सुप्रीम कोर्ट ने दबाव बनाया तो बदलना पड़ सकता है आईपीएल का कार्यक्रम

नयी दिल्ली : यदि उच्चतम न्यायालय न्यायमूर्ति आर एम लोढा समिति की सिफारिशों को मानने के लिए बीसीसीआई को बाध्य कर देता है तो फिर देश की इस सर्वोच्च क्रिकेट संस्था को इस साल नौ अप्रैल से शुरु होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग के नौवें टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है. समिति […]
नयी दिल्ली : यदि उच्चतम न्यायालय न्यायमूर्ति आर एम लोढा समिति की सिफारिशों को मानने के लिए बीसीसीआई को बाध्य कर देता है तो फिर देश की इस सर्वोच्च क्रिकेट संस्था को इस साल नौ अप्रैल से शुरु होने वाले इंडियन प्रीमियर लीग के नौवें टूर्नामेंट के कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है.
समिति की एक सिफारिश के अनुसार आईपीएल सत्र और राष्ट्रीय कैलेंडर के बीच 15 दिन का अंतर होना चाहिए. भारतीय क्रिकेट टीम आईसीसी विश्व टी20 चैंपियनशिप में हिस्सा लेगी जो 14 मार्च से तीन अप्रैल तक खेली जायेगी. यदि भारत तीन अप्रैल को होने वाले फाइनल के लिए क्वालीफाई करता है तो फिर देश के चोटी के क्रिकेटरों को इस चैंपियनशिप के समाप्त होने के एक सप्ताह के अंदर आईपीएल में खेलना होगा.
रिपोर्ट के वॉल्यूम एक के पेज 42 में ‘आईपीएल’ शीर्षक से लिखा गया है, ‘‘बीसीसीआई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आईपीएल सत्र और राष्ट्रीय कैलेंडर के बीच कम से कम 15 दिन का अंतर हो. व्यस्त क्रिकेट कार्यक्रम का पेशेवर क्रिकेटरों पर प्रभाव पड़ रहा है और यह बीसीसीआई की जिम्मेदारी है कि वह इससे बचाव के लिए तुरंत उपाय करे. ”
समिति ने इसके साथ ही बीसीसीआई को यह भी याद दिलाया है कि भारतीय खिलाड़ी विदेशी क्रिकेटरों के नक्शेकदम पर चल सकते हैं जो अपना लंबा अंतरराष्ट्रीय करियर रखने के लिए आईपीएल का अनुबंध ठुकरा देते हैं.
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