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Papmochani Ekadashi 2020: पाप मुक्ति के लिए कल रखी जाएगी पापमोचनी एकादशी व्रत , जानें पूजन विधि और पारण का समय

By RaviKumar Verma
Updated Date

हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार एक साल में कुल 24 एकादशी ekadashi आते हैं ,जब मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है. इन सभी एकादशी ekadashi in 2020 में पापमोचनी एकादशी Papmochani ekadashi 2020 का महत्व अधिक माना जाता है. चैत्र माह के क‍ृष्ण पक्ष की एकादशी को पापमोचनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है. यह हिंदू कैलेंड़र के अनुसार हिन्दू वर्ष की अंतिम एकादशी होती हैं.

Ekadashi in march 2020

कब है 2020 की पापमोचनी एकादशी :

इस साल पापमोचनी एकादशी 19 मार्च 2020 को गुरूवार के दिन है. हिन्दु धर्म के अनुसार हर एक इंसान से जाने अंजाने में पाप हो ही जाता है और ईश्वरीय विधान के अनुसार पापमोचनी एकादशी का व्रत रखकर पाप के दंड से बचा जा सकता हैं. इसे पाप नष्ट करने वाली एकादशी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की उपासना की जाती है.

पौराणिक संदर्भ :-

हिंदु धर्म में एकादशी व्रत Eadashi 2020 की काफी मान्यता रही है. पुराणों के अनुसार स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसे अर्जुन से कहा है कि चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पाप मोचिनी है अर्थात पाप को नष्ट करने वाली है. पापमोचनी एकादशी papmochani ekadashi 2020 व्रत के बारे में भविष्योत्तर पुराण में विस्तार से बताया गया है. इसलिए लोगों की इसमें काफी आस्था रहती है.

ekadashi in march 2020

क्यों खास है 2020 की पापमोचनी एकादशी -

इस साल 2020 की पापमोचनी एकादशी papmochani ekadashi 2020 बेहद खास है .इसका कारण यह है कि इस साल की एकादशी गुरुवार के दिन पड‍़ रही है. और गुरुवार के दिन को भगवान विष्णु का ही दिन माना जाता है. इसलिए इस साल पापमोचनी एकादशी गुरुवार के दिन पड़ने से इसका महत्व और बढ़ जाता है.

पापमोचनी एकादशी व्रत पूजन विधि-

-पापमोचनी एकादशी papmochani ekadashi march 2020 व्रत में भगवान विष्णु के चतुर्भुज रूप की पूजा की जाती है.

-व्रत के दिन सूर्योदय के समय जगें और स्नान करना चाहिए.

-भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने बैठकर एकादशी व्रत कथा का पाठ करना चाहिए.

-दिन में भगवान विष्णु की पूजा के बाद रात्रि में श्री विष्णु का पाठ करते हुए जागरण करना चाहिए.

-निराहार रहकर भजन-कीर्तन करते हुए रात्रि जागरण करने से काफी पुण्य मिलता है.

-एकादशी के अगले दिन द्वादशी तिथि के प्रात:काल में स्नान कर, भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करनी चाहिए.

-उसके बाद ब्राह्माणों को भोजन कराकर यथासंभव दक्षिणा देकर इस व्रत का समापन करना चाहिए.

-इन सभी कामों को संपन्न करने के बाद ही व्रती को भोजन करना चाहिए.

कब करें व्रत का पारण -

एकादशी papmochani ekadashi 2020 के व्रत को समाप्त करने को पारण कहा जाता है. एकादशी व्रत का पारण एकादशी के अगले दिन सूर्योदय के बाद किया जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना बेहद आवश्यक है. द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है.व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को अपना व्रत मध्याह्न के दौरान नही तोड़ना चाहिए . कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल में पारण नहीं कर सके तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए.

papmochani ekadashi march 2020 व्रत पारण का समय -

पारण (व्रत तोड़ने का) समय सूर्योदय के बाद दोपहर 01:41 PM से 04:07 PM तक है, इसी के बीच व्रती को पारण करना चाहिए.

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