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विश्व चैंपियनशिप नहीं जीत सके विश्वनाथन आनंद, फिर भी शतरंज के लिए अच्छा रहा वर्ष

Updated at : 26 Dec 2014 1:48 PM (IST)
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विश्व चैंपियनशिप नहीं जीत सके विश्वनाथन आनंद, फिर भी शतरंज के लिए अच्छा रहा वर्ष

नयी दिल्ली : भारतीय शतरंज के लिए वर्ष 2014 उतार चढ़ाव वाला रहा तथा जहां पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन सोचि विश्व चैंपियनशिप में अपना खिताब फिर से हासिल करने में नाकाम रहे वहीं भारतीय पुरुष टीम ने 41वें ओलंपियाड में ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया. चेन्नई में 2013 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब […]

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नयी दिल्ली : भारतीय शतरंज के लिए वर्ष 2014 उतार चढ़ाव वाला रहा तथा जहां पांच बार के विश्व चैंपियन विश्वनाथन सोचि विश्व चैंपियनशिप में अपना खिताब फिर से हासिल करने में नाकाम रहे वहीं भारतीय पुरुष टीम ने 41वें ओलंपियाड में ऐतिहासिक कांस्य पदक हासिल किया.

चेन्नई में 2013 में विश्व चैंपियनशिप का खिताब गंवाने के बाद आनंद ने मार्च में कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतकर नार्वे के मैगनस कार्लसन को चुनौती देने का अधिकार पाया था.
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में दुनिया के चोटी के आठ खिलाड़ी भाग लेते हैं और उसमें जीत से लगने लगा था कि वह फिर से विश्व चैंपियनशिप का खिताब हासिल कर सकते हैं. इस 45 वर्षीय खिलाड़ी ने नार्वे के कार्लसन को कड़ी चुनौती दी लेकिन आखिर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
वह 11वीं बाजी थी जिससे आनंद की उम्मीदें टूटी. कार्लसन ने यह बाजी 45वीं चाल में जीतकर 6.5-4.5 से जीत दर्ज की. भारतीय खिलाड़ी इस बीच केवल तीसरी बाजी में जीत दर्ज कर पाया जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी ने दूसरी, छठी और 11वीं बाजी में जीत हासिल की थी.
सोचि विश्व चैंपियनशिप को छोड़ दिया जाये, तो बाकी साल आनंद के लिए अच्छा रहा. उन्होंने सितंबर में बिलबाओ फाइनल मास्टर्स का खिताब जीता और फिर लंदन शतरंज क्लासिक में जीत दर्ज करे सत्र का शानदार अंत किया. इसके अलावा उन्होंने विश्व रैपिड शतरंज में कांस्य पदक जीता जबकि विश्व बिल्ट्ज चैंपियनशिप में वह पांचवें स्थान पर रहे.
आनंद के अलावा भारत की युवा ब्रिगेड ने भी देश के शतरंज प्रेमियों को खुश किया. एस पी सेतुरमन, परिमार्जन नेगी और कृष्णन शशिकिरण की पुरुष टीम ने ट्रोम्सो में 41वें शतरंज ओलंपियाड में कांस्य पदक जीता जो इस प्रतियोगिता में भारत का अब तक का पहला पदक है.
टीम चैंपियनशिप में अहम भूमिका निभाने वाले शशिकिरण ने व्यक्तिगत रजत पदक भी जीता जबकि पदमिनी राउत ने महिला वर्ग में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक हासिल किया.
मुरली कार्तिकेयन, अरविंद चिदंबरम, कुमारन बालाजी और दिपतायन घोष की अंडर . 16 भारतीय टीम ने भी हंगरी के ग्योर में आयोजित विश्व युवा शतरज ओलंपियाड में स्वर्ण पदक जीता. वे रुस और ईरान से आगे रहे.
ग्रैंडमास्टर बी अधिबान ने शारजाह में एशियाई महाद्वीपीय शतरंज चैंपियनशिप में रजत पदक जीता और अगले साल अजरबेजान के बाकू में होने वाले विश्व कप में भी अपनी जगह सुरक्षित की.
एक अन्य ग्रैंडमास्टर अभिजीत गुप्ता ने मई में ताशकंद में अगाजामोव मेमोरियल अंतरराष्ट्रीय ओपन का खिताब हासिल किया. युवा ग्रैंडमास्टर सहज ग्रोवर ने भी अच्छा प्रदर्शन किया और सितंबर में डरबन अंतरराष्ट्रीय ओपन शतरंज टूर्नामेंट में पहला स्थान हासिल किया.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे प्रदर्शन के दम पर भारत विश्व शतरंज महासंघ (फिडे ) की नवंबर में जारी रैंकिंग में ओपन और महिला दोनों वर्गों में पांचवें स्थान पर रहा.
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