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2036 Olympics: भारत ने सौंपा ‘आशय पत्र’, मेजबानी से क्या है इसका संबंध?

Updated at : 06 Nov 2024 12:02 PM (IST)
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Symbolic Image. Indian Olympics Mission 2036.

Symbolic Image. Indian Olympics Mission 2036.

2036 Olympics: भारत सरकार ने 2036 के ओलंपिक्स की मेजबानी के लिए एक और कदम बढ़ा दिया है. भारत ने अपना ‘आशय पत्र’ सौंप दिया है. आशय पत्र सौंपने और इसके आगे का सफर कैसा रहेगा, पढ़िए इस लेख में.

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2036 Olympics: भारत ने 2036 में होने वाले ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों की मेजबानी करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठाते हुए देश की इच्छा व्यक्त करने से संबंधित आशय पत्र अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) को सौंप दिया है. खेल मंत्रालय के एक सूत्र के अनुसार भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने यह पत्र एक अक्टूबर को आईओसी को सौंपा था. सूत्र ने कहा कि यह महत्वपूर्ण अवसर पूरे देश में आर्थिक विकास, सामाजिक प्रगति और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा देकर पर्याप्त लाभ दिला सकता है. 2036 का साल आने में अभी 12 साल हैं. लेकिन इसके लिए तमाम तैयारियों से संबंधित कार्य पूरे करने में समय लग जाते हैं. लिहाजा आगामी ओलंपिक के लिए दावेदारी को लेकर भारत अपनी तैयारियों में कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहता. 

क्या है आशय पत्र और भारत को कैसे मिलेगी मेजबानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल सबसे पहले 2036 ओलंपिक की मेजबानी की अपनी सरकार की इच्छा के बारे में बात की थी. आईओसी ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह लिखा है कि मेजबानी के लिए कई व्यावहारिक मूल्यांकन में कई चीजों पर ध्यान दिया जाता है. इनमें मानवाधिकार, सामाजिक उत्तरदायित्व के लिए व्यवसाय (BSR) और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) से जुड़े तथ्य शामिल होते हैं. भारत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अपना आशय पत्र (Letter of Intent) आईओसी को सौंपा है. आशय पत्र सौंपने का मतलब है कि देश ओलंपिक का मेजबान चुनने की प्रक्रिया में अनौपचारिक संवाद से निरंतर संवाद के चरण में पहुंच गया है. इस चरण में आईओसी संभावित मेजबान की खेलों से जुड़ी परियोजनाओं की प्रगति का व्यवहारिक अध्ययन करता है. खेल मैदान की प्रगति, खेलों को बेहतर ढंग से आयोजित कर सकने की क्षमता के साथ-साथ उसके लिए फंडिंग भी जांची जाती है. प्रक्रिया का अगला चरण टारगेटेड डायलॉग होगा, जिसके लिए औपचारिक बोली जमा करने की आवश्यकता होगी. बोली लगाने के लिए सभी दावेदार देशों के मेजबान आयोग इसका मूल्यांकन करेंगे. यह प्रक्रिया आखिर में मेजबान देश के चुनाव के साथ समाप्त होगी.

ओलंपिक समिति ने 2014 में एजेंडा ओलंपिक 2020 को अपनाया था. जिसके तहत कुछ विषयों पर ध्यान दिया गया. जैसे अधिक खर्च, प्रतिष्ठा और अत्यधिक आशान्वित खिलाड़ियों के साथ-साथ वे देश भी हतोत्साहित न हों जिन्हें दावेदारी नहीं मिल पाई. ओलंपिक समिति ने अब एजेंडा 2020+5 को लांच किया है. जिसमें इन विषयों के साथ मेजबान देशों की लंबी विकास योजनाओं के बारे में भी ध्यान रखते हैं. हालांकि आईओसी के अगले साल होने वाले चुनावों से पहले मेजबान पर निर्णय नहीं लिया जाएगा. भारत को मेजबानी की दौड़ में सऊदी अरब, कतर और तुर्की जैसे कई अन्य देशों की कड़ी चुनौती का सामना भी करना पड़ेगा जो खुद को इस खेल महाकुंभ की मेजबानी के लिए मजबूत दावेदार के रूप में पेश कर रहे हैं. 2028 का ओलंपिक लॉस एंजिल्स में होगा और 2032 का ओलंपिक ब्रिसबेन में होना है. ऐसे में भारत सरकार 2036 की मेजबानी के लिए पूरा जोर लगा रही है.

भाषा के इनपुट के साथ.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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