वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी व्रत कब है? जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पारण का सही समय
Published by : Radheshyam Kushwaha Updated At : 10 Apr 2026 1:49 PM
भगवान वष्णु जी की पूजा
Varuthini Ekadashi 2026: वैशाख कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है. श्रद्धा और भक्ति से की गई श्रीहरि की आराधना से सभी पापों का नाश होकर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.
Varuthini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी और मोक्षदायक माना गया है. हर माह आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित होती है, लेकिन वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की वरुथिनी एकादशी का विशेष महत्व है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने पर हजारों यज्ञों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं. इस वर्ष तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है, इसलिए सही दिन, शुभ मुहूर्त, पारण समय और पूजा विधि जानना बेहद जरूरी है.
वरुथिनी एकादशी 2026 तिथि
महावीर पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 12 अप्रैल की रात 9 बजकर 19 मिनट से आरंभ हो रही है, जो 13 अप्रैल को सुबह 9 बजकर 05 मिनट पर समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के आधार पर वैशाख माह की पहली एकादशी यानी वरुथिनी एकादशी का व्रत 13 अप्रैल 2026 दिन सोमवार को रखा जाएगा, इस दिन धनिष्ठा नक्षत्र और शुभ योग का संयोग बन रहा है. महावीर पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल को वरुथिनी एकादशी का व्रत सबके लिए है.
नक्षत्र और शुभ योग
नक्षत्र: धनिष्ठा नक्षत्र दोपहर 12 बजकर 38 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शतभिषा नक्षत्र प्रारंभ होगा
योग: शुभ योग दोपहर 02 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, उसके बाद शुक्ल योग प्रारंभ होगा
वरुथिनी एकादशी पर शुभ योग
अभिजीत मुहूर्त: 13 अप्रैल दिन सोमवार को दोपहर 11 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03 बजकर 59 मिनट से 04 बजकर 43 मिनट तक रहेगा
वरुथिनी एकादशी 2026 पारण का समय
वरुथिनी एकादशी व्रत का पारण 14 अप्रैल 2026 को किया जाएगा, इस दिन पारण का समय सुबह में 06 बजकर 54 मिनट से लेकर 08 बजकर 31 मिनट तक है. ध्यान रहे कि हरि वासर समाप्त होने के बाद ही व्रत खोलना शास्त्रसम्मत होता है.
पंचक आरम्भ
पंचक आरम्भ: 13 अप्रैल 2026 दिन सोमवार को 03 बजकर 44 मिनट पर
पंचक अंत: 17 अप्रैल 2026 दिन शुक्रवार को 12 बजकर 02 मिनट पर
वरुथिनी एकादशी व्रत पूजन की सरल विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और स्वच्छ, पीले या सफेद वस्त्र धारण करें.
- फिर हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें.
- इसके बाद चौकी बिछाकर उस पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
- घी का दीपक जलाकर पूजा की शुरुआत करें.
- भगवान का ध्यान करते हुए उन्हें पूजा में आमंत्रित करें.
- पीले फूल, तुलसी दल, मौसमी फल और विशेष भोग अर्पित करें.
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का श्रद्धा से जाप करें.
- एकादशी व्रत कथा ध्यानपूर्वक पढ़ें या सुनें.
- पीपल और तुलसी के पौधे की पूजा करें तथा जल अर्पित करें.
- पूजा के अंत में कपूर से आरती करें और सुख-समृद्धि की कामना करें.
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By Radheshyam Kushwaha
पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.
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