बोलेरो ने साइकिलसवार को कुचला
नरपतगंज-फारबिसगंज एनएच 57 पर घटी घटना पंजरकट्टा वार्ड तीन के रहने वाले थे मृतक नरपतगंज : नरपतगंज-फारबिसगंज एनएच 57 के पंजरकट्टा गांव के समीप बुधवार को तेज रफ्तार में जा रहे बोलेरो ने एक साइकिल सवार को कुचल डाला. घायल अवस्था में स्थानीय लोग उसे इलाज के लिए फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल ले गये. जहां चिकित्सकों […]
नरपतगंज-फारबिसगंज एनएच 57 पर घटी घटना
पंजरकट्टा वार्ड तीन के रहने वाले थे मृतक
नरपतगंज : नरपतगंज-फारबिसगंज एनएच 57 के पंजरकट्टा गांव के समीप बुधवार को तेज रफ्तार में जा रहे बोलेरो ने एक साइकिल सवार को कुचल डाला. घायल अवस्था में स्थानीय लोग उसे इलाज के लिए फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल ले गये. जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया. मृतक की पहचान पंजरकट्टा वार्ड संख्या तीन निवासी 60 वर्षीय विद्या नंद यादव पिता स्व झुनाय यादव के रूप की गयी.
जानकारी के अनुसार बुधवार की सुबह विद्या नंद यादव जनवितरण प्रणाली की दुकान से केरोसिन लाने जा रहा था. इसी दौरान एनएच 57 के किनारे स्थित सत्संग मंदिर के समीप सड़क पार करने के दौरान एक बोलेरो की चपेट में आ गया. अज्ञात बोलेरो ठोकर मार कर फरार हो गया. घटना की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और परिजन घटना स्थल पर पहुंच कर घायल अवस्था में इलाज के लिए फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल में भरती कराया. लेकिन चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया. परिजन शव को घर लाया. उधर मामले की जानकारी मिलते ही नरपतगंज थानाध्यक्ष पीके प्रवीण ने पुलिस बल के साथ घटना स्थल पर पहुंच कर मामले की जानकारी ली.
नहीं चेते, तो किताबों में ही दिखेगा कुआं
आशुतोष कुमार सोनू4 ताराबाड़ी
शहर से लेकर गांवों तक जीवन का आधार माने जाने वाला कुआं का अस्तित्व अब समाप्त होने के कगार पर पहुंच चुका है. शहर में कुआं ढूंढने से भी नहीं मिल रहा है. हालांकि गांवों में कहीं-कहीं कुआं देखने को मिल रहा है. गांव में जो भी कुएं बचे हुए हैं उसकी स्थिति भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में दिख रही है. लगातार बढ़ रही भीषण गरमी के कारण कुएं में पानी भी काफी नीचे चला गया है. कुएं की देखभाल नहीं होने के कारण पानी में गंदगियों का अंबार लगा रहता है. जिसके कारण कुएं का पानी का उपयोग भी करना मुनासिब नहीं होता है. यहीं स्थिति रही तो आने वाले समय में लोगों के लिए कुआं एक कहानी का हिस्सा बन कर रह जायेगा.
आज भी है धार्मिक महत्ता
बढ़ती जनसंख्या के कारण जमीन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के कारण शहरी क्षेत्रों में घरों या दरवाजे पर निर्मित कुओं को पूरी तरह भर कर घर बना लेने के कारण कुओं का अस्तित्व समाप्त हो चुका है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धार्मिक महत्ता कायम है. बुजुर्गों द्वारा कहा जाता है कि कुएं में भगवान कमली का वास होता है. इसलिए लोक आस्था का महापर्व छठ से लेकर पूजा-पाठ, शादी- विवाह व अन्य शुभ कार्यों में कुएं की पानी का विशेष महत्व कि परंपरा चली आ रही है. शादी विवाह में कुएं की भी पूजा की जाती है. इसके बावजूद कुओं का अस्तित्व जिस तरह इतनी तेजी के साथ समाप्त होता जा रहा है कि आने वाले कुछ समय में सारी परंपराओं समाप्त होने से इनकार नहीं किया जा सकता.
जागरूकता से बच सकेगा अस्तित्व : जल संरक्षण के लिए कुओं का होना आवश्यक है. यदि सरकार कुआं की ओर ध्यान दे और इसे पूर्ण जीवित कराने के लिए कोई कदम उठाये तो लोगों के लिए ये महत्वपूर्ण साबित होगा. वहीं स्वास्थ्य विभाग के द्वारा समय-समय पर पाउडर का छिड़काव कराने से लोग अच्छी तरह कुएं का पानी सेवन कर सकेंगे.
जवाहर रोजगार योजना में लगा ग्रहण :कुछ वर्ष पूर्व सरकार द्वारा जवाहर रोजगार योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के उद्देश्य से कुओं का निर्माण कराने का कार्य किया गया था. लेकिन कुछ ही दिनों में जवाहर रोजगार योजना पर भी ग्रहण लग गया. जिसके कारण सिंचाई व कुओं का काम भी अधर में लटक गया. यहां तक की कुओं का पानी स्वच्छ रखने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा देखभाल किया जाता था. आज यदि देखें तो कुआं एक अभिशाप बन कर है.
कहते हैं पदाधिकारी
इस बाबत पीएचइडी के कार्यपालक पदाधिकारी सुरेश दूबे ने कहा कि कुओं की महत्ता तो है ही. लेकिन उनके यहां कुओं को बचाने के लिए कोई योजना नहीं है. यह एक गंभीर मामला है.
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