मांझी डमी मुख्यमंत्री नीतीश का ही शासन

Updated at : 07 Jun 2014 8:07 AM (IST)
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मांझी डमी मुख्यमंत्री नीतीश का ही शासन

पटना: जदयू विधायक विधायक पूनम देवी ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी डमी सीएम हैं. शासन तो पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही चला रहे हैं. नीतीश के हाल के फैसलों से कार्यकर्ता डिमोरलाइज फील कर रहे हैं. मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अपनी सुविधाओं के लिए कैबिनेट से एजेंडा पास करवा […]

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पटना: जदयू विधायक विधायक पूनम देवी ने शुक्रवार को कहा कि मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी डमी सीएम हैं. शासन तो पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही चला रहे हैं. नीतीश के हाल के फैसलों से कार्यकर्ता डिमोरलाइज फील कर रहे हैं.

मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद अपनी सुविधाओं के लिए कैबिनेट से एजेंडा पास करवा लिया, लेकिन जब यह मैसेज जनता तक गया, तो उन्होंने इसे ठुकरा दिया. जनता बेवकूफ नहीं है. वह सब समझ रही है. अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हमारे पास 50 ऐसे विधायक हैं, जो पार्टी की कार्यशैली से नाराज हैं. समय आने पर कुछ भी निर्णय लिया जा सकता है और इनके नामों की भी घोषणा की जा सकती है. उनके साथ पार्टी के विधायक ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू, रवींद्र राय, मदन साहनी व राजू कुमार सिंह भी मौजूद थे.

मांझी को बनाया बलि का बकरा : भाजपा में शामिल होने के सवाल पर पूनम देवी ने कहा, जदयू में हैं और जदयू में ही रहेंगी. जीतन राम मांझी को मुख्यमंत्री बना कर बलि का बकरा बनाया गया है. अगले डेढ़ साल तक वह मुख्यमंत्री बने रहेंगे और उसके बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जायेगा. उन्होंने कहा कि राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने पहले पार्टी में रह कर विरोध किया. बाद में उन्हें बुला कर टिकट दिया गया. जब वे हार गये तो विधान परिषद का सदस्य बना कर मंत्री पद दे दिया गया. इन मुद्दों पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव से बातचीत की जायेगी और जैसा वे निर्देश देंगे, वैसा किया जायेगा.

करायी जा रही फोन टैपिंग : जदयू विधायक रवींद्र राय ने बिहार सरकार पर अपने ही विधायकों की फोन टैपिंग करवाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सीएम आवास और डीजीपी आवास पर सर्विलांस मशीन लगायी गयी है और विधायकों के फोन टेप किये जा रहे हैं. इससे विधायकों की प्राइवेसी खत्म हो रही है. करीब 50 विधायक सामूहिक रूप से केंद्रीय गृह मंत्री को सीबीआइ जांच करवाने की अपील करने जा रहे हैं. राय ने नीतीश कुमार पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि वे तानाशाह हैं. जब भाजपा से गंठबंधन तोड़ा, तो किसी भी विधायक से उन्होंने नहीं पूछा. वे त्यागी व तपस्वी बनते हैं, लेकिन एक खास मकान के लिए उन्होंने इंतजार किया और दूसरे से खाली करवाया.

आरसीपी के रहने से पार्टी का डूबना तय : विधायक मदन सहनी ने जदयू सांसद आरसीपी सिंह पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जब तक उनके जैसे नेता रहेंगे पार्टी की स्थिति और खराब होगी. वे विधायकों व कार्यकर्ताओं से बात तक नहीं करते हैं. उन्हें दरकिनार कर ही पार्टी को आगे बढ़ाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि आरपीसी सिंह एक टीम नहीं गिरोह के रूप में काम कर रहे हैं, जिसमें संजय गांधी, ललन सर्राफ जैसे लोग सदस्य हैं. हमारी मंशा इसी गिरोह को खत्म करने की है, न कि सरकार गिराने की. समय रहते अगर नीतीश कुमार नहीं चेते, तो बाद में उन्हें पछताना पड़ेगा. मदन सहनी ने अतिपिछड़ों को हिस्सेदारी नहीं मिलने पर भी नाराजगी जतायी. उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में गिनी-चुनी वैसी सीटें दीं, जहां से जीत पाना संभव नहीं था. पार्टी ने सिर्फ वोट लेने का काम किया और पंचायत के अंदर ही समेट कर रख दिया. विधायक मदन सहनी ने भाजपा में जाने के सवाल पर कहा कि लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की लहर थी, इससे इनकार नहीं किया जा सकता. अगर वे देश में बढ़िया काम करेंगे, तो बिहार में भाजपा जनाधार बढ़ेगा.

नयी पार्टी भी बना सकते हैं : जदयू विधायक राजू कुमार सिंह ने नयी पार्टी के बनाने के भी संकेत दिये. उन्होंने कहा कि गलत लोगों को पार्टी में लाकर मंत्री बनाया गया है. इससे पार्टी के विधायक व कार्यकर्ता क्षुब्ध हैं. हमारे साथ 50 से ज्यादा विधायक हैं. अगर जरूरत पड़ी, तो विकल्प तलाशने के बजाय हम नयी पार्टी भी बना सकते हैं. पार्टी में फिलहाल विधायक विरोधी गतिविधियां ही चल रही हैं. इस भावना से वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को अवगत करायेंगे. पुराने लोगों के साथ मिल कर नीतीश कुमार संगठन को मजूबत करें व मंत्रिमंडल में नये लोगों को मौका दे.

श्याम बिहारी का याचिका समिति से इस्तीफा
विधानसभा की याचिका समिति के सभापति पद से श्याम बिहारी प्रसाद ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि मंत्रिमंडल के विस्तार में वैश्यों की घोर उपेक्षा से आहत होकर इस्तीफा दिया है. पहले की सरकारों में वैश्यों को इस तरह उपेक्षित नहीं किया गया था.

मैं मंत्री पद का दावेदार नहीं : नीरज
जदयू के विधान पार्षद नीरज कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके नये आवास पर जाकर मुलाकात की. उन्होंने अपनी और कार्यकर्ताओं की भावना से अवगत कराया. नीरज ने कहा कि वह न तो मंत्री पद के दावेदार हैं और न ही नीतीश कुमार का विरोध कर रहे हैं. उन्होंने सिर्फ पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये और उसकी जानकारी दी. नीतीश कुमार ने उन्हें आश्वासन दिया कि पार्टी के हर मतभेद को दूर कर लिया जायेगा. वह नये घर में आ गये हैं और अब कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करेंगे. पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं से हर रोज मिलेंगे और उनकी समस्याओं से अवगत होंगे. इसके लिए पार्टी की ओर से कार्यक्रम तैयार किये जा रहे हैं. बुधवार को पटना पहुंचने के बाद नीरज कुमार ने कहा था कि जिन कार्यकर्ताओं ने अपनी तपस्या से जंगल राज को खत्म किया था, उनकी जगह दूसरे दलों से आये नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल करने से कार्यकर्ताओं को ठेस पहुंची है. राजद छोड़ कर आये सभी नेताओं को मंत्री बनाया गया, जबकि भाजपा से आये नेताओं को मंत्री पद नहीं दिया गया. उन्होंने राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर भी सवाल उठाये थे.

राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए विरोध
जदयू तकनीकी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष सह पटना जिला प्रभारी अशोक कुमार ने कहा कि जदयू के कुछ नेता राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए पार्टी में विरोध कर रहे हैं. उन लोगों की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखें, तो उनमें राजनीतिक पहचान नहीं दिखायी पड़ती. ये लोग आज जो कुछ हैं, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की वजह से ही हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने पार्टी के पदों से इस्तीफा दिया, लेकिन अगर उन्हें पार्टी या उसकी नीति से परहेज है, तो क्यों नहीं विधानमंडल की सदस्यता से इस्तीफा दे देते हैं. नैतिकता के आधार पर नीतीश कुमार ने जब मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तो ये लोग उनका गुणगान करने में लगे थे, लेकिन आज व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए पूरे बिहार के विकास को रोकना चाहते हैं. ललन सिंह में अब लोगों को दोष नजर आता है. ये लोग उस समय कहां थे, जब वे वापस पार्टी में आये थे. ऐसे नेताओं को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए.

वशिष्ठ को संविधान का ज्ञान नहीं : ज्ञानू
जदयू की राज्य कार्यकारिणी भंग हुई है, लेकिन अनुशासन समिति बरकरार है. यह अपना काम करेगी. ये कहना है जदयू विधायक सह जदयू अनुशासन समिति के अध्यक्ष ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू का. उन्होंने जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह द्वारा एक दिन पहले लगाये गये आरोपों पर पलटवार किया. उन्होंने कहा, वशिष्ठ नारायण सिंह को पार्टी के संविधान की कोई जानकारी नहीं है. एक बार अनुशासन समिति बन जाती है, तो उसे भंग नहीं किया जाता. अनुशासन समिति के संज्ञान में कोई बात आती है, तो वह अपने स्तर पर जांच कर सकती है. साथ ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश अध्यक्ष को लिख कर रिपोर्ट दे सकती है. एक बार एक विधान पार्षद पर ऐसे ही कार्रवाई की गयी थी. अनुशासन समिति को चार सांसदों व एक विधान पार्षद के बारे में जानकारी मिली थी. समिति ने जदयू कार्यकारिणी से पहले इसकी जांच की और विधान पार्षद पर आरोप सिद्ध होने पर उनकी सदस्यता रद्द की गयी थी. ज्ञानू ने कहा कि भाजपा में जाने पर कोई फैसला नहीं किया गया है. वे फिलहाल जदयू में हैं. जहां तक राज्यसभा चुनाव का सवाल है, इस पर नाराज विधायक एक साथ बैठक कर जल्द ही विचार करेंगे कि वोटिंग करनी है या बहिष्कार.

अनुशासनहीनता पर होगी कार्रवाई : जदयू
जदयू ने विधायकों द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना को गंभीरता से लिया है. प्रदेश प्रवक्ता डॉ अजय आलोक ने कहा कि विधायक ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ‘ज्ञानू’, पूनम देवी, राजू कुमार सिंह, डॉ रवींद्र राय व मदन सहनी द्वारा नीतीश कुमार के खिलाफ की गयी टिप्पणी अनुशासनहीनता के दायरे में है. ऐसा बयान निराशा की मानसिकता को बताता है.

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