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जेटली के कार्यकाल के बाद डीडीसीए की स्थिति बदतर हुई : गंभीर

Updated at : 20 Dec 2015 5:59 PM (IST)
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जेटली के कार्यकाल के बाद डीडीसीए की स्थिति बदतर हुई : गंभीर

नयी दिल्ली : पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने आज आलोचनाओं के बीच पूर्व डीडीसीए अध्यक्ष अरुण जेटली का पक्ष लेते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दिल्ली की क्रिकेट में कई अच्छे काम हुए लेकिन उनके पद छोड़ने के बाद पिछले दो वर्षों में ही स्थिति बदतर हुई. गंभीर ने यहां पत्रकारों से […]

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नयी दिल्ली : पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने आज आलोचनाओं के बीच पूर्व डीडीसीए अध्यक्ष अरुण जेटली का पक्ष लेते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में दिल्ली की क्रिकेट में कई अच्छे काम हुए लेकिन उनके पद छोड़ने के बाद पिछले दो वर्षों में ही स्थिति बदतर हुई. गंभीर ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘जब जेटली डीडीसीए के अध्यक्ष थे तब इसमें काफी अच्छे काम हुए.

अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक स्टेडियम का निर्माण किया गया. आपने देखा होगा कि पहले कोटला किस तरह का स्टेडियम था और अब कैसा है. ये सब काम तभी हुए जब जेटली अध्यक्ष थे. ‘ दिल्ली रणजी टीम के कप्तान ने कहा, ‘‘आज जो भी लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं, वे भी क्रिकेट सुधार समिति का हिस्सा थे. उन्हें शीर्ष पद दिये गये और उन्होंने दिल्ली के लिये कुछ नहीं किया. ‘
उन्होंने कहा, ‘‘अब जबकि वह (जेटली) अध्यक्ष नहीं हैं तब उन पर हर तरह के आरोप लगाये जा रहे हैं. यदि ऐसा मामला है तो फिर उन्हें डीडीसीए में ऐसे पदों पर नहीं होना चाहिए. आज सारे आरोप डीडीसीए पर नहीं बल्कि जेटली पर लगाये जा रहे हैं. मेरा सवाल है कि वह अकेले डीडीसीए को नहीं चला रहे थे.’
वित्त मंत्री जेटली 2013 तक 13 वर्षों तक डीडीसीए के प्रमुख रहे. दिल्ली सरकार ने उन पर उनके कार्यकाल के दौरान डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार पर आंख मूंदने का आरोप लगाया है. आप सरकार ने स्वतंत्र जांच के लिये जेटली से इस्तीफा देने या उन्हें पद से हटाने की मांग की है.
गंभीर ने इस मामले में आगे कहा, ‘‘मेरा मानना है कि उनके पद छोड़ने के बाद स्थिति खराब हुई. यदि आप इस साल प्रथम श्रेणी सत्र से पूर्व की तैयारियों पर गौर करो तो वहां कोई गेंदबाज नहीं था, कोई विकेट या नेट्स नहीं थे. जब जेटली जी अध्यक्ष थे तब ऐसा कभी नहीं हुआ. ‘
उन्होंने कहा, ‘‘मैं नहीं जानता कि किसी तरह का भ्रष्टाचार हुआ या नहीं, मेरा सिर्फ इतना मानना है कि वर्तमान अधिकारी वहां नहीं होने चाहिए क्योंकि उन्होंने कभी क्रिकेट के बारे में नहीं सोचा. पहले स्थिति बहुत अच्छी थी. पिछले दो वर्षों जैसी बुरी स्थिति डीडीसीए पहले कभी नहीं रही. वहां कोई भी ऐसा नहीं है जिसके पास जाकर अपनी बात रख सकते हो. ‘
गंभीर, वीरेंद्र सहवाग और कुछ अन्य सीनियर खिलाडियों ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ की खेल समिति से नाखुश होकर 2009 में प्रशासन के खिलाफ बागी तेवर अपना दिये थे. उस बगावत के बारे में गंभीर ने कहा, ‘‘हमारा विरोध जेटली जी के लिये नहीं था, यह डीडीसीए अन्य अधिकारियों के लिये था. हमने कभी उनका नाम नहीं लिया. हमने हमेशा कहा कि जब भी हमें किसी तरह की परेशानी हुई तो हम हर चीज के लिये जेटली जी के पास गये जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था. ‘
उन्होंने नेत्रहीन क्रिकेटरों के लिये एक कार्यक्रम से इतर कहा, ‘‘यदि आपको हर काम के लिये जेटली जी के पास ही जाना था तो फिर अन्य अधिकारियों और प्रशासकों का क्या काम था. फिर एक संघ होने का क्या मतलब है. इसलिए तब हमें अन्य अधिकारियों से परेशानी थी और यहां तक कि अब भी हमें अन्य अधिकारियों से परेशानी है. मेरे और सहवाग के हमेशा जेटली जी के साथ बहुत अच्छे संबंध रहे. ‘
गंभीर से पूछा गया कि क्या वह कभी दिल्ली की टीम छोडेंगे, उन्होंने कहा, ‘‘मैं हमेशा दिल्ली का लड़का रहा. मैंने कभी दिल्ली को छोड़ने के बारे में नहीं सोचा. मेरा दिल दिल्ली के लिये धड़कता है. मैंने दिल्ली के साथ अपना करियर शुरू किया और मैं दिल्ली के साथ रहकर अपना करियर समाप्त करना चाहता हूं क्योंकि मुझे लगता है कि यह मेरी घरेलू टीम है और इससे मुझे भारत की तरफ से खेलने का मौका मिला. वहां जो भी अव्यवस्था थी या है, इसने मुझे मौका दिया. ‘
भारत और पाकिस्तान के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय श्रृंखला का होना अनिश्चित है और गंभीर ने कहा कि इस पर फैसला दोनों देशों की सरकारों को करना है. उन्होंने कहा, ‘‘यह राजनीतिक फैसला है. भारत और पाकिस्तान के बीच श्रृंखला के बारे में फैसला हमेशा सरकारें करती हैं और वे ही इसे मंजूरी देती हैं. यदि आप किसी खिलाडी से पूछोगे तो वह यही कहेगा कि पाकिस्तान के खिलाफ खेलने में मजा आता है. लेकिन पहले भी जो श्रृंखलाएं हुई वे सरकार की मंजूरी के बाद ही हो पायी थी और सरकार जो भी फैसला करेगी वह देश के सर्वश्रेष्ठ हित में करेगी.’
युवराज सिंह और आशीष नेहरा ने आस्ट्रेलिया दौरे में टी20 श्रृंखला के लिये भारतीय टीम में वापसी की है. गंभीर से पूछा गया कि वह भारतीय टीम में कब वापसी कर सकते है, उन्होंने कहा, ‘‘यह चयनकर्ताओं पर निर्भर करता है. मेरा काम क्रिकेट खेलना और अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है. ‘ उन्होंने कहा, ‘‘दिल्ली विजय हजारे ट्राफी के नाकआउट में है और हम अच्छा प्रदर्शन करने पर ध्यान दे रहे हैं.
प्रत्येक खिलाड़ी को अपने देश से नहीं खेलने की कमी अखरती है लेकिन आप वही कर सकते हो जो आपके हाथ में है. ‘ गंभीर से पूछा गया कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ स्पिनरों की मददगार पिचों पर खेलने से आस्ट्रेलिया में वनडे और टी20 में उनका प्रदर्शन प्रभावित होगा, उन्होंने कहा, ‘‘यह अलग तरह का प्रारुप है. आप टेस्ट और वनडे की तुलना नहीं कर सकते हो.’
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