बाढ़ के तीन माह बाद भी गृह क्षति अनुदान का नहीं है अता-पता

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राज्य आपदा प्रबंधन विभाग मांग रहा कोटिवार रिपोर्ट अंचलाधिकारी नहीं भेज रहे सर्वे रिपोर्ट अररिया : प्रशासनिक रिपोर्ट चाहे जो भी कहती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही इशारा कर रही है कि जिले के बाढ़ पीड़ित अब भी उपेक्षा के शिकार हैं. सरकारी घोषणा के अनुसार जहां यह माना जा रहा था कि छठ पर्व […]

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राज्य आपदा प्रबंधन विभाग मांग रहा कोटिवार रिपोर्ट

अंचलाधिकारी नहीं भेज रहे सर्वे रिपोर्ट
अररिया : प्रशासनिक रिपोर्ट चाहे जो भी कहती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यही इशारा कर रही है कि जिले के बाढ़ पीड़ित अब भी उपेक्षा के शिकार हैं. सरकारी घोषणा के अनुसार जहां यह माना जा रहा था कि छठ पर्व से पहले ही शत-प्रतिशत पीड़ितों के बैंक खातों में छह छह हजार की राशि पहुंच जायेगी. उसके बाद गृह क्षति अनुदान का सिलसिला शुरू हो जायेगा. पर सूरते हाल बिल्कुल अलग है. कारण चाहे सूची की गड़बड़ी हो या बैंक की कोताही, पर आलम यही है
कि बाढ़ गुजर जाने के तीन माह बाद भी शायद ही ऐसा कोई पंचायत मिले जहां शत-प्रतिशत बाढ़ पीड़ितों को सहायता राशि मिल गयी हो. पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर अंचलाधिकारियों के चक्कर काट-काट कर बाढ़ पीड़ित इस हद तक आजिज आ चुके हैं. दूसरी तरफ गृह क्षति अनुदान का मामला तो अब तक कागजी कार्रवाई तक ही सिमटा हुआ है. हालांकि राज्य आपदा प्रबंधन विभाग गृह क्षति को लेकर कोटिवार अधियाचना की मांग जिले से कर रहा है, ताकि आवश्यक राशि भेजी जा सके. पर बार-बार स्मारित करने के बावजूद अंचलाधिकारी अपनी रिपोर्ट जिला कार्यालय को नहीं भेज रहे हैं.
वैसे जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय की रिपोर्ट पर भरोसा करें, तो बाढ़ के कारण जिले में लगभग तीन लाख घरों की क्षति का अनुमान है. जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से राज्य सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ के कारण जिले के 28 हजार पक्के व 55 हजार कच्चे मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि एक लाख 95 हजार झोपड़ियां भी क्षतिग्रस्त हुईं. बताया जाता है यह केवल अनुमान है. क्षति का सही आकलन सर्वे से ही होगा. जानकारी के मुताबिक जिले में गृह क्षति का सर्वे अब तक पूरी तरह शुरू ही नहीं हो पाया है. अधिकारी से लेकर जन प्रतिनिधि तक सहायता राशि के पचड़े में ही उलझे हुए हैं. जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के अपर सचिव ने क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मती व पुनर्स्थापन के लिए 14 नवंबर को जिला प्रशासन को पत्र भेज कर कोटिवार अधियाचना की मांग की है.
पत्र में कहा गया है कि अधियाचना प्राप्त नहीं होने के कारण राशि आवंटन में कठिनाई हो रही है.
अनुमानित क्षति
कच्चा मकान 55000
पक्का मकान 28000
झोंपड़ी 195000
कुल 278000
अनुमान्य राशि
पक्का मकान 5200 रुपये
कच्चा मकान 3200 रुपये
झोंपड़ी 4100 रुपये
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