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Shani Dev Ki Puja Vidhi: शनि की छाया से छुटकारा पाना चाहते हैं तो शनिवार के दिन इस विधि से करें पूजा, जानें क्या है मान्यता...

Updated at : 05 Dec 2020 9:31 AM (IST)
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Shani Dev Ki Puja Vidhi: शनि की छाया से छुटकारा पाना चाहते हैं तो शनिवार के दिन इस विधि से करें पूजा, जानें क्या है मान्यता...

Shani Dev Ki Puja Vidhi: आज शनिवार है. इस दिन शनि देव की पूजा करनी चाहिए. क्योंकि शनि देवता को न्याय का देवता कहा जाता है. मान्यता है कि वह सभी के कर्मों का फल देते हैं. कोई भी बुरा काम उनसे छिप नहीं सकता है, शनिदेव हर एक बुरे काम का फल मनुष्य को जरूर देते हैं.

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Shani Dev Ki Puja Vidhi: आज शनिवार है. इस दिन शनि देव की पूजा करनी चाहिए. क्योंकि शनि देवता को न्याय का देवता कहा जाता है. मान्यता है कि वह सभी के कर्मों का फल देते हैं. कोई भी बुरा काम उनसे छिप नहीं सकता है, शनिदेव हर एक बुरे काम का फल मनुष्य को जरूर देते हैं. जो गलती जाने और अंजाने में हुई होती है उस गलतियों पर शनिदेव अपनी नजर रखते हैं. इसीलिए उनकी पूजा का बहुत महत्व होता है.

मान्यता है कि हर शनिवार शनि देवता कि पूजा करने पर शनि देवता खुश होते है. मान्यता है कि अगर पूजा सही तरीके से की जाए तो इससे शनिदेव की असीम कृपा मिलती है और ग्रहों की दशा भी सुधरती है. यहां जानिए कि हर शनिवार शनिदेव की पूजा कैसे की जाती है…

शनिवार के दिन इस तरह करें पूजा

शनिवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए. फिर स्नानादि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ कपड़ें पहन लें. फिर पीपल के पेड़ पर जल अर्पण करें. फिर शनि देवता की मूर्ति लें. यह लोहे से बनी हो तो बेहतर होगा. इस मूर्ति को पंचामृत से स्नान कराएं. अब चावलों के चौबीस दल बनाएं और इसी पर मूर्ति को स्थापित करें. इसके बाद काले तिल, फूल, धूप, काला वस्त्र व तेल आदि से शनिदेव की पूजा-अर्चना करें. शनिदेव की पूजा के दौरान शनिदेव के 10 नामों कोणस्थ, कृष्ण, पिप्पला, सौरि, यम, पिंगलो, रोद्रोतको, बभ्रु, मंद, शनैश्चर का उच्चारण करें. इसके बाद पीपल के वृक्ष के तने पर सूत के धागे से 7 परिक्रमा करें. फिर शनिदेव के मंत्र का जाप करें.

पूजा के बाद यह आरती जरूर पढ़े

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

जय जय श्री शनि देव….

श्याम अंग वक्र-दृ‍ष्टि चतुर्भुजा धारी।

नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

जय जय श्री शनि देव….

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

जय जय श्री शनि देव….

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

जय जय श्री शनि देव….

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

News Posted by : Radheshyam kushwaha

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