मेष संक्रांति पर भारत में रंग-बिरंगे त्योहार, जानें बैसाखी से बिहू तक की परंपराएं
Published by : Shaurya Punj Updated At : 14 Apr 2026 7:38 AM
मेष संक्रांति का स्वागत, खुशियों और नई शुरुआत का उत्सव
Mesh Sankranti 2026: मेष संक्रांति पर सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ सौर नववर्ष शुरू होता है. देशभर में बैसाखी, बिहू, सतुआन जैसे पर्व अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाए जाते हैं.
Mesh Sankranti 2026: हिंदू धर्म में मेष संक्रांति का अत्यंत विशेष महत्व माना गया है. इस दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ज्योतिष में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जाता है. इसी के साथ सौर नववर्ष की शुरुआत भी होती है. भारत के विभिन्न राज्यों में इस दिन को अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है. आइए जानते हैं, अलग-अलग राज्यों में इस पर्व का स्वरूप कैसा होता है—
पंजाब में बैसाखी
पंजाब में मेष संक्रांति को बैसाखी के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है. यह पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई से जुड़ा हुआ है. रबी की फसल पकने की खुशी में किसान इस दिन उत्सव मनाते हैं. बैसाखी का धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि 1699 में गुरु गोबिंद सिंह जी ने इसी दिन खालसा पंथ की स्थापना की थी. लोग गुरुद्वारों में मत्था टेकते हैं, लंगर का आयोजन होता है और भांगड़ा-गिद्धा जैसे पारंपरिक नृत्य किए जाते हैं. यह दिन खुशहाली और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है.
बिहार में सतुआन
बिहार में इस पर्व को सतुआन या सतुआनी कहा जाता है. यह पर्व गर्मी के आगमन और स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है. इस दिन लोग सत्तू (भुने चने का आटा) का सेवन करते हैं, जो शरीर को ठंडक और ऊर्जा देता है. पारंपरिक रूप से लोग सत्तू, गुड़, आम और ठंडे पेय का सेवन करते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ मनाया जाता है.
झारखंड में बिसुआ
झारखंड में मेष संक्रांति को बिसुआ या बिसु पर्व के रूप में मनाया जाता है. बिसुआ पर्व रबी फसल की कटाई और नए कृषि वर्ष के आगमन का प्रतीक है. इस दिन किसान नई फसल के लिए आभार व्यक्त करते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं. परंपरा अनुसार सत्तू, कच्चा आम (टिकोला) और शीतल जल का विशेष महत्व होता है. लोग इनका सेवन करने के साथ अपने कुलदेवताओं को अर्पित भी करते हैं. मान्यता है कि इससे घर में सुख, शांति और खुशहाली बनी रहती है. यह पर्व सादगी, प्रकृति के प्रति सम्मान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश देता है.
पश्चिम बंगाल में पोइला बोइशाख
पश्चिम बंगाल में इस दिन को पोइला बोइशाख यानी बंगाली नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. यह व्यापारियों के लिए भी खास दिन होता है, क्योंकि वे इस दिन ‘हल खाता’ की शुरुआत करते हैं. लोग नए कपड़े पहनते हैं, घरों की सजावट करते हैं और मिठाइयों का आनंद लेते हैं. सांस्कृतिक कार्यक्रमों, गीत-संगीत और पारंपरिक भोजन के साथ यह दिन उत्साह से भर जाता है.
असम में बिहू
असम में मेष संक्रांति के समय रोंगाली बिहू या बोहाग बिहू मनाया जाता है, जो असमिया नववर्ष का प्रतीक है. यह पर्व वसंत ऋतु और नई फसल के स्वागत का उत्सव है. लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं, बिहू नृत्य करते हैं और ढोल-पीपा की धुनों पर झूमते हैं. यह पर्व प्रेम, उल्लास और नई शुरुआत का संदेश देता है.
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केरल में विशु
दक्षिण भारत के केरल राज्य में इस दिन को विशु के रूप में मनाया जाता है. विशु का सबसे महत्वपूर्ण भाग ‘विशुक्कनी’ होता है, जिसमें भगवान कृष्ण की मूर्ति के साथ फल, फूल, चावल और सोना सजाया जाता है. मान्यता है कि सुबह सबसे पहले इस दृश्य को देखने से पूरे वर्ष समृद्धि आती है. लोग नए कपड़े पहनते हैं, आतिशबाजी करते हैं और एक-दूसरे को उपहार देते हैं.
तमिलनाडु में पुथंडु
तमिलनाडु में मेष संक्रांति को पुथंडु या तमिल नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. इस दिन घरों के बाहर सुंदर कोलम (रंगोली) बनाई जाती है और मंदिरों में विशेष पूजा होती है. लोग अपने परिवार के साथ पारंपरिक भोजन का आनंद लेते हैं और नए वर्ष के लिए शुभकामनाएं देते हैं. यह दिन नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है.
ओडिशा में महाविषुव संक्रांति
ओडिशा में इस पर्व को महाविषुव संक्रांति या पना संक्रांति कहा जाता है. यह ओड़िया नववर्ष की शुरुआत का दिन होता है. इस दिन ‘पना’ नामक विशेष पेय बनाया जाता है, जिसमें बेल का शरबत, गुड़ और फल मिलाए जाते हैं. लोग मंदिरों में पूजा करते हैं और दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है. यह पर्व शांति, समृद्धि और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है.
इस प्रकार, मेष संक्रांति केवल एक खगोलीय घटना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता का सुंदर प्रतीक है. अलग-अलग राज्यों में भले ही इसके नाम और परंपराएं अलग हों, लेकिन इसका मूल भाव एक ही है—नई शुरुआत, समृद्धि और खुशहाली.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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