Tulsi Origin Story: क्यों बिना तुलसी अधूरी है विष्णु पूजा? जानिए तुलसी जी की उत्पत्ति की कथा

Published by : Shaurya Punj Updated At : 28 Jan 2026 12:33 PM

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तुलसी जी की उत्पत्ति की कहानी

Shukra Pradosh Vrat 2026: शुक्र प्रदोष व्रत में केवल भगवान शिव की ही नहीं, बल्कि माता पार्वती, माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा करना भी बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से व्रत का फल पूरा मिलता है. यह व्रत खासतौर पर वैवाहिक सुख, धन और समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है.

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रघोतम शुक्ल
पूर्व पीसीएस, लखनऊ

Tulsi Origin Story:   क्या आप जानते हैं कि तुलसी जी केवल एक पौधा नहीं, बल्कि स्वयं देवी स्वरूप हैं? उनकी उत्पत्ति वृंदा, जालंधर और शंखचूड़ जैसी रहस्यमयी कथाओं से जुड़ी है. यह कथा न केवल भक्ति का संदेश देती है, बल्कि जीवन और मोक्ष का रहस्य भी बताती है।

जालंधर दैत्य और उसकी उत्पत्ति

प्राचीन काल में जालंधर नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली दैत्य हुआ, जिसने अपने पराक्रम से देवताओं को भयभीत कर दिया था। उसकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से मानी जाती है. देवी लक्ष्मी ने उसे अपना भाई मानते हुए भगवान विष्णु से यह वचन ले लिया था कि वे उसका वध नहीं करेंगे.

वृंदा की पतिव्रत शक्ति क्यों थी अजेय

जालंधर की पत्नी वृंदा अत्यंत पतिव्रता थी. उसकी पतिव्रत शक्ति के कारण जालंधर अजेय बना हुआ था. भगवान शिव ने उससे लंबा युद्ध किया, लेकिन वृंदा की शक्ति के कारण वे भी उसे परास्त नहीं कर सके। अंततः देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु को लीला करनी पड़ी. इस लीला के परिणामस्वरूप जालंधर का अंत हुआ, लेकिन अपने पति के वियोग में वृंदा सती हो गईं.

विष्णु की लीला और जालंधर का अंत

माना जाता है कि यह घटना आज के जालंधर नगर में घटी थी. यहां के कोट किशनचंद्र क्षेत्र में आज भी वृंदा देवी का मंदिर स्थित है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, वृंदा की चिता की राख से तुलसी जी का जन्म हुआ.

तुलसी जी का शंखचूड़ से विवाह

तुलसी जी ने बाद में शंखचूड़ नामक दैत्य से विवाह किया, जो अत्यंत शक्तिशाली था और पूर्व जन्म में भगवान कृष्ण का द्वारपाल रह चुका था. उसे भगवान कृष्ण से प्राप्त दिव्य कवच और तुलसी जी के पतिव्रत धर्म के कारण कोई पराजित नहीं कर सकता था. जब उसका अत्याचार बढ़ा, तब भगवान विष्णु ने ब्राह्मण रूप धारण कर उससे कवच दान में ले लिया और लीला के माध्यम से उसका अंत किया.

तुलसी, शालिग्राम और मोक्ष का संबंध

जब तुलसी जी को सत्य का ज्ञान हुआ, तो वे अत्यंत व्यथित हो गईं. तभी भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें संसार की नश्वरता का उपदेश दिया. उन्होंने वरदान दिया कि तुलसी दिव्य रूप में सदैव बैकुंठ में भगवान विष्णु के साथ निवास करेंगी, पृथ्वी पर गंडकी नदी के रूप में प्रवाहित होंगी और तुलसी वृक्ष बनकर पूजी जाएंगी.

गंडकी नदी से प्राप्त शालिग्राम को भगवान विष्णु का स्वरूप माना गया और तुलसी के बिना उनकी पूजा अधूरी मानी गई. इसी कारण तुलसी जी को विष्णु की प्रिया, पूज्य और मोक्षदायिनी कहा गया.

तुलसी जी का धार्मिक महत्व

  • तुलसी जी को देवी लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है, इसलिए उनका पूजन घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि लाता है.
  • तुलसी का स्पर्श और दर्शन मन, शरीर और आत्मा—तीनों को शुद्ध करने वाला माना गया है.

 तुलसी को विष्णु की प्रिया क्यों कहा गया

  • पुराणों के अनुसार तुलसी जी ने विष्णु भक्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया, इसलिए भगवान विष्णु ने उन्हें अपनी प्रिया स्वीकार किया.
  • विष्णु जी ने वरदान दिया कि उनके सभी पूजन, भोग और अनुष्ठान तुलसी के बिना पूर्ण नहीं माने जाएंगे.

 बिना तुलसी शालिग्राम पूजा क्यों अधूरी

  • शालिग्राम भगवान विष्णु का स्वरूप हैं और तुलसी उनकी प्रिय हैं, इसलिए दोनों का पूजन साथ-साथ अनिवार्य माना गया है.
  • शास्त्रों में कहा गया है कि बिना तुलसी अर्पण किए शालिग्राम की पूजा फलदायी नहीं होती.

 तुलसी पूजन से मोक्ष का मार्ग कैसे खुलता है

तुलसी पूजन से व्यक्ति के पाप कर्म नष्ट होते हैं और भक्ति भाव मजबूत होता है, जो मोक्ष का मूल आधार है.

तुलसी को विष्णु की प्रिया क्यों कहा गया?

तुलसी जी ने विष्णु भक्ति में स्वयं को समर्पित किया, इसलिए उन्हें भगवान विष्णु ने अपनी प्रिया स्वीकार किया.

बिना तुलसी शालिग्राम पूजा क्यों अधूरी?

शालिग्राम और तुलसी का पूजन साथ में आवश्यक है, वरना पूजा फलदायी नहीं होती.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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