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क्रिकेट अंपायरिंग का गिरता स्तर, अंपायरिंग की गलती से आउट हुए धोनी और कोहली!

Updated at : 14 Jul 2019 7:40 AM (IST)
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क्रिकेट अंपायरिंग का गिरता स्तर, अंपायरिंग की गलती से आउट हुए धोनी और कोहली!

अगर अंपायर या रेफरी सही फैसले न दें, तो खेल का मजा किरकिरा हो जाता है और खिलाड़ी के दिलो-दिमाग पर चोट लगती है. एक दौर था, जब अंपायर जाने-अनजाने गलतियां करते थे और कुछ पर पक्षपात के आरोप भी लगते थे. क्रिकेट समेत हर खेल में अब अंपायरिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीक भी उपलब्ध […]

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अगर अंपायर या रेफरी सही फैसले न दें, तो खेल का मजा किरकिरा हो जाता है और खिलाड़ी के दिलो-दिमाग पर चोट लगती है. एक दौर था, जब अंपायर जाने-अनजाने गलतियां करते थे और कुछ पर पक्षपात के आरोप भी लगते थे.
क्रिकेट समेत हर खेल में अब अंपायरिंग के लिए अत्याधुनिक तकनीक भी उपलब्ध हैं. फिर भी बड़ी गलतियां ज्यादा होने लगी हैं. ब्रिटेन में आयोजित विश्वकप के दौरान महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, जैसन रॉय जैसे शानदार खिलाड़ियों को आउट देने पर सवालिया निशान लगे हैं. रॉय को गलत आउट देनेवाले अंपायर कुमार धर्मसेना को फाइनल मैच में अंपायरिंग देने का भी विरोध हुआ है. इन संदर्भों के हवाले से अंपायरिंग के अतीत और वर्तमान को खंगालती इन-दिनों की प्रस्तुति…
अंपायरिंग रहा है बड़ा मसला
क्रिकेट को जेंटलमैन गेम माना जाता है, लेकिन यह खेल प्रारंभ से ही अक्सर विवादों में रहा. कई बार अंपायर के एक फैसले से मैचों के परिणाम बदल जाते हैं. अंपायरों द्वारा कई बार आश्चर्यजनक, तो कई बार विवादित फैसले दिये गये, जो सुर्खियां बने. हालांकि, अंपायर डिसीजन रिव्यू सिस्टम (डीआरएस) जैसे नियमों के लागू होने के बाद गलत फैसलों की संख्या में काफी कमी आयी है.
विवादों में रहे ये अंपायर
शकूर राणा
पूर्व पाकिस्तानी अंपायर शकूर राणा वर्ष 1987 में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच खेले गये टेस्ट मैच के दौरान विवादित फैसले को लेकर चर्चा में रहे. मैच के दौरान इंग्लैंड के कप्तान माइक गैटिंग से तीखी नोकझोंक हुई थी. इससे पहले 1984 में जावेद मियांदाद के पक्ष में गलत फैसला देने पर शकूर राणा और न्यूजीलैंड के कप्तान जेरेमी कोनी के बीच बहस हुई थी.
डैरेल हेयर
कई विवादित फैसले खासकर, एशियाई देशों के खिलाफ निर्णय देने के लिए डैरेल हेयर विवादों में रहे. ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका के बीच खेले गये टेस्ट मैच में मुथैया मुरलीधरन के तीन ओवरों में सात नोबॉल देने से मामला तूल पकड़ लिया.
इसके बाद श्रीलंकाई कप्तान अर्जुन रणतुंगा खिलाड़ियों के साथ मैदान से बाहर चले गये. साल 2006 में पाकिस्तान और इंग्लैंड के बीच खेले गये मैच में खराब अंपायरिंग को लेकर एक बार फिर हेयर चर्चा में रहे. पाकिस्तान ने मैच का बायकॉट कर दिया, इसके बाद इंग्लैंड को विजेता घोषित कर दिया गया. वर्ष 1877 में टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत के बाद से यह पहली घटना थी.
असद रउफ
साल 2013 से पहले तक पाकिस्तानी अंपायर असद रउफ का करियर निर्विवाद रहा. दिल्ली की एक मॉडल द्वारा यौन शोषण के आरोप के बाद उनका अंतरराष्ट्रीय करियर खतरे में पड़ गया. साल 2013 के आखिर में मुंबई पुलिस द्वारा धोखेबाजी, सट्टेबाजी और जालसाजी का मामला दर्ज किया गया. उन पर आइपीएल स्पॉट फिक्सिंग का भी आरोप लगा.
अंपायरिंग की गलती से आउट हुए धोनी और कोहली!
विश्वकप में भारत-न्यूजीलैंड के बीच खेले गये सेमीफाइनल मैच धोनी का रनआउट होना मुकाबले का टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. इस अहम मुकाबले को हारने के साथ ही भारत का विश्वकप का सपना चूर हो गया. जब धोनी रनआउट हुए, तो भारत न्यूजीलैंड द्वारा दिये 240 रनों के लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुका था. हालांकि, मैच की शुरुआत में शीर्ष बल्लेबाजी क्रम के फेल होने के बाद धोनी और जडेजा की शतकीय साझेदारी ने जीत की उम्मीदें जगा दी थी. जिस प्रकार से विराट कोहली को एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया गया, उस पर भी सवाल हैं, क्योंकि ठीक उसी स्थिति में दूसरे सेमीफाइनल में स्टीव स्मिथ को नॉट आउट दिया गया. मार्टिन गप्टिल के थ्रो से धोनी का रनआउट होना निराशाजनक था, हालांकि क्षेत्ररक्षण पर सवाल खड़े किये जा रहे हैं.
गेंद की वैधता पर शुरू हुई बहस
मैच के बाद गेंद की वैधता पर सवाल करनेवाला एक वीडियो टि्वटर पर ट्रेंड करने लगा. इसके बाद यह बहस तेज हो गयी कि अगर गेंद नोबॉल करार दी जाती, तो मैच का परिणाम बदल सकता था.
क्या कहता है नियम : तीसरे पावरप्ले के लागू होने पर 30 गज के दायरे के बाहर केवल पांच खिलाड़ी ही रह सकते हैं. लेकिन, मैच के बाद जारी किये गये ग्राफिक्स से स्पष्ट है कि जब बॉल फेंकी गयी, उस समय 30 गज के बाहर न्यूजीलैंड के छह खिलाड़ी थे. अगर यह नोबॉल होती, तो भी धोनी आउट करार दिये जाते (बल्लेबाज नोबॉल पर भी रनआउट हो सकते हैं).
भड़का लोगों का गुस्सा
वीडियो पर अलग-अलग प्रतिक्रिया सामने आयी, कई लोगों ने सीधे तौर पर अंपायरिंग पर सवाल खड़ा कर दिया. अगर अंपायर नोबॉल करार देते, तो शायद धोनी दूसरे रन के लिए नहीं भागते. नियम से अधिक क्षेत्ररक्षक बाहर रहने पर अंपायर द्वारा नजरअंदाज करना भारत के लिए भारी पड़ा.
दूसरे सेमीफाइनल में भी अंपायरिंग पर सवाल
ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेले गये दूसरे सेमीफाइनल मुकाबले में अंपायर कुमार धर्मसेना ने इंग्लैंड के ओपनर जेसन रॉय के ‘कॉट बिहाइंड’ पर गलत फैसला दिया. पारी के 20वें ओवर में पैट कमिंस की गेंद को रॉय ने पुल्ड करने की कोशिश की, जो उन्हें बीट करती हुई एलेक्स कैरी के दस्तानों में चली गयी. ऑस्ट्रेलियाई अपील पर अंपायर धर्मसेना ने हिचकते हुए आउट करार दे दिया. इस फैसले पर रॉय हैरत जताते हुए काफी देर तक मैदान पर खड़े रहे, इंग्लैंड के पास रिव्यू बचा नहीं था, लिहाजा अंपायर का फैसला स्वीकार करना ही था, हालांकि रॉय स्पष्ट रूप से नॉटआउट थे.
अंपायर के फैसले पर नहीं जता सकते विरोध
अल्ट्राएज की फ्लैटलाइन से स्पष्ट है कि रॉय नॉटआउट थे, लेकिन उस समय 85 के स्कोर पर खेल रहे रॉय के पास रिव्यू लेने का विकल्प खत्म हो चुका था. रॉय मैदान में काफी देर तक खड़े रहे और रेफर करने व फैसला बदलने का इंतजार करते रहे, लेकिन दूसरे छोर के अंपायर इरेस्मस ने कहा कि उन्हें जाना ही होगा. अंपायर के फैसले की खिलाफत करना इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आइसीसी) के नियमानुसार दंडनीय है. इस मामले में मैच रेफरी रंजन मधुगले आगे कार्रवाई का फैसला कर सकते हैं.
मार्क बेंसन
वर्ष 2007 और 2008 में लगातार दो वर्षों तक ‘अंपायर ऑफ द ईयर’ बेंसन 2008 में भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच में गलत फैसलों के लिए चर्चा में रहे. रिकी पॉन्टिंग के आउट होने के बावजूद नॉट आउट देना और फिर एक के बाद एक उनके खराब फैसले विवाद बढ़ाते रहे. साल 2009 में उन्होंने यूडीआरएस की खिलाफत भी की थी.
स्टीव बकनर
वेस्टइंडीज के स्टीव बकनर अपने अंपायरिंग स्किल को लेकर सबसे ज्यादा विवादित रहे हैं. महानतम बल्लेबाजों में शुमार सचिन तेंदुलकर कई बार उनके गलत फैसले का शिकार रहे. साल 1992 से ही विवादों में रहे बकनर को 2008 में भारत-ऑस्ट्रेलिया मैच में कई विवादित फैसले देने के बाद निलंबित कर दिया गया. राहुल द्रविड़ का मजाक उड़ाने पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना भी भरना पड़ा था.
अंपायरों द्वारा दिये गये कुछ बेहद विवादास्पद निर्णय
वर्ष 2006 में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच सिडनी में चल रहे टेस्ट मैच के दौरान अंपायर बिली बोडेन का गलत फैसला चर्चा में रहा था. दक्षिण अफ्रीका के बल्लेबाज एश्वेल प्रिंस को शेन वॉर्न की गेंद पर बिली बोडेन ने एलबीडब्ल्यू आउट दे दिया था, जबकि बॉल ऑफ स्टंप के बाहर थी.
ऑकलैंड में इसी वर्ष न्यूजीलैंड और भारत के बीच हुए दूसरे टी-20 मैच में डेरिल मिशेल को क्रुणाल पांड्या ने एलबीडब्ल्यू आउट किया था. हॉटस्पॉट तकनीक बता रही थी कि बॉल ने इनसाइड एज लिया था, लेकिन न्यूजीलैंड के थर्ड अंपायर शॉन हेग ने हॉटस्पॉट की बजाय स्निको (स्निकोमीटर) को वरीयता दी, जिसके अनुसार मिशेल आउट थे. इस प्रकार मिशेल आउट करार दिये गये.
वेलिंग्टन में वर्ष 2016 में न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए टेस्ट मैच में एक निर्णय को आइसीसी मैच रेफरी क्रिस ब्रॉड ने भी शर्मनाक बताया था. इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज एडम वोग को न्यूजीलैंड के गेंदबाज डौग ब्रेसवेल ने बोल्ड कर दिया था. लेकिन ब्रिटिश अंपायर रिचर्ड इलिंगवर्थ ने उस बॉल को नोबॉल करार दिया. टीवी टेलीकास्ट से पता चला कि वह गेंद नोबॉल नहीं थी. इस जीवनदान का वोग ने लाभ उठाया और 239 रन बना डाले.
वर्ष 1981 में मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच एकदिवसीय मैच में न्यूजीलैंड के मार्टिन स्नेडेन ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज ग्रेग चैपल का शानदार लो आउटफील्ड कैच पकड़ा. उस कैच को मशहूर कमेंटेटर रिची बेनौड ने भी बेहतरीन कैच कहा था. लेकिन ग्रेग चैपल ने पवेलियन लौटने से इनकार कर दिया. मैच के दोनों ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डोनाल्ड वेसेर और पीटर क्रॉनिन ने चैपल को आउट देने के बजाय बल्लेबाजी की अनुमति प्रदान की.
ऑकलैंड में 2002 में न्यूजीलैंड और इंग्लैंड के बीच हुए टेस्ट मैच में इंग्लैंड के एंड्रयू फ्लिनटॉफ को न्यूजीलैंड के गेंदबाज एंड्रे एडम्स ने गेंद फेंकी. फ्लिनटॉफ ने अपना पैड अड़ाया और बॉल कैच कर ली गयी. गेंद और बल्ले के बीच कोई संपर्क न होने के बावजूद न्यूजीलैंड के अंपायर डौग कोवी ने बल्लेबाज को आउट दे दिया. जबकि एडम्स ने आउट की अपील ही नहीं की थी.
वर्ष 1992 विश्वकप के दौरान ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के मैच में अफ्रीकी गेंदबाज एलन डॉनाल्ड ने ज्योफ मार्श को गेंद फेंका. गेंद ने बल्ले का बाहरी किनारा लिया और डेविड रिचर्डसन ने कैच पकड़ लिया, लेकिन न्यूजीलैंड के अंपायर ब्रॉयन एल्ड्रिज ने ज्योफ मार्श को आउट नहीं दिया.
वर्ष 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज नाथन लॉयन आउट थे. हाटस्पॉट स्पष्ट तौर पर बल्ले के ऊपरी किनारे पर बॉल के निशान दिखा रहा था, लेकिन ब्रिटेन के थर्ड अंपायर नाइजेल लियोंग ने लॉयन को आउट नहीं दिया.
वर्ष 1987 में ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड के बीच मैच विवादों में रहा था. न्यूजीलैंड के गेंदबाज डैनी मॉरिसन ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज क्रेग मैकडॉरमैट को एलबीडब्ल्यू की अपील की. ऑस्ट्रेलियाई अंपायर डिक फ्रेंच ने नॉटआउट दिया. अगर अंपायर ने सही फैसला दिया होता तो संभवत: न्यूजीलैंड यह मैच जीत जाता.
अंपायरिंग में इस्तेमाल होनेवाले उपकरण
ऑन-फील्ड अंपायर
क्रिकेट अंपायर काउंटर : इस उपकरण के जरिये अंपायर गेंद, ओवर और विकेट की गिनती करते हैं. यह उपकरण 99 ओवर तक गिनती कर सकता है.
वाकी-टाॅकी : यह वायरलेस कम्युनिकेशन डिवाइस दोनों ऑन-फील्ड अंपायर के पास होता है. वे मुश्किल परिस्थितियों में निर्णय लेते समय थर्ड अंपायर से इससे परामर्श लेते हैं.
मार्बल्स : क्रिकेट अंपायर काउंटर के ईजाद सेे पहले एक ओवर में गेंद की गिनती के लिए अंपायर छह सिक्कों का सेट, स्टोन्स या मार्बल्स का प्रयोग करते थे.
अंपायर्स लाइट मीटर : मेगाटॉन अंपायर्स लाइट मीटर को मूल रूप से क्रिकेट फील्ड के प्रकाश स्तर को इंगित करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसकी रीडिंग को सीधे या ऑन/ऑफ स्विच पर होल्ड पोजिशन का उपयोग करके लिया जा सकता है.
मीडिया और कमेंटरी बॉक्स में प्रयोग होनेवाली तकनीक
हॉक-आई : इस तकनीक का प्रयोग सिर्फ थर्ड अंपायर द्वारा किया जाता है, जब फील्ड अंपायर के निर्णय को चुनौती देते हुए डीआरएस जारी किया जाता है. यह कंप्यूटराइज्ड तकनीक गेंद के प्रक्षेप पथ (ट्रैजेक्टरी ऑफ बॉल) को निर्धारित करती है.
स्निकोमीटर : इस तकनीक का प्रयोग प्राय: थर्ड अंपायर द्वारा स्लो मोशन टेलीविजन रिप्ले में किया जाता है, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि विकेटकीपर के पास जाते हुए गेंद ने बल्ले का संपर्क किया है या नहीं.
हॉटस्पॉट : यह इंफ्रारेड इमेजिंग सिस्टम है. इसमें दो इंफ्रारेड कैमरा ग्राउंड के दोनों तरफ आमने-सामने और खेल के मैदान के ऊपर लगाया जाता है. ये कैमरे निरंतर इमेजेज को रिकॉर्ड करते रहते हैं और इस बात को निर्धारित करने में मदद करते हैं कि गेंद का बल्ले से संपर्क हुआ है या नहीं.
टीवी-रीप्ले : थर्ड अंपायर इंस्टेंट टीवी-रीप्ले का इस्तेमाल रन-आउट, स्टंपिंग, बाउंड्री, कैच पर करीबी नजर आदि रखने के लिए करता है, जिन्हें नंगी आंखों से देखना बहुत मुश्किल होता है.
क्या है थर्ड अंपायर की उपयोगिता
थर्ड अंपायर, जिसे टीवी अंपायर के नाम से भी जाना जाता है, ऑफ-फील्ड अंपायर होते हैं. ये आमतौर पर अपना निर्णय तभी देते हैं, जब ऑन-फील्ड अंपायर अनिश्चय की स्थिति में होते हैं.
थर्ड अंपायर फील्ड के बाहर एक टेलीविजन रीप्ले मॉनिटर के साथ बैठे होते हैं. फील्ड अंपायर अपने विवेक के आधार पर वायरलेस सेट या सिग्नल लाइट सिस्टम के माध्यम से बल्लेबाज के आउट होने, बाउंड्री लगने या कैच होने जैसे नजदीकी मामले को थर्ड अंपायर के पास भेज सकते हैं. थर्ड अंपायर टीवी रीप्ले को विभिन्न कोणों से देखते हैं और उचित संकेत के माध्यम से निष्कर्ष पर पहुंचते हैं.
अगर किसी मामले में टीवी अंपायर को भी स्पष्ट तस्वीर नहीं मिल पाती है, तब संदेह का लाभ बल्लेबाज को मिलता है. इधर के वर्षों में रन आउट, स्टंप्ड, कैच और हिट-विकेट जैसे मामलों में थर्ड अंपायर की काफी मदद ली जाने लगी है.
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