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पाली-तानाखार से लगातार दो बार विधायक रहे रामदयाल उइके कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए, तो तीसरे नंबर पर खिसके

पाली-तानाखार (एसटी) विधानसभा सीट पर एक बार फिर बीजेपी ने रामदयाल उइके पर दांव लगाया है. हालांकि, कांग्रेस पार्टी छोड़कर भगवा झंडा थामने वाले उइके पिछली बार तीसरे नंबर पर रहे थे. इस बार कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है. उसने दुलेश्वरी सीदर को मैदान में उतारा है.

अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित पाली-तानाखार सीट पर कांग्रेस वर्ष 2008 से कभी नहीं हारी. पहले दो चुनावों यानी वर्ष 2008 और वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में रामदयाल उइके ने कांग्रेस के लिए यह सीट जीती. वर्ष 2018 में मोहित राम ने कांग्रेस के टिकट पर विजय पताका लहराया. इस चुनाव में 2,12,279 मतदाता वोटिंग के अधिकारी थे, लेकिन 1,73,560 वोटर्स ने ही अपने मताधिकार का प्रयोग किया. यहां 81.76 फीसदी वोटिंग हुई. इसमें से 38.59 फीसदी वोट पाकर मोहित राम क्षेत्र के विधायक बने. दूसरे नंबर पर जीजीपी के हीरासिंह मरकाम रहे, जिन्हें 33.02 फीसदी वोट मिले. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में यहां दूसरे चरण में 17 नवंबर को मतदान होगा. इस बार बीजेपी ने एक बार फिर रामदयाल उइके को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने दुलेश्वरी सीदर को उनके मुकाबले मैदान में उतारा है. पाली-तानाखार (एसटी) विधानसभा क्षेत्र पर इस बार 2,28,061 मतदाता पंजीकृत हैं. इनमें से 1,13,307 पुरुष वोटर हैं, जबकि 1,14,746 महिला मतदाता हैं. आठ वोटर थर्ड जेंडर यानी तृतीय लिंग के हैं. 18 से 19 वर्ष की आयु के 7,217 वोटर इस बार जुड़े हैं, जो पहली बार मतदान करेंगे. विधानसभा क्षेत्र में 80 साल से अधिक आयु के 2,584 वोटर हैं, जबकि दिव्यांग मतदाताओं की संख्या 2,029 है. इस विधानसभा क्षेत्र में पुरुष वोटर से ज्यादा महिला वोटर हैं. वोटर रेशियो 1013 है.

तीसरे नंबर पर पहुंच गए थे रामदयाल उइके

बता दें कि वर्ष 2018 में जब चुनाव हुए, तो रामदयाल उइके कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. बीजेपी ने उन्हें टिकट दिया और वह कांग्रेस उम्मीदवार मोहित राम से चुनाव में पराजित हो गए. कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने वाले रामदयाल उइके इस बार तीसरे नंबर पर रहे. उन्हें 18.53 फीसदी वोट मिले. क्षेत्र के 2.95 फीसदी मतदाताओं ने नोटा दबाया. वोट की बात करें, तो मोहित राम को 66,971 वोट, हीरासिंह मरकाम को 57,315 और रामदयाल उइके को 32,155 वोट मिले. 5,128 लोगों ने नोटा दबाया. किसान कांग्रेस के जिलाध्यक्ष मोहित राम पहली बार चुनाव जीते. उन्होंने लगातार दो बार विधायक रहे रामदयाल उइके को पराजित किया, जिन्होंने टिकट नहीं मिलने पर पाला बदल लिया था.

मोहित राम ने जीती थी यह सीट

पाली-तानाखार (एसटी) सीट के विधायक मोहित राम आठवीं पास हैं. पेशे से कृषक और व्यवसायी हैं. 7 जून 1965 को कोरबा जिला के पोलमी गांव में जन्मे मोहित राम के पिता का नाम बुधराम है. 28 मई 2002 को उनका विवाह प्रफुल्ला से हुआ. उनकी चार संतानें हैं, जिसमें तीन बेटे और एक बेटी है. वर्ष 2018 में वह पहली बार विधानसभा का चुनाव जीते. इस बार कांग्रेस पार्टी ने उनका टिकट काट दिया है. उनकी जगह दुलेश्वरी सीदर को टिकट दिया गया है.

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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के परिणाम

बता दें कि वर्ष 2018 में कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी पर बड़ी जीत दर्ज की थी. छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे ज्यादा सीटें जीतकर कांग्रेस ने सरकार बनाई थी. कांग्रेस पार्टी ने 68 सीटें जीतीं थीं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को सिर्फ 15 सीटों पर जीत मिल पाई थी. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के हिस्से में दो और जेसीसी (जे) ने पांच सीट पर जीत दर्ज की थी. बाद में राज्य में हुए कई उपचुनावों में कांग्रेस ने जीत दर्ज की और उसके विधायकों की संख्या बढ़कर 71 हो गई, जबकि बीजेपी के विधायकों की संख्या घटकर 13 रह गई.

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Mithilesh Jha
Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है। उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवरेज करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है। मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है

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