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Diwali-Dhanteras से पहले दो और महत्वपूर्ण पर्व, आज संतान के लिए Ahoi Ashtami करेंगी माताएं, Rama Ekadashi धन-वैभव के लिए 11 को

Updated at : 08 Nov 2020 6:36 AM (IST)
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Jyeshtha Ekadashi 2024

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Diwali 2020, Dhanteras, Ahoi Ashtami, Rama Ekadashi, Date, Timing, Tithi, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Katha: दिवाली से पहले दो और व्रत-त्यौहार पड़ने वाले हैं. पहला 8 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को है. आपको बता दें कि दीपावली 14 नवंबर को मनायी जायेगी उससे पहले 8 नवंबर को अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2020) पूजा व 11 नवंबर को रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2020) मनायी जाएगी.

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Diwali 2020, Dhanteras, Ahoi Ashtami, Rama Ekadashi, Date, Timing, Tithi, Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Katha: दिवाली से पहले दो और व्रत-त्यौहार पड़ने वाले हैं. पहला 8 नवंबर और दूसरा 11 नवंबर को है. आपको बता दें कि दीपावली 14 नवंबर को मनायी जायेगी उससे पहले 8 नवंबर को अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2020) पूजा व 11 नवंबर को रमा एकादशी (Rama Ekadashi 2020) मनायी जाएगी.

आपको बता दें कि अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने पुत्रों की भलाई के लिए पूजा-अर्चना करती हैं. इस दिन उषाकाल से गोधूलि बेला अर्थात भोर से सांझ तक माताएं उपवास रखती हैं. करवा चौथ व्रत की तरह ही इस दिन भी माताएं जल तक ग्रहण नहीं करती और सांझ के दौरान तारों को देखने के बाद व्रत तोड़ने की परंपरा है. वहीं कुछ महिलाएं चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं. आमतौर पर यह पर्व दिवाली से 8 दिन पूर्व मनाया जाता है. इसे अहोई आठे के नाम से भी जाना जाता है. हर वर्ष यह व्रत अष्टमी तिथि माह के आठवें दिन पड़ता है.

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami 2020 Subh Muhurat) शुभ मुहूर्त

  • अहोई अष्टमी रविवार, नवम्बर 8, 2020 को

  • अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त : 17:31 से 18:50

  • अष्टमी तिथि प्रारम्भ : नवम्बर 08, 2020 को 07: 2 9 बजे

  • अष्टमी तिथि समाप्त : नवम्बर 09, 2020 को 6:50 बजे

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रमा एकादशी

दूसरा पर्व रमा एकादशी एक प्रकार की लक्ष्मी पूजा ही है. जो धन वर्षा और शुभ लाभ के लिए की जाती है. इस दिन लक्ष्मी जी के साथ विष्णु भगवान की पूजा करने की परंपरा है. दरअसल, भगवान विष्णु की पत्नी महालक्ष्मी जी का नाम रमा भी है यही कारण है कि इस एकादशी को रमा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन स्नान के बाद भगवान विष्णु और महालक्ष्मी को फल, फूल, अगरबत्ती, धूप से पूजना चाहिए साथ ही साथ उन्हें भोग लगाकर तुलसी पत्ता जरूर चढ़ाना चाहिए. वहीं, व्रत कथा भी पढ़ना चाहिए उसके अलावा घर पर इस दिन सुंदरकांड, भजन, गीता पाठ आदि भी पढ़ने से भी धन-वैभव की प्राप्ति होती है.

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Posted By: Sumit Kumar Verma

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