दिल्ली हॉफ मैराथन : गेमेचू ने कोर्स रिकार्ड तोड़ा, बेलीहू ने पुरुषों की रेस जीती

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Oct 2018 3:20 PM

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नयी दिल्ली : इथियोपिया की सेहाये गेमेचू ने रविवार को यहां एयरटेल दिल्ली हॉफ मैराथन में पदार्पण के दौरान कोर्स रिकार्ड तोड़ते हुए महिला स्पर्धा में जीत हासिल की जबकि हमवतन एंडामलाक बेलीहू ने पुरुष वर्ग में कड़ी चुनौती से उबरकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया. दोनों इथियोपियाई विजेताओं के लिये यहां जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम यह […]

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नयी दिल्ली : इथियोपिया की सेहाये गेमेचू ने रविवार को यहां एयरटेल दिल्ली हॉफ मैराथन में पदार्पण के दौरान कोर्स रिकार्ड तोड़ते हुए महिला स्पर्धा में जीत हासिल की जबकि हमवतन एंडामलाक बेलीहू ने पुरुष वर्ग में कड़ी चुनौती से उबरकर शीर्ष स्थान प्राप्त किया.

दोनों इथियोपियाई विजेताओं के लिये यहां जवाहरलाल नेहरु स्टेडियम यह पहली जीत है जिसमें 34,000 प्रतिभागियों ने रेस में शिरकत की. बीस वर्षीय गेमेचू अपनी पहली हाफ मैराथन में भाग ले रही थीं, उन्होंने एक घंटे छह मिनट 50 सेकेंड के समय में रेस पूरी की, जिससे उन्होंने महिला वर्ग के पिछले कोर्स रिकार्ड 1:06:54 से चार सेकेंड बेहतर प्रदर्शन किया जो 2009 के बाद से कीनिया की मैरी केटानी के नाम था.

गेमेचू ने जीत के बाद खुशी व्यक्त करते हुए कहा, मैं जीत की उम्मीद नहीं कर रही थी. यह मेरे लिये ट्रॉयल था क्योंकि मैं पहली बार हाफ मैराथन में भाग ले रही हूं. मैं खुश हूं कि मैंने इतने मशहूर खिलाड़ियों के खिलाफ रेस में जीत दर्ज की.

मौजूदा महिला हॉफ मैराथन विश्व रिकार्डधारी जॉयक्लिने जेपकोसगेई ने 1:06:56 के समय से रजत पदक जबकि इथियोपिया की जेनेबा यिमेर ने एक घंटे छह मिनट 59 सेकेंड से अंतिम पोडियम स्थान हासिल किया. जॉयक्लिने ने कहा, मैं दूसरे स्थान से खुश हूं क्योंकि मुझे भरोसा नहीं था कि मैं पोडियम स्थान हासिल कर पाऊंगी.

मैंने इस रेस के लिये इतनी अच्छी तैयारी भी नहीं की थी. हाल में मैंने अपने कार्यक्रम में बदलाव किया है जो अब मैराथन को ध्यान में रखकर बनाया गया है. गेमेचू और बेलीहू दोनों को 27,000 डालर की समान इनामी राशि मिलेगी. लेकिन गेमेचू को चेक के अलावा नया कोर्स रिकार्ड बनाने के लिये 10,000 डालर और मिलेंगे.

दुनिया की लंबी दूरी की महान धाविका तिरूनेश दिबाबा के लिये यह रेस अच्छी नहीं रही क्योंकि थकान के कारण वह शुरू से ही पीछे रहीं. दिबाबा ने 5000 मीटर और 10,000 मीटर में पांच विश्व चैम्पियनशिप स्वर्ण पदक जीते हुए हैं लेकिन यहां थकान उन पर हावी रही. वहीं पुरुषों में बेलीहू ने पिछले साल के प्रदर्शन में सुधार करते हुए अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी बेहतर किया.

वह पिछले साल दूसरे स्थान पर रहे थे और इस बार उन्होंने 59 मिनट 18 सेकेंड में पहला स्थान हासिल किया. हालांकि वह कोर्स रिकार्ड नहीं तोड़ सके जो 2014 से अब तक इथियोपिया के गुये एडोला के नाम है. वालेलेगन ने 59 मिनट 22 सेकेंड के समय से रजत पदक हासिल किया. कीनिया के डेनियल किपचुम्बा 59 मिनट 48 सेकेंड से तीसरे स्थान पर रहे.

ये तीनों ही एथलीट शुरू से रेस में बढ़त बनाये थे लेकिन इथियोपियाई जोड़ी जल्द ही सबसे आगे निकल गयी. दोनों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा लेकिन फिनिश लाइन पर 19 वर्षीय बेलीहू ने बाजी मारी. बेलीहू ने कहा, ‘‘मैंने कोर्स रिकार्ड तोड़ने का प्रयास किया लेकिन यह मुश्किल रहा. मैं पिछली बार दूसरे स्थान पर रहा था इलसिये इस बार मैं अच्छी तैयारी के साथ आया था.

इथियोपियाई एथलीट ने शीर्ष चार स्था जबकि कीनियाई एथलीट ने बचे हुए दो स्थान हासिल किये. भारतीयों में 22 वर्षीय महाराष्ट्र के अभिषेक पाल ने पुरुषों की रेस में जीत हासिल की, उन्होंने एक घंटे चार मिनट 14 सेकेंड से पहला स्थान प्राप्त किया. अविनाश साबले (1:04:14) ने रजत जीता और एशियाई मैराथन चैम्पियन गोपी टी (1:04:15) को कांसा मिला.

गत चैम्पियन नितेंद्र सिंह ने पिछली बार कोर्स रिकार्ड बनाया था, इस बार वह भारतीयों में 12वें स्थान पर रहे. उन्होंने एक घंटा छह मिनट 37 सेकेंड का समय निकाला. युवा संजीवनी जाधव महिला वर्ग में सर्वश्रेष्ठ भारतीय रहीं, जिन्होंने एक घंटे 13 मिनट 58 सेकेंड से पहला स्थान प्राप्त किया. पारुल चौधरी दूसरे और मोनिका अठारे तीसरे स्थान पर रहीं. संजीवनी ने कहा, मैं दो साल पहले यहां दूसरे स्थान पर रही थी, मैं खुश हूं कि मैंने अपने प्रदर्शन को बेहतर किया और इस बार स्वर्ण पदक जीता.

पारुल पिछले चरण में तीसरे स्थान पर रहीं थी लेकिन इस बार उन्होंने एक घंटे 14 मिनट एक सेकेंड से दूसरा स्थान हासिल किया. उन्होंने कहा, मैं थोड़ी निराश हूं क्योंकि मैं अपनी तैयारियों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी. मैं पिछली बार के समय से बेहतर करना चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं कर सकी.

वर्ष 2016 के चरण में शीर्ष स्थान हासिल करने वाली मोनिका अठारे इस साल वैसा प्रदर्शन नहीं कर सकी और उन्हें एक घंटे 16 मिनट 55 सेकेंड के समय से कांसे से संतोष करना पड़ा.

भारत के पुरूष और महिला विजेताओं को चार-चार लाख रुपये जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाले खिलाड़ियों को तीन-तीन लाख रुपये मिलते हैं. कांस्य पदक जीतने वालों को दो-दो लाख रुपये दिये जाते हैं.

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