Marasilli Pahad: कुंड में निवास करते हैं दर्जनों सांप, भक्तों को देते हैं दर्शन

Author :Shaurya Punj
Published by :Shaurya Punj
Updated at :14 Jul 2025 10:45 AM
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Marasilli Pahad in sawan significance

Marasilli Pahad in sawan significance

Marasilli Pahad: झारखंड का यह पवित्र स्थल धार्मिक आस्था का केंद्र है, जहां महर्षि वाल्मीकि ने तपस्या की थी. मान्यता है कि यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था. रहस्यमय जलकुंड, सांपों की उपस्थिति और भक्तों की भीड़ इसे विशेष बनाती है. सावन में यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है.

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राजेश वर्मा
नामकुम

मान्यता है कि रांची के नामकुम के राजाउलातू स्थित मरासिल्ली बाचा भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. मनोरम वादियों के बीच मरासित्ल्ली बाबा को जलाभिषेक करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रखंड मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर राजाउलालू पंचायत के उनीडीह गांव में स्थित 230 एकड़ में फैले पहाड़ पर मरासिल्ली बाबा विराजमान हैं. मुख्य पुजारी सुमेश पाठक ने बताया कि जो भक्त सच्ची आस्था के साथ बाबा से मांगते हैं अवश्य पूरा होता है. सोमवार को जलाभिषेक के लिए रविवार की देर रात से ही शिव भक्त पहाड़ पर जुटने लगते हैं. सावन को लेकर पहाड़ के नीचे दर्जनों पूजन सामग्री की दुकानें सज गयी है मान्यता है कि रामायण का झारखंड से लगाव रहा है. गुमला, लोहरदगा, रांची, सिमडेगा व देवधर समेत कई जिलों में भगवान श्री राम के चरण पड़े हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां महर्षि वाल्मीकि जी ने तपस्या की थी. वाल्मीकि जी राम राम का जप कर रही थे. लेकिन, लोगों की मरा मरा सुनाई दे रहा था. इसलिए पहाड़ का नाम मरासिल्ली पड़ा.

सावन की पहली सोमवारी आज, पहाड़ी मंदिर में भक्तों का उमड़ा जनसैलाब

मरासिल्ली की धरती: तप, भक्ति और चमत्कारों का संगम

मान्यता है कि झारखंड की धरती का गहरा नाता रामायण काल से है. गुमला, लोहरदगा, रांची, सिमडेगा और देवघर जैसे जिलों में भगवान श्रीराम के चरण पड़े थे. ऐसी ही एक पवित्र जगह है मरासिल्ली पहाड़, जहां महर्षि वाल्मीकि ने तपस्या की थी. कहते हैं, वे “राम-राम” का जाप कर रहे थे, लेकिन लोगों को “मरा-मरा” सुनाई देता था, जिससे इस पहाड़ का नाम मरासिल्ली पड़ा. यहां स्थित शिवलिंग को लेकर यह आस्था है कि वह स्वयंभू है — यानी किसी ने उसे बनाया नहीं, बल्कि वह स्वयं प्रकट हुआ. शिवलिंग की स्थापना कब और कैसे हुई, इसकी कोई ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन श्रद्धा से ओतप्रोत वातावरण इसे अत्यंत पवित्र बनाता है.

कुंड में निवास करते हैं दर्जनों सांप, भक्तों को देते हैं दर्शन

मरासिल्ली पहाड़ पर नौ जलकुंड हैं, जिनमें से मुख्य कुंड का जल कभी नहीं सूखता. इसकी गहराई जानने के लिए सात खटिया की रस्सी डाली गई थी, फिर भी तल नहीं मापा जा सका. कुंड में दर्जनों सांप निवास करते हैं, जो कभी-कभी भक्तों को दर्शन भी देते हैं. आज मरासिल्ली बाबा की ख्याति दिन-ब-दिन बढ़ रही है. सिर्फ झारखंड ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन और जलाभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं. सावन के पावन महीने में यहां भक्तों का उमड़ता जनसैलाब इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा का सजीव प्रमाण है.

वाल्मीकि की तपोभूमि और स्वयं प्रकट हुए भोलेनाथ का धाम

मरासिल्ली पहाड़, झारखंड की धरती पर स्थित एक अद्भुत और पवित्र स्थल है, जिसे लेकर गहरी पौराणिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि महर्षि वाल्मीकि ने यहां कठोर तपस्या की थी। जब वे “राम-राम” का जाप कर रहे थे, तो स्थानीय लोगों को वह “मरा-मरा” सुनाई देता था। यही कारण है कि इस स्थान का नाम समय के साथ “मरासिल्ली” पड़ गया.

शिवलिंग हुआ स्वयं प्रकट

मरासिल्ली पहाड़ पर स्थित शिवलिंग को लेकर मान्यता है कि यह स्वयं प्रकट हुआ था। इस शिवलिंग का निर्माण किसने किया, कब और कैसे — इसकी कोई ठोस जानकारी नहीं है। यह रहस्य आज भी श्रद्धालुओं की आस्था को और भी गहरा करता है.

दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

मरासिल्ली बाबा की लोकप्रियता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। अब केवल झारखंड से ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां भोलेनाथ का जलाभिषेक करने आते हैं। सावन जैसे पावन महीनों में यह स्थल भक्ति, श्रद्धा और अद्भुत दिव्यता से भर उठता है.

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लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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