बीसीसीआई की उम्र परीक्षण प्रणाली में दखल से अदालत का इनकार
Updated at : 23 Sep 2015 4:20 PM (IST)
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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने अंडर 16 टूर्नामेंटों के लिये खिलाडियों की उम्र की जांच की बीसीसीआई की नीति में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि बोर्ड की टीडब्ल्यू 3 टेस्ट की नीति तर्कसंगत है. मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि बोर्ड द्वारा खिलाडियों […]
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नयी दिल्ली : दिल्ली उच्च न्यायालय ने अंडर 16 टूर्नामेंटों के लिये खिलाडियों की उम्र की जांच की बीसीसीआई की नीति में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि बोर्ड की टीडब्ल्यू 3 टेस्ट की नीति तर्कसंगत है. मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति जयंत नाथ की खंडपीठ ने कहा कि बोर्ड द्वारा खिलाडियों की उम्र के परीक्षण के लिये अपनाई गई टेनर व्हाइटहाउस 3 : टीडब्ल्यू 3 : बोन टेस्ट प्रणाली से पक्षपात से बचने में मदद मिलती है.
पीठ ने कहा ,‘‘ अंडर 16 टूर्नामेंटों के प्रतिभागियों की उम्र के परीक्षण के लिये टीडब्ल्यू 3 नीति अपनाने का बीसीसीआई का नीतिगत फैसला अतार्किक या अप्रासंगिक आधार पर नहीं लिया गया है. हमें यह फैसला तर्कसंगत लगता है और इसे जनहित के खिलाफ नहीं ठहराया जा सकता.” अदालत ने कहा ,‘‘ बोन एज टेस्ट प्रणाली खिलाडियों के बीच पक्षपात से बचने के लिये अपनाई गई है.” बीसीसीआई ने एकल पीठ के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी जिस पर उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया.
एकल पीठ ने बोर्ड को खिलाडियों की उम्र की जांच जन्म प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेजों के आधार पर करने का निर्देश दिया था. एकल पीठ ने यह आदेश दिसंबर 2013 में दो क्रिकेटरों यश और आर्यन सेहरावत की याचिकाओं पर दिया था जिन्हें टीडब्ल्यू 3 बोन एज टेस्ट में अधिक उम्र का पाये जाने के बाद अंडर 16 टूर्नामेंट खेलने की अनुमति नहीं मिली थी.
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