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वर्ष 2014 सानिया मिर्जा के लिहाज से रहा शानदार, बाकी जूझते रहे

Updated at : 17 Dec 2014 4:09 PM (IST)
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वर्ष 2014 सानिया मिर्जा के लिहाज से रहा शानदार, बाकी जूझते रहे

नयी दिल्ली : भारत की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के लिए यह वर्ष काफी अच्‍छा रहा. उन्‍होंने इस साल अपना तीसरा मिश्रित युगल ग्रैंडस्लैम खिताब जीता और वर्ष की आखिरी ट्रॉफी जीतकर अपने सत्र का शानदार अंत किया. वहीं अन्‍य भारतीय खिलाडियों की बात करें तो वर्ष 2014 में अधिकतर समय जूझते हुए […]

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नयी दिल्ली : भारत की नंबर एक टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा के लिए यह वर्ष काफी अच्‍छा रहा. उन्‍होंने इस साल अपना तीसरा मिश्रित युगल ग्रैंडस्लैम खिताब जीता और वर्ष की आखिरी ट्रॉफी जीतकर अपने सत्र का शानदार अंत किया. वहीं अन्‍य भारतीय खिलाडियों की बात करें तो वर्ष 2014 में अधिकतर समय जूझते हुए नजर आए.

अपने नाम कई उपलब्धियां लिखा चुकी 28 वर्षीय सानिया सत्र के आखिरी टूर्नामेंट को जीतने वाली पहली भारतीय बनी. यह उपलब्धि लिएंडर पेस जैसा दिग्गज खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाया. सानिया ने ब्रूनो सोरेस के साथ मिलकर यूएस ओपन मिश्रित युगल का खिताब जीता और अब उनके नाम पर ऑस्ट्रेलियाई ओपन और फ्रेंच ओपन सहित कुल तीन ग्रैंडस्लैम खिताब हो गये हैं.

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वर्ष में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने से सानिया सात डब्ल्यूटीए टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची और उन्होंने जिम्बाब्वे की कारा ब्लैक के साथ तीन खिताब भी जीते. इससे उन्होंने अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग एक भी हासिल की. सानिया को नवनिर्मित तेलंगाना का एंबेसडर नियुक्त किये जाने पर कुछ राजनीतिज्ञों ने सवाल उठाये थे. यह हैदराबादी टीवी पर चर्चा के दौरान रो पड़ी थी. बाद में उन्होंने यूएस ओपन का खिताब तेलंगाना के लोगों को समर्पित किया.
जब कई पुरुष खिलाड़ी इंचियोन एशियाई खेलों से हट गये तब सानिया ने पहले न कहने के बाद इन खेलों में हिस्सा लिया और साकेत मयनेनी के साथ मिलकर मिश्रित युगल में स्वर्ण पदक जीता. पुरुष खिलाडियों में एकल के स्टार सोमदेव देववर्मन नहीं बल्कि युगल विशेषज्ञ पेस और रोहन बोपन्ना के लिये भी यह साल काफी मुश्किल भरा रहा. पेस सत्र में केवल एक खिताब जीत पाये. वह सत्र की शुरुआत में शीर्ष दस में शामिल थे लेकिन अब 29वें नंबर पर हैं. बोपन्ना उनसे एक स्थान पीछे है.
बोपन्ना ने पाकिस्तान के ऐसाम उल हक कुरैशी के साथ इस साल फिर से जोडी बनायी. इन दोनों ने साल में एक खिताब जीता जबकि दो में वे उप विजेता रहे. सबसे अधिक निराशा हालांकि सोमदेव के हाथ लगी और वह किसी भी समय अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के करीब नहीं पहुंचे. उनके लिये दूसरे दौर से आगे बढ़ना चुनौती बन गयी. वह कुल 15 टूर्नामेंटों में पहले दौर से आगे नहीं बढ़ पाये और यूएस ओपन के तो मुख्य ड्रा में भी जगह नहीं बना सके.
महेश भूपति ने टेनिस से संन्यास लिया. उनकी और पूर्व स्टार विजय अमृतराज की टेनिस लीगों ने इस खेल में नया अध्याय जोडा. भूपति टेनिस के दिग्गजों जिनमें रोजर फेडरर और नोवाक जोकोविच भी शामिल हैं, को आईपीटीएल में खेलने के लिये भारत लाये. अमृतराज की सीटीएल भारत केंद्रित रही लेकिन इसमें दिग्गज स्टार की कमी खली.
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