Temple Tradition: दर्शन के बाद मंदिर की पैड़ी पर क्यों बैठते थे हमारे बुजुर्ग?
Published by : Shaurya Punj Updated At : 21 Nov 2025 12:58 PM
मंदिर की पौड़ी पर बैठने की ये है परंपरा
Temple Tradition: मंदिर में दर्शन के बाद पैड़ी पर बैठने की परंपरा को लोग अब साधारण आदत मानते हैं, जबकि इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक उद्देश्य जुड़ा है. बुजुर्ग बताते हैं कि पैड़ी पर बैठकर एक विशिष्ट श्लोक का उच्चारण करना चाहिए, जो जीवन, मृत्यु और भगवान के सानिध्य के महत्वपूर्ण संदेश देता है.
Temple Tradition: बड़े बुजुर्गों का कहना है कि जब भी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं, तो दर्शन करने के बाद बाहर आकर कुछ समय मंदिर की पैड़ी या ऑटले पर अवश्य बैठना चाहिए. आजकल लोग पैड़ी पर बैठकर दुनिया भर की बातें कर लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह परंपरा एक विशेष उद्देश्य के लिए बनाई गई थी.
पैड़ी पर बैठकर क्यों बोलते थे एक श्लोक?
पुराने समय में मंदिर की पैड़ी पर बैठकर एक श्लोक बोला जाता था, जिसे लोग अब भूलते जा रहे हैं. यह श्लोक न केवल आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि जीवन के प्रति एक सुंदर दृष्टिकोण भी देता है.
वह श्लोक है
अनायासेन मरणम्
बिना देन्येन जीवनम्
देहान्ते तव सानिध्यम्
देहि मे परमेश्वरम्
श्लोक का अर्थ और गहरा संदेश
अनायासेन मरणम्
अर्थ– हमारी मृत्यु बिना किसी कष्ट के हो. हम कभी बिस्तर पर पड़े-पड़े दुख झेलकर मृत्यु को प्राप्त न हों. चलते-फिरते ही शरीर का त्याग हो जाए.
बिना देन्येन जीवनम्
अर्थ– जीवन में कभी किसी पर आश्रित न होना पड़े. न लकवे की स्थिति आए, न किसी पर बोझ बनने की स्थिति. भगवान की कृपा से सम्मानपूर्वक जीवन बीते.
देहान्ते तव सानिध्यम
अर्थ– मृत्यु के समय भगवान का सानिध्य मिले. जैसी भीष्म पितामह जब प्राण त्याग रहे थे, तब स्वयं भगवान उनके सामने उपस्थित थे.
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देहि मे परमेश्वरम्
अर्थ– हे प्रभु, हमें ऐसा ही शुभ और पवित्र जीवन तथा मृत्यु का वरदान दें.
प्रार्थना और याचना में अंतर
प्रार्थना भगवान से श्रेष्ठ, आध्यात्मिक निवेदन है. इसमें सांसारिक वस्तुएं—गाड़ी, पैसा, घर, नौकरी—नहीं मांगी जातीं. ये सब तो भगवान आपकी पात्रता के अनुसार स्वयं देते हैं.
याचना केवल सांसारिक पदार्थों के लिए की जाती है, जबकि प्रार्थना जीवन की उच्चतर इच्छा का निवेदन है.
मंदिर में आंखें क्यों न बंद करें
मंदिर में प्रवेश करते समय और दर्शन करते समय आंखें खुली रखनी चाहिए. भगवान के स्वरूप, चरण, मुख़, श्रृंगार—सबको ध्यान से निहारना चाहिए. दर्शन करने के बाद पैड़ी पर बैठकर आंखें बंद करें और जो रूप देखा है, उसका मन में ध्यान करें. अगर ध्यान में स्वरूप न आए तो पुनः दर्शन करें. यही शास्त्र का निर्देश है.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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