हर महीने चोरी हो रही है 8 करोड़ की बिजली, टोंका रोकने के लिए लगाया जा रहा एबी केबल

बिजली चोरी से पेसू को हर माह लगभग आठ करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. नवंबर, 2020 में इसका एग्रीगेट टेक्निकल और कॉमर्शियल लॉस 22 फीसदी था, जबकि मानक के अनुसार 15 फीसदी होना चाहिए.
अनुपम कुमार, पटना . बिजली चोरी से पेसू को हर माह लगभग आठ करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. नवंबर, 2020 में इसका एग्रीगेट टेक्निकल और कॉमर्शियल लॉस 22 फीसदी था, जबकि मानक के अनुसार 15 फीसदी होना चाहिए.
इससे अधिक होने वाले सात फीसदी के नुकसान की बड़ी वजह बिजली चोरी है. पेसू ने नवंबर, 2020 में बिजली बिल संग्रह से 113 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया था.
यदि बिजली चोरी पर सख्त रोक लगाकर मानक के अनुरूप एटीएंडसी लॉस को 15 फीसदी तक सीमित रखा जाता, तो यह राशि लगभग 121 करोड़ रुपये होती.
पिछले एक वर्ष के आंकड़े को देखने पर पेसू का एटीएंडसी लॉस 20 से 25 फीसदी के बीच मिलता है और हर माह औसतन आठ करोड़ का नुकसान पेसू को बिजली की चोरी के कारण होता है.
बिजली की चोरी के लिए टोंका लगाने का तरीका सबसे अधिक प्रचलित है. इसे रोकने के लिए एबी केबल लगाने का काम पिछले कई वर्षों से चल रहा है.
मोटे रबर कोट के कारण न केवल यह सुरक्षित है, बल्कि इससे टोका फंसाना भी संभव नहीं है. हालांकि, शहर के एक बड़े हिस्से में एबी केबल नहीं लगे होने की वजह से यह तरीका भी नाकाफी साबित हो रहा है.
बिजली चोरी रोकने के लिए पेसू में मुख्यालय और डिविजन दोनों स्तर पर टीमें हैं. 50 यूनिट से कम खपत वाले ग्राहकों का समय-समय पर वेरीफिकेशन किया जाता है और गड़बड़ी का संदेह होने पर पूरी जांच पड़ताल की जाती है. किसी स्रोत से बिजली चोरी की सूचना मिलने पर औचक जांच की जाती है.
छह लाख से अधिक पेसू के उपभोक्ता
घरेलू : 460729
इंडस्ट्रियल एचटी : 757
इंडस्ट्रियल एलटी : 4449
एनडीएस(कॉमर्शियल) : 107186
आइएएस: 848
पीयूबीडब्ल्यूडब्ल्यू : 191
एसएस: 281
कुल: 5,72,986
बिजली की चोरी रोकने के लिए इन दिनों लगाये जाने वाले ट्रांसफाॅर्मरों में मीटर लगा होता है. इसमें हर दिन ट्रांसफाॅर्मर से होने वाली सप्लाइ को मापने की क्षमता है. लेकिन, कुछ व्याहारिक समस्याओं के कारण इसका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.
ट्रांसफाॅर्मर के इलेक्ट्रिक फ्लो का मीटर रीडिंग करने के लिए बिजली मिस्त्री को शटडाउन लेना पड़ता है. चूंकि इससे पूरे फीडर की बिजली बंद हो जाती है, लिहाजा उपभोक्ता को होने वाले परेशानी को ध्यान में रखते हुए मीटर रीडिंग से परहेज किया जाता है.
एक ट्रांसफॉर्मर पर लोड बढ़ने से जब उसका फ्यूज उड़ता है, तो लोड कम करने के लिए मिस्त्री कुछ कनेक्शन को बगल वाले ट्रांसफाॅर्मर पर शिफ्ट कर देता है. ऐसे में ट्रांसफाॅर्मर लेवल पर इलेक्ट्रिक फ्लो मापा भी जाये, तो मीटर लेवल पर फ्लो को कलेक्ट करना मुश्किल है.
कुछ ऐसे ट्रांसफाॅर्मर हैं, जिनके मीटर काम नहीं कर रहे हैं. कुछ ऐसे भी हैं, जिनके जल जाने के बाद ट्रांसफाॅर्मर को तो बदल दिया गया, लेकिन नया मीटर नहीं लगाया गया.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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