नाग पंचमी के दिन क्यों पीटी जाती है 'गुड़िया', इस परंपरा का रहस्य क्या है

Updated at : 24 Jul 2020 6:07 PM (IST)
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नाग पंचमी के दिन क्यों पीटी जाती है 'गुड़िया',  इस परंपरा का रहस्य क्या है

घर की महिलायें पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाती है और नागपंचमी वाले दिन उन्हें चौराहे पर रख आती हैं. इसके बाद मुहल्ले अथवा गांव के लड़के लाठी डंडों से उस कपड़े की गुडि़या को पीटते हैं.

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रांची: सावन महीने की पंचमी को नागपंचमी कहा जाता है. इस दिन नागों की पूजा होती है. कहा जाता है कि पंचमी के दिन नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है.

इन तरीकों से मनाई जाती है नागपंचमी

देश के अलग-अलग हिस्सों में नागपंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है. आमतौर पर इस दिन नागों को दूध लावा का भोग लगाया जाता है. घरों में नाग की मूर्ति या फिर उनकी चित्र बनाकर उनका टीका किया जाता है. लेकिन यूपी में नागपंचमी के दिन एक दिलचस्प और अजीब तरीका आजमाया जाता है.

यूपी में गुड़िया को पीटने की है परंपरा

यूपी के कुछ जिलों में नागपंचमी के दिन गुड़िया को पीटे जाने की प्रथा सदियों से चली आ रही है. इस दिन घर की महिलायें पुराने कपड़ों से गुड़िया बनाती है और नागपंचमी वाले दिन उन्हें चौराहे पर रख आती हैं. इसके बाद मुहल्ले अथवा गांव के लड़के लाठी डंडों से उस कपड़े की गुडि़या को पीटते हैं.

इस प्रथा के पीछे क्या कारण है. लोग ऐसा क्यों करते हैं. इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती. लोगों का ये मानना है कि भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं से गांव की रक्षा के लिये लोग ऐसा करते हैं. हालांकि, प्रभात खबर इस बात की पुष्टि नहीं करता और ना ही इसे बढ़ावा देता है.

मूर्तियां बनाकर की जाती है नागों की पूजा

नागपंचमी मनाने के कई और भी अलग-अलग तरीके हैं जो काफी दिलचस्प हैं. उड़ीसा और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में नागपंचमी के दिन नाग की मूर्तियां बनाई जाती हैं. उनका टीका किया जाता है. सपेरे नाग लेकर आते हैं और महिलायें उन्हें दूध-लावा का भोग लगाती हैं. हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि नागों को दूध नहीं पिलाया जाना चाहिये.

झारखंड-बिहार में ऐसे मनाई जाती है पंचमी

झारखंड-बिहार के कई जिलों में बकायदा मेला लगता है. यहां मेले में अलग-अलग तरह के सापों का खेल होता है. बड़ी संख्या में लोग इन्हें देखने के लिये जुटते हैं और उनकी पूजा करते हैं. यहां महिलायें, अपने घर के दरवाजे पर गोबर और मिट्टी की सहायता से नाग की कलाकृतियां बनाती है. सूख जाने पर इनका टीका करती हैं. फिर विधि-विधान से इनकी पूजा की जाती है.

पश्चिम बंगाल और झारखंड के सीमावर्ती जिलों में नागपंचमी के दिन नृत्य नाटिका होती है. इसमें राजा परीक्षित को नागराज तक्षक द्वारा काट लिये जाने और फिर जनमेयजय द्वारा इसका बदला लेने की कहानी दिखाई जाती है. ये अधिकांश बांग्ला भाषा में किया जाता है. लोग बड़ी संख्या में ये नाटक देखने के लिये इकट्ठा होते हैं.

Posted By- Suraj Thakur

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