डीएनए जांच रिपोर्ट नहीं आने से पीड़ित परेशान, न्याय में देरी

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सिस्टम के विरुद्ध नहीं बोल सकता : एसपी अररिया : जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड, न्याय के क्षेत्र में चर्चित है़ किसी मामले में देर से न्याय आने पर ऐसा कहा जाता है़ इसमें कहां कमी रह जाती है या फिर किस वजह से ऐसी स्थिति आ जाती है़ डीएनए रिपोर्ट नहीं आने के चलते […]

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सिस्टम के विरुद्ध नहीं बोल सकता : एसपी

अररिया : जस्टिस डिलेड इज जस्टिस डिनाइड, न्याय के क्षेत्र में चर्चित है़ किसी मामले में देर से न्याय आने पर ऐसा कहा जाता है़ इसमें कहां कमी रह जाती है या फिर किस वजह से ऐसी स्थिति आ जाती है़ डीएनए रिपोर्ट नहीं आने के चलते न सिर्फ पीड़िता को या फिर अभियुक्त को इंसाफ मिलने में देरी हो जाती है बल्कि इस दौरान पीड़ित पक्ष व आरोपी पक्ष दोनों ही मानसिक यंत्रणा झेलने को लाचार रहते है़ं मानसिक यंत्रणा अवसाद में ले चले जाता है वहीं न्यायालय में वर्षों से इस तरह का मामला लबिंत रह जाता है़ इससे न्यायपालिका में कांडों के बोझ में इजाफा भी हो जाता है़ ऐसे भी ही लोग आम बोलचाल में कह उठते हैं कि देरी से मिला न्याय, न्याय नहीं रह जाता है़
क्या कहते हैं एसपी
कुछ मामले न्यायालय के आदेश पर तो कुछ मामले एसपी स्तर से डीएनए टेस्ट में भेजा जाता है़ कुछ मामले ऐसे भी सामने आते हैं कि उभय पक्ष टेस्ट के लिए तैयार ही नहीं होते है़ं इसका चाहे जो भी कारण हो़ जांच रिपोर्ट समय पर नहीं आने से मामला लंबित तो रहता है ही. उन्होंने कहा कि इस बाबत लगातार पत्राचार भी किया जाता है. सिस्टम के विरुद्ध मैं नहीं कुछ कह सकता हूं.
केस स्टडी एक : टेस्ट हुआ, नहीं आयी रिपोर्ट
नगर थाना में एक महत्वपूर्ण कांड वर्ष 2013 से लबिंत है़ यह मामला एक अधिवक्ता व एक महिला के बीच का है़ कांड संख्या 355/13 महज इसलिए लंबित है कि उस मामले में उभय पक्षों का डीएनए टेस्ट होना है़ टेस्ट हुआ भी है़ लेकिन रिपोर्ट नहीं आने से मामला यूं ही पड़ा हुआ है. इसी बीच उभय पक्ष तनाव-अवसाद के बीच जिंदगी गुजार रहे हैं. इस मानसिक तनाव-अवसाद का आखिर दोषी कौन है. आखिर महीनों वर्षों तक डीएनए का रिपोर्ट विधि विज्ञान प्रयोगशाला से क्यों नहीं आ पाता है? यह व्यवस्था की खामियों उजागर करता है़
केस स्टडी दो : कब मिलेगा दोषी को सजा
जिले के मदनपुर ओपी क्षेत्र के टोला दियारा की एक नाबालिग से कथित आरोपी ने न सिर्फ शारीरिक संपर्क बनाया बल्कि शादी का प्रलोभन देकर यौन शोषण का दौर चला है. नाबालिग गर्भवती हो गयी़ मामला महिला थाना कांड संख्या 28/13 अंकित किया गया. इस क्रम में नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया. हालांकि बच्ची इस दुनिया में नहीं है़ उभयपक्षों का डीएनए टेस्ट के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया, लेकिन अब तक यह मामला लंबित है़ डीएनए रिपोर्ट नहीं आया़ उभय पक्ष मानसिक तनाव में जिदंगी गुजार रहा है. आखिर इसका दोषी कौन? कब मिलेगा न्याय? कब मिलेगा कथित दोषी को सजा?
केस स्टडी तीन : तनाव देने का दोषी कौन?
रानीगंज थाना क्षेत्र के तमघटी गांव की पीड़िता ने नामजद प्राथमिकी तब दर्ज करायी थी़ जब वह गर्भवती हो गयी थी़ नामजद अभियुक्त अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा था़ वरीय पुलिस पदाधिकारी के निर्देश पर मामला डीएनए जांच में भेजा गया़ लेकिन महिला थाना कांड संख्या 29/13 का डीएनए जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आयी. ऐसे में उभय पक्ष मानसिक तनाव में जी रहा है़ इस तनाव देने का आखिर दोषी कौन?
केस स्टडी चार : शादी से किया इनकार
नगर थाना क्षे़त्र के झमटा गांव की एक पीड़िता ने महिला थाना कांड संख्या 47/14 दर्ज कराया. गांव के ही एक युवक को नामजद किया़ आरोप लगाया कि उसने प्रलोभन मे लाकर यौन शोषण किया़ पीड़िता गर्भवती हो गयी. आरोपी फिर अपने वादे से मुकर कर शादी से इंकार कर दिया. इस मामले में भी पुलिस के वरीय पदाधिकारी के निर्देष पर डीएनए टेस्ट का निर्देश मिला़ जांच रिपोर्ट के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया़ लेकिन जांच रिपोर्ट का अब तक लबिंत है़ सहजता से समझा जाना चाहिए कि पीड़िता व आरोपी दोनों समाज में किस तरह जिदंगी गुजार रहा होगा़
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