Unlock-1: 08 जून से खुलेगा धार्मिक स्थल, जानिए मंदिर में प्रवेश करने से पहले इन नियमों का करना होगा पालन

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08 जून से पूरी तरह से भारत को अनलॉक करने की तैयारी चल रही है. फिलहाल देश में लॉकडाउन 05 लागू है. लॉकडाउन 05 में धार्मिक स्थल को कुछ नियमों के तहत खोलने की तैयारी शुरू हो गई है. जिसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों को लेकर गाइडलाइन जारी की है.

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08 जून से पूरी तरह से भारत को अनलॉक करने की तैयारी चल रही है. फिलहाल देश में लॉकडाउन 05 लागू है. लॉकडाउन 05 में धार्मिक स्थल को कुछ नियमों के तहत खोलने की तैयारी शुरू हो गई है. जिसके लिए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों को लेकर गाइडलाइन जारी की है. जिसमें कहा गया है कि धार्मिक स्थल में घंटी बजाना, मूर्ति छूना मना होगा. मंदिर परिसर में प्रवेश करने से पहले सभी भक्तों को अपने हाथ और पैरों को साबुन से धोना होगा. प्रवेश द्वार पर ही शरीर का तापमान चेक किया जाएगा. जिसके आधार पर ही मंदिर में प्रवेश कर पाएंगे. मंदिर में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश करने दी जाएगी जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं मिलेगा, साथ ही बिना फेस मास्क पहने लोगों का प्रवेश पी पूरी तरह से वर्जित किया गया है.

मंदिर परिसर के बाहर और अंदर लाइन खींचकर रखें. जिससे कतार में लगने वाले लोग एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाकर रख सकें.

– मंदिर परिसर में प्रवेश और बाहर जाने वाले लोगों के लिए अलग-अलग द्वार का प्रयोग करना होगा.

– प्रवेश के लिए लगी लाइन में कम से कम 6 फीट की दूरी बनाकर ही मंदिर में प्रवेश करना होगा.

– प्रतीक्षा स्थल में बैठने के लिए जो व्यवस्था बनाई जाएगी उसमें भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना होगा

– एसी चलाने के लिए सीपीडब्ल्यूडी की गाइडलाइन का पालन करना होगा. तापमान 24 से 30 डिग्री रखना होगा.

– आद्रता का रेंज 40 से 70 के बीच रखना होगा. इसके अलावा कमरे में वेंटिलेशन की व्यवस्था भी रखनी होगी ताकी हवा हमेशा साफ होती रहे.

– मंदिर परिसर में थूकने पर पूरी तरह से प्रतिबंध है. बड़ी संख्या में लोगों का जुटना मना है.

– धार्मिक स्थलों के अंदर मूर्तियों और पवित्र किताबों को छूने की आजादी नहीं मिलेगी.

– समूह में गाना-बजाना नहीं करना होगा. रिकॉर्डेड धनु या गानें बजाएं जा सकते हैं.

– कोरोना से जुड़ी जानकारी वाले पोस्टर, बैनर धार्मिक स्थल परिसर में लगाने होंगे. वीडियो भी चलाना होगा.

– जूते, चप्पल श्रद्धालुओं को खुद की गाड़ी में उतारना होगा. अगर ऐसी व्यवस्था नहीं है तो परिसर से दूर खुद की निगरानी में रखना होगा.

– मंदिर में प्रवेश करने के दौरान सोशल डिस्टेसिंग का ख्याल रखना होगा. वहीं, पार्किंग मैदान में क्राउड मैनेजमेंट करें.

– मंदिर परिसर के बाहर की दुकानों, स्टॉल, कैफेटेरिया में भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का हमेशा पालन करना होगा.

– एक-दूसरे को छूना नहीं है. एक चटाई पर ज्यादा लोगों को बैठने की मनाही है. हर किसी को खुद की चटाई साथ ले जानी होगी.

– मंदिर परिसर में प्रसाद वितरण, श्रद्धालुओं पर पानी का छिड़काव करने पर प्रतिबंध है. हालांकि लंगर, सामुदायिक रसोंई या अन्न दान कर सकते हैं. इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा.

– धार्मिक स्थल में समय-समय पर सैनिटाइजेशन करना जरूरी होगा, जहां हाथ-पांव धोए जा रहे हैं, बाथरूम और शौचालय में विशेष ध्यान होगा. फेस मास्क, ग्लोव्स को सही तरीके से नष्ट करने की सुविधा उपलब्ध कराना होगा.

– मंदिर परिसर में अगर किसी भक्त में कोरोना का लक्षण पाया जाएगा तो तुरंत इसकी सूचना जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी.

– मंदिर परिसर में जिस जगह पर संक्रमित पाया जाएगा वो वहां पर मौजूद लोगों को आइसोलेट होना होगा.

– संदिग्ध की जांच के दौरान उसके आस-पास के लोगों को खुद का फेस कवर रखना होगा और उससे पर्याप्त दूरी बनाए रखना होगा.

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Radheshyam Kushwaha

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

राधेश्याम कुशवाहा ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से MJ (मास्टर ऑफ जर्नलिज्म) की शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत भोपाल से प्रकाशित राज एक्सप्रेस समाचार पत्र से की. इसके बाद उन्होंने समय जगत, राजस्थान पत्रिका और हिंदुस्तान जैसे प्रतिष्ठित समाचार संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं. वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म, अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 13 वर्षों का अनुभव रखने वाले राधेश्याम कुशवाहा को ज्योतिष शास्त्र, पंचांग गणना, ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, व्रत-त्योहारों की तिथियों तथा शुभ मुहूर्तों का गहन ज्ञान है. अपनी विशेषज्ञता के आधार पर वे धर्म-अध्यात्म और राशिफल से जुड़ी सटीक, तथ्यपरक एवं विश्वसनीय खबरें लिखते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि है. इसके अलावा राजनीति, अपराध और प्रेरणादायक (पॉजिटिव) विषयों पर लेखन में भी उनकी गहरी रुचि है.

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