पिता से सीखे गुण को छात्राओं के बीच नि:शुल्क बांट रहे हैं दारोगा
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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74 से भी ज्यादा बांसुरियों का कलेक्शन सभी बांसुरी एक से बढ़ कर एक अररिया : सरकारी सेवा के साथ ही अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रचार करने में लगे हुए हैं अररिया उत्पाद विभाग के उत्पाद अवर निरीक्षक रंजीत कुमार. बांसुरी वादन के सौकीन रंजीत कुमार के पास आज 74 से भी अधिक बांसुरी का […]
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74 से भी ज्यादा बांसुरियों का कलेक्शन
सभी बांसुरी एक से बढ़ कर एक
अररिया : सरकारी सेवा के साथ ही अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रचार करने में लगे हुए हैं अररिया उत्पाद विभाग के उत्पाद अवर निरीक्षक रंजीत कुमार. बांसुरी वादन के सौकीन रंजीत कुमार के पास आज 74 से भी अधिक बांसुरी का कलेक्शन है. उन्हें यह गुण अपने पिता सुग्रीव कुमार राय से मिला जो कि रेलवे में नौकरी करते थे.
उनके पिता के इस कला के लिए वर्ष 1991 में धनबाद डीसी द्वारा पुरस्कार भी दिया गया था. उन्होंने बताया कि उनके पिता रेलवे की नौकरी के क्रम में जब धनबाद पहुंचे तो उनके बारे में यह चर्चा चारों तरफ फेलनी लगी के वे बांसुरी(बंदिश) वादन में दक्ष हैं. लिहाजा उन्हें सरकारी कार्यक्रमों में बुलाया जाने लगा. उस वक्त रंजीत कुमार वर्ग 09 वीं में पढ़ाई कर रहे थे.
पिता से उन्होंने भी बांसुरी सिखने की जिद ठानी. पिता ने उन्हें भी बड़े प्यार से बांसुरी सिखाया व कहा कि आज ही नहीं आगे चलकर भी तुम यह गुण लोगों में बांटना. यह भारतीय संस्कृति है. कृष्ण को भी बांसुरी प्यारा था. इसलिए इसका प्रचार करना. लिहाजा रंजीत कुमार अवर निरीक्षक की नौकरी के क्रम में जब अररिया पहुंचे तो उन्होंने पिता के बताये गये निर्देशों का सत प्रतिशत पालन जारी रखा.
74 बांसुरी का कलेक्शन, सबसे महंगी 62 सौ की
आज उनके पास सबसे महंगी बांसुरी 6200 की इ बैस बांसुरी के अलावा 3500 रुपये की सबसे सस्ती बांसुरी भी है. इसके अलावा उनके पास उपलब्ध 74 पीस बांसुरी है. वे सिखने आने वाले उत्सुक छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क रूप से बांसुरी वादन का प्रशिक्षण दे रहे हैं. बताया कि उनके पिता भी सेवानिवृत हो जाने के बाद भी बांसुरी वादन का प्रशिक्षण देकर सैकड़ों शिष्य की जमात खड़ी कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि किसी भी जिले में इस कला के दक्ष लोगों की संख्या गिनतियों में है. लेकिन इसकी मीठी धुन सुनना सभी पसंद करते हैं. बताया कि उनके गुरु पटना के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र के सरफुद्दीन भले ही एक झोपड़ी नुमा घर में रह रहे हैं. लेकिन उनकी पीढ़ी आज भी बेहतरीन बांसुरी का निर्माण करने में लगी हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस कला में दक्ष लोगों को प्रोत्साहित कर आगे लाया जाये. उन्होंने बांसुरी के धुन पर राष्ट्र गीत को उतार कर लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.
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