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Premanand Ji Maharaj Tips : घर में कलह क्यों होता है? प्रेमानंद जी महाराज का समाधान

Updated at : 29 Jul 2025 11:14 PM (IST)
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Premanand Ji Maharaj

प्रेमानंद जी महाराज

Premanand Ji Maharaj Tips : इन उपायों को श्रद्धा से अपनाया जाए, तो किसी भी घर में प्रेम, सुख और शांति स्थायी रूप से वास कर सकती है.

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Premanand Ji Maharaj Tips : आज के समय में बहुत से घरों में अकारण विवाद, मानसिक अशांति और पारिवारिक तनाव देखने को मिलते हैं. सुख-सुविधा और भौतिक संसाधनों के बावजूद भी जब घर में शांति न हो, तो उसका कारण केवल बाहरी परिस्थिति नहीं, बल्कि अंदरूनी ऊर्जा और सोच भी होती है. प्रेमानंद जी महाराज, जो कि भक्ति और संत समर्पण के प्रतीक हैं, उन्होंने अपने प्रवचनों में बताया है कि घर में कलह के पीछे आध्यात्मिक और मानसिक कारण होते हैं, और इनके सरल समाधान भी संभव हैं. आइए जानें प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार प्रमुख कारण और उनके समाधान:-

– ईश्वर भक्ति की कमी

महाराज जी कहते हैं कि जब घर में सत्संग, नामस्मरण और पूजा-पाठ नहीं होता, तो वहां नेगेटिव एनर्जी का वास हो जाता है. इससे परिवार के सदस्य चिड़चिड़े, क्रोधित और असंतुष्ट रहने लगते हैं.
समाधान: रोज सुबह-शाम घर में भगवन्नाम का संकीर्तन करें. कम से कम 15 मिनट “राम-राम” या “हरे कृष्ण” नाम का जप करें. इससे वातावरण शांत और पवित्र होता है.

– आपसी अहंकार और मान-अपमान की भावना

  • अहंकार पारिवारिक प्रेम का सबसे बड़ा शत्रु है. जब कोई भी सदस्य स्वयं को श्रेष्ठ समझने लगे और दूसरों को तुच्छ, तब कलह उत्पन्न होता है.
  • समाधान: महाराज जी कहते हैं, “जो झुक गया, वही ऊंचा हुआ” परिवार में प्रेम बनाए रखने के लिए नम्रता अपनाएं और क्षमा करने की भावना रखें.

– नकारात्मक शब्दों का प्रयोग

  • जब घर में अपशब्द, कटु वाणी और ताने दिए जाते हैं, तो वातावरण विषैला हो जाता है. शब्दों का कंपन पूरे घर की ऊर्जा को प्रभावित करता है.
  • समाधान: महाराज जी की सलाह है कि मीठा बोलना एक तप है. घर में हर सदस्य को चाहिए कि प्रेमपूर्वक संवाद करें, चाहे स्थिति कैसी भी हो.

– पवित्रता और स्वच्छता की उपेक्षा

  • घर में गंदगी, टूटे फर्नीचर, और रसोई या पूजा स्थान की अव्यवस्था भी कलह को न्योता देती है.
  • समाधान: घर को साफ, सुव्यवस्थित और सुगंधित रखें। विशेषकर रसोई और पूजा घर को रोज साफ करें. जहां स्वच्छता होती है, वहां लक्ष्मी और शांति दोनों निवास करती हैं.

– ध्यान और संयम की कमी

  • मन और वाणी पर नियंत्रण न होने से अनावश्यक वाद-विवाद होते हैं. संयमहीन जीवनशैली से मानसिक अशांति बढ़ती है.
  • समाधान: महाराज जी ध्यान और ब्रह्ममुहूर्त में उठकर मौन साधना की सलाह देते है. इससे मन शांत होता है और परिवार में सामंजस्य बना रहता है.

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प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार, घर को स्वर्ग बनाने के लिए बाहरी साधनों से अधिक जरूरी है—ईश्वर भक्ति, नम्रता, प्रेम और पवित्रता. यदि इन उपायों को श्रद्धा से अपनाया जाए, तो किसी भी घर में प्रेम, सुख और शांति स्थायी रूप से वास कर सकती है.

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Ashi Goyal

लेखक के बारे में

By Ashi Goyal

Ashi Goyal is a contributor at Prabhat Khabar.

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