100 टेस्ट मैच खेलने वाला क्रिकेटर, जिसे हार ने इतना तोड़ा कि ट्रेन से कटकर दे दी जान

Graham Thorpe Posing for the Camera. Image: X
Graham Thorpe: ग्राहम थोर्प मैदान पर जितना चमके, जीवन की जटिलताओं के आगे उतना ही खामोश रह गए. 100 टेस्ट खेलने वाले इस महान बल्लेबाज ने मानसिक संघर्षों से जूझते हुए 55 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. उनकी कहानी एक खिलाड़ी की नहीं, एक टूटते इंसान की भी है, जो दूसरों को हौसला देता रहा लेकिन खुद अकेले लड़ता रहा.
Graham Thorpe: क्रिकेट की दुनिया में कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो मैदान पर जितना चमकते हैं, मैदान के बाहर उतने ही खामोश रह जाते हैं. इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज ग्राहैम थोर्प भी उन्हीं में से एक थे. एक ऐसा इंसान, जिसने 22 यार्ड की पिच पर दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों का डटकर सामना किया, लेकिन जीवन की जटिलताओं के आगे खुद को संभाल नहीं पाया. मानसिक शांति और हालातों का सामना करना शायद बहुत मुश्किल होता है, लेकिन उन्हें खुद के अंदर दबाए रखना शायद और भी ज्यादा मुश्किल. 55 साल की उम्र में थोर्प ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन यह सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, एक इंसान की हार थी, जो मुस्कुराता रहा, सिखाता रहा, सबको हौसला देता रहा, लेकिन अपने भीतर टूटता गया.
कभी क्रिकेट के मैदान पर बाएं हाथ का यह खूबसूरत बल्लेबाज गेंदबाजों के लिए पहेली बन जाता था. 1 जुलाई 1993 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नॉटिंघम में डेब्यू करने वाले थोर्प ने पहले ही मैच की दूसरी पारी में शतक जड़ा. उन्होंने इंग्लैंड के लिए 100 टेस्ट मैच में 16 शतक, 82 वनडे मैचो में 2380 रन और अनगिनत यादें बनाईं. 3 जून 2005 को उन्होंंने अपना आखिरी मैच बांग्लादेश के खिलाफ टेस्ट मैच के रूप में खेला और उसमें भी 66 रन बनाए. यही थोर्प को एक खिलाड़ी के रूप में परिभाषित करता है. उन्होंने खिलाड़ी के तौर पर क्रिकेट के लिए 12 साल लगाए, लेकिन इंसान के तौर पर? शायद दुनिया ने उन्हें उतना नहीं समझा.

इंग्लैंड का कोच और वो हार
बाएं हाथ के इस स्टाइलिश बल्लेबाज ने बाद में कोच के रूप में भी अहम योगदान दिया, खासकर इंग्लैंड की 2019 वर्ल्ड कप विजेता टीम के कोचिंग स्टाफ का हिस्सा बनकर. लेकिन मैदान से बाहर की जिंदगी थोर्प के लिए बेहद कठिन साबित हुई. 2021-22 की एशेज सीरीज में इंग्लैंड की हार के बाद उन्हें टीम के सहायक कोच पद से हटा दिया गया. इससे उन्हें बड़ा झटका लगा. इसके बाद उन्हें अफगानिस्तान टीम का हेड कोच बनने की घोषणा हुई, मगर इससे पहले ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और मई 2022 में उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी, जिसके बाद वे लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहे.

आखिरकार ट्रेन से कटकर दे दी जान
जब उनकी बीमारी की खबर 2022 में सामने आई, तो बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि वो किस दर्द से गुजर रहे हैं. लेकिन वे शायद अंदर से इतना टूट चुके थे कि उन्होंने दोबारा आत्महत्या जैसा कदम फिर उठाया. 4 अगस्त की सुबह 8:26 बजे ब्रिटिश ट्रांसपोर्ट पुलिस को एशर स्टेशन पर रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति के घायल होने की सूचना मिली थी. यह कोई और नहीं बल्कि ग्राहम थोर्प ही थे. मेडिकल टीम मौके पर पहुंची लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. पुलिस ने यह स्पष्ट किया है कि मामला संदिग्ध नहीं है और रिपोर्ट कोरोनर को सौंपी जाएगी. 55 वर्षीय थोर्प की मौत सरे के एशर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से टकराने से हुई. सरे कोरोनर कोर्ट में हुई सुनवाई में इस दुखद घटना की पुष्टि हुई. उनके परिवार ने यह जानकारी दी कि वे डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझ रहे थे और उन्होंने अपनी जान खुद ली.
Ponting called Graham Thorpe as the best-ever” batting technician from England.
— Cricketopia (@CricketopiaCom) August 6, 2024
Gone Too Soon. pic.twitter.com/oVQPYQcakC
परिवार ने बताया ड्रिपेशन से जूझ रहे थे थोर्प
कोरोनर साइमन विकेन्स ने अदालत में बताया कि थोर्प को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं. उन्होंने थोर्प के परिवार और उनके जीवन को छूने वाले सभी लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की. ग्राहम थोर्प की मौत ने क्रिकेट जगत को झकझोर कर रख दिया. बाद में, उनकी पत्नी अमांडा और बेटी किटी ने जब इस बात की पुष्टि की कि थोर्प ने डिप्रेशन और एंग्जायटी से जूझते हुए अपनी जान ले ली, तो क्रिकेट की दुनिया एक पल को स्तब्ध रह गई. उनकी बेटी किटी ने कहा, “वो हमसे बहुत प्यार करते थे, लेकिन उन्हें अब रास्ता नहीं दिख रहा था. वो शख्स जो कभी जिंदगी से भरपूर था, अब खुद के भीतर ही खो गया था.” यह शब्द हर उस परिवार की सच्चाई बयां करते हैं जो किसी प्रियजन को मानसिक बीमारी में खो देता है.

दुनिया छोड़ी, लेकिन दे गए जरूरी सबक
ग्राहम थोर्प इस दुनिया से तो चले गए, लेकिन हमें एक जरूरी सबक देकर गए कि जीत-हार सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं होती. जिंदगी के मैदान में भी संघर्ष होते हैं और हर मुस्कान के पीछे एक कहानी होती है. उनकी कहानी बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना जरूरी है, शर्म नहीं. शायद अब समय है कि खिलाड़ियों को सिर्फ उनके रनों, विकेटों और ट्रॉफियों से नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी समझा जाए ताकि अगली बार कोई थोर्प अकेलेपन की गिरफ्त में न फंसे. थोर्प चले गए, लेकिन उनके बल्ले की खामोश गूंज और जिंदगी से उनकी लड़ाई हमें हमेशा याद रहेगी.

याद में आयोजित किया जाएगा कार्यक्रम
भारत और इंग्लैंड के बीच चल रही एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के अंतिम टेस्ट के दूसरे दिन, 1 अगस्त 2025 को लंदन के किया ओवल क्रिकेट ग्राउंड में ‘ए डे फॉर थोर्पी’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. पूर्व इंग्लिश बल्लेबाज ग्राहम थोर्प के 56वें जन्मदिन पर उनकी याद में इस कार्यक्रम को समर्पित किया जाएगा. यह आयोजन सरे काउंटी क्रिकेट के द्वारा आयोजित किया जाएगा, जो थोर्प की घरेलू टीम भी थी. इस दिन मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता के लिए चैरिटी ‘Mind’ के सहयोग से विशेष पहल की जाएगी. दर्शकों से अपील की गई है कि वे मैच में थोर्प के स्टाइल वाली हेडबैंड पहनें, जो सीमित संस्करण में उनकी पत्नी और बेटियों द्वारा डिजाइन की गई है. इस दिन का उद्देश्य न केवल थोर्प को श्रद्धांजलि देना है, बल्कि आत्महत्या और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को भी तोड़ना है.

मानसिक स्वास्थ्य जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
ग्राहम थोर्प की कहानी बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य एक ऐसा पहलू है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मैदान पर चमकने वाला यह सितारा भीतर से बहुत कुछ झेल रहा था अकेले, चुपचाप, और टूटता हुआ. आज जब दुनिया उन्हें याद कर रही है, तो सिर्फ उनके शतकों और बल्लेबाज़ी की खूबसूरती के लिए नहीं, बल्कि उस इंसान के लिए भी जो अंदर से मदद की पुकार लगा रहा था. ग्राहम थोर्प की यादें रहेंगी न केवल क्रिकेटर के रूप में, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में, जिसे हार ने तोड़ दिया. हालांकि इंग्लैंड क्रिकेट ने उनके योगदान को याद बनाते हुए न्यूजीलैंड के खिलाफ 2024 में ही टेस्ट सीरीज की घोषणा की, जिसे थोर्प और कीवी दिग्गज मार्टिन क्रो के नाम पर रखा गया.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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