गेंदबाजी बनी धौनी का सिरदर्द

Published at :05 Jul 2014 8:03 AM (IST)
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गेंदबाजी बनी धौनी का सिरदर्द

डर्बीशर : भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को नौ जुलाई से ट्रेंटब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ शुरु होने वाली टेस्ट श्रृंखला के पहले मैच से पूर्व अपनी टीम की गेंदबाजी को लेकर गंभीर चिंतन करना होगा. इशांत शर्मा की अगुवाई में भारतीय गेंदबाजों ने लीसेस्टरशर और डर्बीशर के खिलाफ दो अभ्यास मैचों में 197 ओवरों […]

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डर्बीशर : भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धौनी को नौ जुलाई से ट्रेंटब्रिज में इंग्लैंड के खिलाफ शुरु होने वाली टेस्ट श्रृंखला के पहले मैच से पूर्व अपनी टीम की गेंदबाजी को लेकर गंभीर चिंतन करना होगा. इशांत शर्मा की अगुवाई में भारतीय गेंदबाजों ने लीसेस्टरशर और डर्बीशर के खिलाफ दो अभ्यास मैचों में 197 ओवरों में केवल 11 विकेट चटकाकर 831 रन खर्च कर दिये. इशांत ने तीन पारियों में गेंदबाजी करते हुए कुल 18 नोबाल फेंकीं.

ये आंकडे भले ही धौनी को ज्यादा प्रभावित नहीं करें लेकिन कप्तान को टेस्ट श्रृंखला से पहले निश्चित रुप से इस ओर गौर करना पडेगा क्योंकि भारतीय टीम पारंपरिक रुप से चार विशेषज्ञ गेंदबाजों के साथ खेलती है. लीसेस्टरशर के कम चर्चित बल्लेबाजों एंगुस राबसन और ग्रेम स्मिथ ने अच्छी बल्लेबाजी करते हुए शतक जडे जबकि भारतीय टीम डर्बीशर के खिलाफ पांच विकेट की जीत दर्ज करने में कामयाब रही.

भारतीय टीम के लिए दो अभ्यास मैच मिलीजुली प्रतिक्रिया लेकर आए. उनका मुख्य ध्यान दौरे पर आए सभी खिलाडियों को मौका देना था क्योंकि पांच मैचों की श्रृंखला लगातार होनी है. उस प्रयास में यह टीम सफल रही. बल्लेबाजों ने अच्छा अभ्यास किया और लीसेस्टर में बादल छाये रहने के बावजूद अच्छा प्रदर्शन किया जबकि जबकि डर्बी की सपाट पिच पर बल्लेबाजी का आनंद लिया. नाटिंघम टेस्ट के लिए अंतिम एकादश में सातवें नंबर का खिलाडी अहम होगा और टीम प्रबंधन द्वारा पिच का मुआयना करने के बाद सब कुछ परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. इससे पहले इस सप्ताह, क्रिकेटर से कमेंट्रेटर बने रवि शास्त्री ने भारतीय गेंदबाजों से इंग्लैंड के कप्तान एलिस्टेयर कुक पर दबाव बनाने के लिए कहा था.

उन्होंने कहा कि अगर हो सके कि कप्तान पर हमेशा दबाव बनाने का प्रयास किया जाए. आपको मैच को ज्यादा से ज्यादा संघर्षपूर्ण बनाने का प्रयास करना चाहिए.चिंता की बात यह है कि भारतीय गेंदबाजों के टेस्ट मैच में पूरे 20 विकेट लेने की क्षमता पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है लेकिन फिर भी भारतीय गेंदबाज पटौदी ट्राफी फिर से हासिल करने के इरादे से श्रृंखला में उतरेंगे.अनुभवी गेंदबाज जहीर खान की अनुपस्थिति भी भारतीयों के लिए चिंता का कारण है क्योंकि जहीर के कारण उनके आक्रमण की धार में कमी आई है. जहीर की अनुपस्थिति में इशांत के हाथों में आक्रमण की कमान है. इंग्लैंड की परिस्थितियों में टेस्ट क्रिकेट का अनुभव केवल उन्हीं के पास है और वह साढे छह साल के अंतरराष्ट्रीय करियर में 55 टेस्ट मैच खेल चुके हैं.

इशांत के अलावा तेज गेंदबाजों के रुप में टीम के पास भुवनेश्वर कुमार :6 टेस्ट:, मोहम्मद शमी :6 टेस्ट:, वरुण आरोन :1 टेस्ट:, ईश्वर पांडे और पंकज सिंह जैसे विकल्प हैं. इनमें पांडे और पंकज सिंह ने अभी तक टेस्ट में पदार्पण नहीं किया है. ऐसे में, इशांत के कंधों पर ज्यादा जिम्मेदारी और दबाव होगा. हालांकि इस दौर पर उनकी शुरुआत अच्छी नहीं रही है. लीसेस्टर में इशांत लय से पूरी तरह बाहर दिखे जबकि डर्बी में पहली पारी में भी उन्होंने प्रभावित नहीं किया. इन दो पारियों में उन्होंने 21 ओवर में 113 रन दिये और वह केवल दो विकेट झटक पाए. इस दौरान उन्होंने 18 नोबाल भी फेंकी.

उन्होंने लय पाने के लिए बहुत संघर्ष किया और अपने रन अप में काफी मिश्रण करने का प्रयास किया. डर्बी में दूसरी पारी में हालांकि उन्होंने सात ओवर के स्पैल में केवल 10 रन दिये और सिर्फ दो नोबाल फेंकी.

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