तीन ने इस्तीफा दे दिया जबकि तीन चिकित्सक पीजी की पढ़ाई का हवाला देकर विरमित किये गये हैं.
हालात तो यह है कि किसी भी पीएचसी में महिला विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है. सिविल सार्जन से मिली जानकारी के अनुसार दो महिला चिकित्सक सदर अस्पताल में अगर हैं तो वे भी विशेषज्ञ नहीं हैं. ऐसी स्थिति में या तो जिले के मरीज भगवान के भरोसे चल रहे हैं या फिर इनके खेवनहार के रूप में ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद अनुभवहीन चिकित्सक से वे अपने इलाज कराने के लिए विवश हैं.
12 महिला चिकित्सिक के स्थान पर काम कर रहे हैं मात्र दो वह भी महिला रोग के विशेषज्ञ नहीं
जिले के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर आयुष चिकित्सक कर रहे हैं एलोपेथ दवा से मरीजों का उपचार
चिकित्सकों के लिए सरकार को भेजा है पत्र
चिकित्सकों की कमी है. चिकित्सक उपलब्ध कराने के लिए राज्य स्वास्थ्य विभाग को बार-बार पत्र भेजा गया है. ग्रामीण स्तर पर अगर मरीजों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध नहीं हो तो यह परेशानी का शबब बन सकता है. स्वास्थ्य सेवाओं पर लोड बढ़ सकता है. ग्रामीण चिकित्सकों को प्रशिक्षण देकर उन्हें पीएचसी से जोड़ा जाना चाहिए.
डॉ एनके ओझा, सिविल सर्जन
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