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Varalakshmi vrat 2024: वरलक्ष्मी व्रत कब है? जानें शुभ मुहूर्त-पूजा विधि और इस दिन का महत्व

Updated at : 09 Aug 2024 11:39 AM (IST)
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कृष्ण जन्माष्टमी कब है

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Varalakshmi vrat 2024: वरलक्ष्मी व्रत सावन मास के आखिरी शुक्रवार को रखा जाता है. इस बार यह व्रत 16 अगस्‍त को है. वैसे तो हर शुक्रवार मां लक्ष्‍मी को समर्पित होता है, लेकिन सावन के आखिरी शुक्रवार का व्रत वरलक्ष्‍मी व्रत कहा जाता है. सावन का आखिरी शुक्रवार मां लक्ष्‍मी की उपासना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.

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Varalakshmi vrat 2024: हिंदू धर्म में वरलक्ष्मी व्रत एक महत्वपूर्ण व्रत है, विशेषकर दक्षिण भारत में इस व्रत का ज्यादा प्रचलन है. यह व्रत श्रावण मास के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है और इस वर्ष यह 16 अगस्त 2024 दिन शुक्रवार को है. इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है.

वरलक्ष्मी कौन हैं?

वरलक्ष्मी का अर्थ है ‘वरदान देने वाली लक्ष्मी’। धार्मिक मान्यता है कि माता लक्ष्मी का अवतार क्षीरसागर से हुआ है, इसलिए इसका वर्णन दूधिया सागर में की जाती है उसी अनुसार इनका पूजन तथा व्रत भी होता है, जो व्यक्ति वरलक्ष्मी का व्रत करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

वरलक्ष्मी व्रत का महत्व

धन की प्राप्ति: इस व्रत को करने से व्यक्ति को धन की प्राप्ति होती है और दरिद्रता दूर होती है.
सुख-समृद्धि: व्रत करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है.
आने वाली पीढ़ी: माना जाता है कि इस व्रत का प्रभाव आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है और वे भी सुखी जीवन जीते हैं.

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वरलक्ष्मी व्रत पूजा विधि
कलश स्थापना: सबसे पहले एक कलश स्थापित किया जाता है। उसमे आम का पता, फूल सुपारी डालकर, नारियल में लाल कपड़ा लपेटकर कलश के उपर रख दें छोटी चौकी या आसनी के उपर सफेद रंग का आसन बिछाए. वरलक्ष्मी माता का प्रतिमा उस आसन के उपर रखे.

मां लक्ष्मी की पूजा: कलश की पूजा के बाद मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. छोटी चौकी या आसनी के उपर सफेद रंग का आसन बिछाए. वरलक्ष्मी माता का प्रतिमा उस आसन के उपर रखें. वरलक्ष्मी का विषेश पूजन करें.

अर्चना: मां लक्ष्मी को फूल, फल, मिठाई आदि चढ़ाए जाते हैं.
आराधना: मां लक्ष्मी से सुख-समृद्धि की कामना की जाती है.

पूजा का मुहूर्त
पूजा का मुहूर्त अलग-अलग लग्न के अनुसार अलग-अलग होता है। यहां दिए गए मुहूर्त के अनुसार आप पूजा कर सकते हैं.

सिंह लग्न पूजा मुहूर्त: प्रातः 05:57 – प्रातः 08:14 (अवधि – 02 घण्टे 17 मिनट)
वृश्चिक लग्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 12:50 – दोपहर 03:08 (अवधि – 02 घण्टे 19 मिनट)
कुंभ लग्न पूजा मुहूर्त: सायं 06:55 – रात 08:22 (अवधि – 01 घण्टा 27 मिनट)
वृषभ लग्न पूजा मुहूर्त: रात्रि 11:22 – प्रातः 01:18, अगस्त 17 (अवधि – 01 घण्टा 56 मिनट)

व्रत के नियम
व्रत रखने वाले व्यक्ति को पूरे दिन उपवास रखना चाहिए. पूरे दिन सकारात्मक विचार रखने चाहिए. संध्या काल में दिपावली की तरह वर लक्ष्मी का पूजन करे घर में बने पकवान का भोग लगाएं. शाम को पूजा के बाद ही भोजन करना चाहिए. ऐसे माता वरलक्ष्मी प्रसन्न होती है और आपकों वरदान देती है जिसे आप निरंतर उन्नति करते है व्यापार में लाभ होता है. परिवार में सुख समृद्धि बनी रहती है.

जन्मकुंडली, वास्तु, तथा व्रत त्योहार से सम्बंधित किसी भी तरह से जानकारी प्राप्त करने हेतु दिए गए नंबर पर फोन करके जानकारी प्राप्त कर सकते है .
ज्योतिषाचार्य संजीत कुमार मिश्रा
ज्योतिष वास्तु एवं रत्न विशेषज्ञ
8080426594/9545290847

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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