बिहार को दें विशेष दर्जा

Updated at : 22 Jun 2014 7:09 AM (IST)
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बिहार को दें विशेष दर्जा

पीएम नरेंद्र मोदी से मिले बिहार के मुख्यमंत्री, कहा प्रधानमंत्री ने दिया मांग पर विचार करने का आश्वासन नयी दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्र से सहयोग की मांग की. उन्होंने प्रधानमंत्री से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग […]

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पीएम नरेंद्र मोदी से मिले बिहार के मुख्यमंत्री, कहा

प्रधानमंत्री ने दिया मांग पर विचार करने का आश्वासन

नयी दिल्ली : बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्र से सहयोग की मांग की. उन्होंने प्रधानमंत्री से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने की मांग की. उन्होंने कहा कि बिहार हर दृष्टि से विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त करने का हकदार है. यदि सीमांध्र को चार घंटे में विशेष राज्य का दर्जा दिया जा सकता है, तो बिहार को क्यों नहीं.

मुख्यमंत्री ने विशेष तौर पर प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह पिछड़ों की भलाई की बात हमेशा करते हैं, तो पिछड़े राज्य बिहार के अति पिछड़े महादलित समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री के आग्रह को स्वीकार करते हुए बिहार की मदद करें, जिससे बिहार तरक्की के रास्ते पर तेजी से बढ़े. क्योंकि जबतक बिहार तरक्की नहीं करेगा, देश की तरक्की संभव नहीं है.

विशेष राज्य का दर्जा ही प्रमुख मुद्दा

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका प्रमुख मुद्दा बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना है. बिहार के लोगों ने इस मांग को प्रमुखता से उठायी थी. करोड़ों लोगों का हस्ताक्षर भी सौंपा गया है. यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री ने क्या कहा है, उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर विचार करने का आश्वासन दिया है. विशेष राज्य का दर्जा दिये जाने के साथ ही मुख्यमंत्री ने गंगा नदी पर सेतु बनाने के लिए केंद्र से सहयोग की मांग की, उन्होंने कहा कि राज्य के दो पुल, महात्मा गांधी और राजेंद्र पुल की स्थिति काफी खराब है जिसके कारण वन वे ट्रैफिक की स्थिति बनी रहती है. इन पुलों के जजर्र होने से कभी हादसा भी हो सकता है. इसलिए इन पुलों के निर्माण में सहयोग के साथ ही छह सौ करोड़ रुपये बकाया राशि की भी मांग की.

कमेटी का हो गठन

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड और बिहार का बंटवारा हो रहा था, तो यह यह समझौता हुआ था कि योजना आयोग के उपाध्यक्ष या सदस्य के नेतृत्व में एक कमेटी बनेगी जो यह पता लगाने का काम करेगी कि झारखंड के अलग होने के बाद बिहार को क्या जरूरत है. झारखंड के अलग होने के बाद बिहार के वित्तीय स्थिति का आकलन करना कमेटी का काम था. लेकिन, कमेटी का गठन नहीं हो सका. उन्होंने इसके लिए कमेटी के गठन की मांग की.

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ में बिजली परियोजना में प्रथम फेज किसी रशियन कंपनी को दे दिया गया था और दूसरे फेज में एनटीपीसी को दिया गया है. एनटीपीसी जहां तेजी से काम कर रही है, वहीं रशियन कंपनी तेजी से काम नहीं कर रही है. उन्होंने पीएम से आग्रह किया है कि उस कंपनी को या तो बदल दिया जाये या फिर उसे काम में तेजी का निर्देश दिया जाये.

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