रवींद्र राय को नीतीश का विरोध करना पड़ा महंगा, सस्पेंड

Updated at : 09 Jun 2014 6:47 AM (IST)
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रवींद्र राय को नीतीश का विरोध करना पड़ा महंगा, सस्पेंड

पटनाः महुआ के जदयू विधायक रवींद्र राय को पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विरोध करना महंगा पड़ गया. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने उन्हें पार्टी विरोधी बयानबाजी और कार्य के लिए रविवार को पार्टी से निलंबित कर दिया. साथ ही पार्टी की छवि धूमिल करनेवाले अन्य विधायकों व नेताओं को भी […]

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पटनाः महुआ के जदयू विधायक रवींद्र राय को पार्टी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का विरोध करना महंगा पड़ गया. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने उन्हें पार्टी विरोधी बयानबाजी और कार्य के लिए रविवार को पार्टी से निलंबित कर दिया. साथ ही पार्टी की छवि धूमिल करनेवाले अन्य विधायकों व नेताओं को भी चेतावनी दी गयी है. यह जानकारी पार्टी महासचिव केसी त्यागी ने दी.

श्री त्यागी ने बताया कि नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव में हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर नैतिक मूल्यों का उदाहरण पेश किया. साथ ही पार्टी द्वारा जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना कर

वंचित समाज के सशक्तीकरण का प्रयास किया गया. ऐसे में कुछ लोग पार्टी की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं. इसे पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने गंभीरता से लिया है. रविवार को वैसे विधायकों से शरद यादव ने मुलाकात भी की और समझाने का प्रयास भी किया, लेकिन वे समझने को तैयार ही नहीं थे. इसलिए उन्होंने विधायक रवींद्र राय को अविलंब निलंबित कर दिया है. यह उन सभी विधायकों व नेताओं के लिए भी चेतावनी भी है, जो पार्टी की छवि को धूमिल करने में लगे हैं.

कैसे शुरू हुआ विरोध : नीतीश कुमार के सीएम पद से इस्तीफे के बाद जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बनाने पर तो सहमति बन गयी, लेकिन उनके साथ पुराने कैबिनेट के मंत्रियों को फिर से कैबिनेट में जगह देने के बाद विरोध शुरू हो गया. एक रणनीति के तहत कई विधायक नीतीश कुमार की तरह मंत्रियों को भी नैतिक जिम्मेदारी के तहत इस्तीफा देने की मांग करने लगे. पार्टी के अंदर से उठे इस तरह के विरोध ने तब और जोर पकड़ लिया जब कैबिनेट का पहला विस्तार किया गया. राजद से इस्तीफा देकर आये तीनों विधायकों को पहले तो विधान पार्षद बनाया गया और फिर उन्हें मंत्री का पद भी दिया गया.

साथ ही पार्टी व नीतीश कुमार का लगातार विरोध करने वाले राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को भी महत्वपूर्ण विभाग सौंप दिया गया. इस विस्तार ने जदयू के कई विधायकों को खुल कर सामने आने का मौका दे दिया. वे पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगे. पार्टी के विधायकों ने इसे जदयू के समर्पित कार्यकर्ताओं का अपमान माना. शुक्रवार को दीघा विधायक पूनम देवी के आवास पर जदयू के नाराज विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, रवींद्र राय व मदन सहनी जुटे और नीतीश कुमार के खिलाफ मोरचा खोल दिया.

इन नेताओं ने नीतीश कुमार पर तानाशाही और ब्लैकमेलिंग करने तक का आरोप लगाया था और राज्यसभा उपचुनाव में मतदान का बहिष्कार करने और निर्दलीय उम्मीदवार उतारने का संकेत दिया था. रवींद्र राय ने तो नीतीश कुमार पर फोन टेपिंग तक का आरोप लगाया.

वहीं, मंत्रिमंडल में वैश्य समाज का एक भी मंत्री नहीं बनाने पर बिहार विधानसभा की याचिका समिति के सभापति पद से विधायक श्याम बिहारी प्रसाद ने भी इस्तीफा दे दिया.

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