रवि प्रदोष व्रत कल, पूजा सामग्री से लेकर पूजा विधि तक, जानें व्रत से जुड़ी हर जरूरी जानकारी

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रवि प्रदोष व्रत

रवि प्रदोष व्रत

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। आषाढ़ मास में यह व्रत 26 जुलाई, रविवार को पड़ रहा है, जिसे रवि प्रदोष व्रत कहते हैं। जानें इस व्रत की संपूर्ण पूजा सामग्री, विधि और महत्व.

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Ravi Pradosh Vrat: हिंदू धर्म में प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत रखा जाता है. आषाढ़ मास में यह व्रत 26 जुलाई, रविवार को रखा जाएगा. जब प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से न केवल भगवान शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है, बल्कि सूर्य देव का भी आशीर्वाद मिलता है. यदि आप भी यह व्रत रखने का विचार कर रहे हैं, तो पहले जान लें कि इस पूजा में किन-किन सामग्रियों की आवश्यकता होती है.

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रवि प्रदोष व्रत पूजा सामग्री

  • शुद्ध जल
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • दही
  • देसी घी
  • शहद
  • ताजे बेलपत्र
  • धतूरा
  • भांग
  • आक के फूल
  • सफेद पुष्प
  • सफेद चंदन
  • भस्म
  • अक्षत
  • अष्टगंध
  • रोली
  • कलावा
  • गाय के घी का दीपक
  • रुई की बाती
  • धूपबत्ती
  • कपूर
  • फल
  • मिठाई

प्रदोष काल का महत्व

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल, यानी सूर्यास्त के बाद के शुभ समय में करने का विधान है. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं. इस समय की गई आराधना से महादेव शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं.

रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि

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सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें तथा प्रदोष व्रत का संकल्प लें. घर के मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करें और पूरे दिन व्रत का पालन करें.

शाम के समय पुनः स्नान करके उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें. शिवलिंग का सबसे पहले शुद्ध जल से, फिर पंचामृत से और अंत में गंगाजल से अभिषेक करें. इसके बाद भगवान शिव को चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल और अक्षत अर्पित करें.

अब भगवान के समक्ष धूप और घी का दीपक जलाएं. इसके बाद फल और मिठाई का भोग लगाएं तथा भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. फिर रवि प्रदोष व्रत की कथा और शिव चालीसा का पाठ करें. अंत में घी के दीपक से भगवान शिव की आरती करें और पूजा के दौरान अनजाने में हुई भूलों के लिए क्षमा याचना करें.

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नेहा कुमारी

लेखक के बारे में

By नेहा कुमारी

नेहा कुमारी वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में धर्म बीट पर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. वह व्रत-त्योहार, राशिफल, पंचांग, ज्योतिष, शुभ मुहूर्त, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेख लिखती हैं. उन्होंने वेस्ट बंगाल स्टेट यूनिवर्सिटी से मास्टर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की डिग्री प्राप्त की है.

डिजिटल पत्रकारिता में उन्होंने धर्म, ज्योतिष और भारतीय परंपराओं से जुड़े विषयों पर विशेष अनुभव हासिल किया है. उनका उद्देश्य पाठकों तक सरल भाषा में सटीक, विश्वसनीय और उपयोगी जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को आसानी से समझ सकें.

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